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International Women''s Day : महिला दिवस पर जया प्रदा ने महिलाओं के लिए दिए ये संदेश

अभिनेत्री जया प्रदा लंबे समय से राजनीति से भी जुड़ी रही हैं। वह सांसद भी रह चुकी हैं। महिलाओं के मुद्दों पर वह समय-समय पर अपने विचार प्रकट करती रही हैं। जया प्रदा अभी भी महिलाओं की दुनिया में बदलाव की दरकार मानती हैं। इस बदलाव के बाद ही हम सही मायने में महिला दिवस मना पाएंगे।

International Womens Day : महिला दिवस पर जया प्रदा ने महिलाओं के लिए दिए ये संदेश
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अभिनेत्री जया प्रदा लंबे समय से राजनीति से भी जुड़ी रही हैं। वह सांसद भी रह चुकी हैं। महिलाओं के मुद्दों पर वह समय-समय पर अपने विचार प्रकट करती रही हैं। जया प्रदा अभी भी महिलाओं की दुनिया में बदलाव की दरकार मानती हैं। इस बदलाव के बाद ही हम सही मायने में महिला दिवस मना पाएंगे। आज अगर महिलाओं के विकास की बात की जाए तो अब हर घर में लड़कियां पढ़ रही हैं, हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। इस विकास का श्रेय मैं महिलाओं को ही दूंगी। उनके आगे बढ़ने की और सीखने की ललक ने उन्हें आगे बढ़ाया है, फिर वो एयरफोर्स का पायलट बनना हो, इंदिरा गांधी जैसी तेज-तर्रार लीडर बनना हो या कल्पना चावला बनकर अंतरिक्ष में जाना हो।

महिलाओं ने स्वयं महसूस किया कि अगर वे खुद आगे बढ़ने की पहल नहीं करेंगी तो देश की आधी आबादी बहुत पिछड़ जाएगी। उनके मजबूत इरादों ने ही उन्हें कंप्लीट वूमेन का दर्जा दिया है, क्योंकि महिलाओं ने घर-परिवार और करियर सब कुछ बहुत अच्छे से और जिम्मेदारी से संभाला है। अगर वो घर पर हैं तो हमेशा कुछ-न-कुछ करती रहती हैं, जबकि ज्यादातर पुरुष घर पर हैं तो वे आराम करेंगे, अखबार पढ़ेंगे या टीवी देखेंगे। लेकिन घर की महिलाएं खाना पकाने और खाने के बाद भी फुर्सत नहीं पातीं। लगातार काम करते रहना जैसे स्त्री धर्म है, ऐसा करने के लिए कोई उन्हें कहता या आदेश नहीं देता है लेकिन यह उनकी जन्मजात विशेषता है कि वे परिवार के प्रति समर्पित रहती हैं।

मेरा मानना है कि महिलाओं के संदर्भ में अभी भी समाज में कुछ जरूरी बदलाव की जरूरत है, इसकी शुरुआत परिवार से होनी चाहिए। खासकर एक मां को बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं करना चाहिए। अनुशासन का पाठ दोनों को समान रूप से पढ़ाना चाहिए। देखा जाता है कि बेटे को ढील देने पर शादी के बाद वो पत्नी और परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूल जाता है।

ऑफिस से घर आने के बाद घरेलू कामों में पत्नी का हाथ बंटाना है, उस पर रौब नहीं दिखाना, अगर वो वर्किंग है तब भी और अगर हाउस वाइफ है तब भी, उसका सम्मान करना है, हर मां को ये सीख बेटे को बचपन से ही देनी चाहिए। ऐसी सीखें आज की जरूरत हैं, इस प्रकार की सीखों से समाज-परिवार बेहतर बनेगा। तभी हम सही मायने में महिला दिवस मनाएंगे। मां, बहन, बीवी, भाभी, मौसी, बुआ स्त्री का हर रिश्ता आदर और सम्मान से देखना होगा, तभी हर दिन महिला दिवस होगा।

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