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गूगल ने डूडल बनाकर फिल्ममेकर वी. शांताराम को दी श्रद्धाजंली

शांताराम एक कुशल निर्देशक, फिल्मकार और शानदार अभिनेता थे।

गूगल ने डूडल बनाकर फिल्ममेकर वी. शांताराम को दी श्रद्धाजंली

गूगल ने शनिवार को डूडल बनाकर फिल्मकार वी. शांताराम को श्रद्धाजंली दी है। शांताराम का नाम फिल्म जगत में उनके सराहनीय योगदान के लिए जाना जाता है। इनका पूरा नाम 'राजाराम वांकुडरे शांताराम' था।

वी शांताराम एक कुशल निर्देशक, फिल्मकार और शानदार अभिनेता थे। कॅरियर के प्रारंभिक दौर में ये मराठी फिल्मों से जुड़े थे। फिर डॉक्टर कोटनिस के जीवन पर आधारित फिल्म 'डॉक्टर कोटनिस की अमर कहानी' के साथ इन्होंने हिंदी फिल्म जगत में कदम रखा। यह सन् 1946 की बात है।
बेहतरीन शुरुआत के साथ ही इन्होंने एक के बाद एक हिट फिल्में दीं। इनमें 'अमर भूपाली' (1951), 'झनक-झनक पायल बाजे' (1955), 'दो आंखें बारह हाथ' (1957) और 'नवरंग' (1959) खास हैं। रिश्तों और भावनाओं की गहराई समेटे हुए इनकी फिल्म दर्शकों के दिल पर राज करती थी। खूबसूरत संगीत से सजी ये फिल्में आज भी सिनेप्रेमियों की पसंदीदा हैं।
शांताराम का जन्म महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 18 नवंबर 1901 को एक साधारण परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद ही छोटी उम्र में इन्हें कामकाज करना पड़ा। शांताराम ने 12 साल की उम्र में रेलवे वर्कशाप में अप्रेंटिस के तौर पर काम किया।
google remembers legendary filmmaker v shantaram with a doodle devote to him
इसके बाद एक नाटक मंडली में शामिल हुए। यहीं से बाबूराव पेंटर की महाराष्ट्र फिल्म कंपनी से जुड़ने का मौका इन्हें मिला। यहां ये छोटे-मोटे काम करते थे लेकिन इनकी नजर फिल्म निर्माण से जुड़ी बारीकियों पर होती थी। बाबूराव पेंटर ने ही इन्हें फिल्म 'सवकारी पाश' में बतौर अभिनेता पहला ब्रेक दिया।
वी. शांताराम: वह निर्देशक जिसने सबसे पहले बनाईं प्रयोगवादी फिल्में
शांताराम ने अपनी फिल्मों के जरिए कई सामाजिक मुद्दों को उठाया। इनके द्वारा बनाई गई 'पड़ोसी' (1940), 'दो आंखें बारह हाथ (1957)' और 'नवरंग' (1959) जैसी फिल्मों को फिर से बनाने की कल्पना करना भी आसान नहीं है। एक बहादुर और जिम्मेदार जेलर की जिंदगी पर बनी फिल्म दो आंखे बारह हाथ शांताराम की सबसे चर्चित फिल्म है।
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