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''जीनियस'' में एक्शन, देशभक्ति और टेक्नोलॉजी का टच देनी की कोशिश की गई हैः अनिल शर्मा

अनिल शर्मा ने बॉलीवुड को ‘गदर-एक प्रेम कथा’, ‘हीरो-लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई’, ‘हुकूमत’, ‘ऐलान-ए-जंग’, ‘वीर’ और ‘सिंह साहब द ग्रेट’ जैसी कई बेहतरीन फिल्में दी हैं।

अनिल शर्मा बॉलीवुड में पैंतीस सालों से हैं। बतौर राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर वह अलग पहचान रखते हैं। ‘श्रद्धांजलि’, ‘गदर-एक प्रेम कथा’, ‘हीरो-लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई’, ‘हुकूमत’, ‘ऐलान-ए-जंग’, ‘वीर’ और ‘सिंह साहब द ग्रेट’ जैसी कई बेहतरीन फिल्में उन्होंने डायरेक्ट की हैं।

उनकी ज्यादातर फिल्मों में देशप्रेम की भावना मौजूद रहती है। दर्शक भी अनिल शर्मा की ऐसी ही फिल्मों को पसंद करते रहे हैं। अब बतौर डायरेक्टर वह एक और फिल्म ‘जीनियस’ लेकर आ रहे हैं। इस फिल्म से जुड़ी बातें डिटेल में अपनी जुबानी बता रहे हैं डायरेक्टर अनिल शर्मा।

‘जीनियस’ बनाने का आइडिया

फिल्म ‘सिंह साहब द ग्रेट’ के बाद मैंने अपने आपको नए सिरे से खोजना शुरू किया। मेरा बेटा उत्कर्ष और बेटी दोनों उस वक्त अमेरिका में थे। बेटा उत्कर्ष फिल्ममेकिंग की पढ़ाई कर रहा था। मैं भी अमेरिका चला गया। वहां मैंने नए जॉनर की तलाश शुरू की। लेकिन मैं अपने स्टाइल वाले जॉनर से हटना भी नहीं चाह रहा था।

मैं जानता हूं कि लोग अनिल शर्मा की फिल्म में देशभक्ति के साथ-साथ मनोरंजन भी चाहते हैं। ‘जीनियस’ में एक्शन, इमोशन के साथ देशभक्ति के भी रंग हैं। जब मैं इस फिल्म की कहानी लिख रहा था तो बेटे की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। उसने भी कहानी पर अपनी राय दी। मुझे चार साल लगे फिल्म ‘जीनियस’ की कहानी लिखने में।

बेटे की शुरुआत से खुश हूं

कुछ लोगों को लग रहा है कि बेटे को लेकर फिल्म बनाने के बाद मैं दबाव में हूं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। सिर्फ कहानी लिखते समय मुझ पर किरदारों को अच्छा बनाने का दबाव होता है। मैंने यह सोचकर फिल्म नहीं लिखी थी कि इसी से बेटे को लॉन्च करूंगा।

फिल्म के दो और राइटर अनिल सिरवैया और अमजद अली भी मेरे साथ लगातार काम करते रहे। जब कहानी तैयार हुई तो हमें लगा कि किसी नए चेहरे को लेना चाहिए। फिर उत्कर्ष के बारे में सोचा गया।

वह बाल कलाकार के तौर पर सनी देओल के साथ फिल्म ‘गदर- एक प्रेम कथा’ में काम कर चुका था, उसकी एक्टिंग से सभी वाकिफ थे। आज फिल्म ‘जीनियस’ में उत्कर्ष को देखकर खुशी हो रही है। हर पिता की तरह मेरी भी ख्वाहिश है कि मेरा बेटा आगे बढ़े, खूब सफलता पाए।

फिल्म की कहानी

यह फिल्म एक अनाथ लड़के वासुदेव शास्त्री उर्फ जीनियस की कहानी है। वह पढ़-लिखकर इंजीनियर बनता है। वासुदेव को अपने देश से बहुत प्यार है। बाद में वह खुफिया एजेंसी रॉ के साथ जुड़ता है। जब वासुदेव अपने मिशन में कामयाब होने जा रहा होता है।

तभी उसका सामना गैंगस्टर शाह (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) से होता है, जो देश का दुश्मन है। कैसे वासुदेव उससे लड़ता है, देश की रक्षा करता है, यही फिल्म की कहानी है। साथ ही इसमें वासुदेव और नंदिनी (इशिता चौहाण) की लव स्टोरी भी है।

साइंस-टेक्नोलॉजी का टच

जैसा मैंने पहले ही कहा कि इस बार फिल्म में मेरे पुराने स्टाइल के साथ-साथ कुछ नयापन भी है। देशभक्ति के साथ मैंने साइंस, टेक्नोलॉजी का टच भी रखा है। मैं खुद साइंस का स्टूडेंट था। मेरा बेटा उत्कर्ष भी साइंस का स्टूडेंट रहा है।

मेरे राइटर भी साइंस के स्टूडेंट रहे हैं। इस तरह फिल्म में साइंस का एंगल डालना आसान रहा। इस वजह से कहानी और भी अच्छी बन गई है। मैं यकीन से कह सकता हूं कि फिल्म ‘जीनियस’ दिल-दिमाग को झकझोर देगी।

नवाजुद्दीन बने विलेन

फिल्म में उत्कर्ष के किरदार को हमने एक जीनियस दिखाया है, ऐसे में उसके सामने विलेन को भी स्ट्रॉन्ग दिखाना था। ऐसे में हमें किसी उम्दा कलाकार की जरूरत थी। हमने नवाजुद्दीन सिद्दीकी से बात की। वह फिल्म करने को तैयार हो गए।

फिल्म ‘जीनियस’ में वह विलेन बने हैं। फिर हीरोइन के तौर पर इशिता चौहाण को चुना है। पूरे डेढ़ साल लगे मुझे इशिता को ढूंढ़ने में। दरअसल, मुझे 17-18 साल की लड़की चाहिए थी, जो दिखने में सीधी-सादी हो। इसके अलावा इस फिल्म में मिथुन दा भी हैं, जो कि रॉ के सीनियर ऑफिसर बने हैं।

सिचुएशनल म्यूजिक

फिल्म में पांच गाने हैं। हिमेश रेशमिया ने बहुत ही बेहतरीन संगीत दिया है। हर गाना फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाता है। रोमांटिक सॉन्ग भी बहुत अच्छे हैं, यंगस्टर्स को जरूर पसंद आएंगे।

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