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हर्षदीप कौर कर रही ''मनमर्जियां'', मचा रही हैं बवाल

हर्षदीप कौर जब छह साल की थीं, उन्होंने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। तेजपाल सिंह से उन्होंने शास्त्रीय संगीत और दिल्ली म्यूजिक थिएटर से वेस्टर्न म्यूजिक की ट्रेनिंग ली।

हर्षदीप कौर कर रही

हर्षदीप कौर जब छह साल की थीं, उन्होंने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। तेजपाल सिंह से उन्होंने शास्त्रीय संगीत और दिल्ली म्यूजिक थिएटर से वेस्टर्न म्यूजिक की ट्रेनिंग ली।

उन्होंने संगीत से जुड़े कई कॉम्पिटिशन में भी भाग लिया और ‘जूनून-कुछ कर दिखाने का’ जैसे रियालिटी शो की विनर भी रहीं। फिल्मों में पहला ब्रेक उन्हें 2003 में आई फिल्म ‘आपको पहले भी कहीं देखा हैं’ के गीत ‘सजना मैं हारी...’ के रूप में मिला था।

इसके बाद हर्षदीप ने कई बड़ी फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग की। उनके गाए गीतों में फिल्म ‘ये जवानी है दीवानी’ का ‘कबीरा...’, रईस का ‘जालिमा...’, रानी मुखर्जी की फिल्म ‘हिचकी’ का टाइटल ट्रैक और फिल्म ‘राजी’ का ‘दिलबरो...’ को खूब पसंद किया गया।

इन दिनों हर्षदीप कौर की चर्चा अभिषेक बच्चन, तापसी पन्नू और विक्की कौशल की फिल्म ‘मनमर्जिया’ की वजह से हो रही है, इसमें उन्होंने तीन गाने गाए हैं। साथ ही ‘हैप्पी फिर भाग जाएगी’ में गाया उनका टाइटल ट्रैक भी काफी पसंद किया जा रहा है।

अपने गीतों को मिले रेस्पॉन्स से हर्षदीप बहुत खुश हैं। वह कहती हैं, ‘फिल्म ‘मनमर्जिया’ के गाने बेहद रोमांटिक और जज्बाती हैं। यह अनुराग कश्यप की फिल्म है, इसमें हर बात को थोड़ा हटकर बयां किया गया है। गाने भी इसी अंदाज के हैं।

इस फिल्म के गानों को गाकर मुझे भी खुशी महसूस हुई। मैंने फिल्म ‘लव शव ते चिकन खुराना’, कोक स्टूडियो और लाइव शो पर पहले भी संगीतकार अमित त्रिवेदी के साथ काम किया है। वह मेरी आवाज के साथ एक्सपेरिमेंट करते हैं।

यही वजह है कि मैं उनके लिए गाना पसंद करती हूं। उनका संगीत मॉडर्न है। ‘मनमर्जिया’ फिल्म एक लव स्टोरी है, इसका म्यूजिक अमित ने बड़ी खूबसूरती से तैयार किया है। जो गाने मैंने गाए हैं, वे लव सॉन्ग्स हैं। ‘जैसी तेरी मर्जी’ टाइटल ट्रैक है।

एक और गीत ‘ग्रे वाला शेड...’ थोड़ा हटकर है। तीसरे गीत के बोल ‘चोंच लड़िया...’ हैं, यह बड़ा प्यारा सॉन्ग है, इसमें पहले प्यार के मीठे अहसास को बयां किया गया है।’

‘हैप्पी फिर भाग जाएगी’ के टाइटल ट्रैक के बारे में बात करते हुए हर्षदीप बताती हैं, ‘मैंने इस फिल्म का टाइटल ट्रैक गाया था। जब इसके सीक्वल के टाइटल सॉन्ग को गाने की बात सामने आई तो संगीतकार सोहेल सेन ने मुझे इसके लिए याद किया।

इस गाने को गाते हुए मुझे अपने अंदर की एक बिंदास पंजाबी कुड़ी को बाहर निकालना पड़ा। इसके अलावा जब सामने दलेर मेहंदी जैसी हाई पिच वाली आवाज हो तो मुझे भी उनकी तरह की हाई पिच में गाना था। इस गाने को गाते हुए, बहुत अच्छा एक्सपीरियंस हुआ।’

जब भी हर्षदीप कोई गाना गाती हैं तो कोशिश करती हैं कि उसे अलग तरह से गाएं, क्योंकि वह वर्सटाइल सिंगिंग करना चाहती हैं। वह कहती हैं, ‘मैंने इंडियन क्लासिकल म्यूजिक सीखा है, मैंने वेस्टर्न म्यूजिक की ट्रेनिंग ली है, यही वजह है कि मेरी सिंगिंग वर्सटाइल है।

मेरा भी मानना है कि प्लेबैक सिंगर को वर्सटाइल होना चाहिए। साथ ही सॉन्ग क्वालिटी पर भी हमेशा ध्यान देना चाहिए। मैं भी ऐसे गाने गाती हूं, जो सबको याद रहें। इसके अलावा मैं जो गाने गाती हूं, उनके लिरिक्स पर भी ध्यान देती हूं, मेरे लिए लिरिक्स का अच्छा होना बहुत जरूरी है।

अगर मैं महसूस करती हूं कि गीत के बोल अश्लील हैं तो उसे गाने से बचती हूं। मेरा मानना है कि गाने ऐसे होने चाहिए कि पूरा परिवार एक साथ बैठकर सुन सके। जब फिल्मों में नहीं गाती हूं तो लाइव परफॉर्मेंस करती हूं, इसमें भी अपने गाने गाती हूं। लोगों को मेरी आवाज में सूफी गाने ज्यादा पसंद आते हैं।’

गाने के अलावा हर्षदीप को म्यूजिक कंपोज करने का भी शौक है। वह बताती हैं, ‘अपने सिंगल्स के लिए म्यूजिक कंपोज करती हूं। इसमें गाती भी हूं। इस तरह मुझे दोनों काम करने का मौका मिलता है।

आगे भी इसे जारी रखना है।’ पिछले कुछ समय में म्यूजिक वर्ल्ड में जो बदलाव आए हैं, उससे हर्षदीप खुश हैं। वह कहती हैं, ‘डिजिटल क्रांति से नए सिंगर्स को बहुत फायदे हुए हैं।

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की वजह से कोई भी अपने टैलेंट को दिखा सकता है। कोई अब बड़ा ब्रेक मिलने का इंतजार नहीं करता है। यह न्यू कमर्स के लिए बेनिफिशियल है। इससे अच्छा सिंगिंग टैलेंट सामने आ रहा है।’

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