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हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा होती है ‘खिड़की’ : उमेश शुक्ला

उमेश इन दिनों फिल्म ‘102 नॉट आउट’ को लेकर चर्चा में हैं।

हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा होती है ‘खिड़की’ : उमेश शुक्ला
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उमेश शुक्ला वैसे तो फिल्मों के जाने-माने डायरेक्टर हैं। फिल्म ‘ओह माय गॉड’ जैसी बेहतरीन और हिट फिल्म को उन्होंने ही डायरेक्ट किया था। वह अमिताभ बच्चन और परेश रावल के साथ ‘102 नॉट आउट’ भी डायरेक्ट कर रहे हैं। लेकिन आजकल उमेश सब टीवी के सीरियल ‘खिड़की’ को लेकर चर्चा में हैं। इसमें मजेदार कहानियों को मिनी सीरीज के एपिसोड्स में दिखाया जा रहा है। एक कहानी खत्म होती है फिर दूसरी शुरू होती है। सीरियल की कहानियां रियल लाइफ से जुड़ी हैं। लेकिन सीरियल का नाम आखिर ‘खिड़की’ क्यों रखा गया है? सीरियल के कॉन्सेप्ट से जुड़ी बातें डायरेक्टर उमेश शुक्ला से...
सबसे पहले यह सवाल उठता है कि उमेश बड़े पर्दे से छोटे पर्दे पर डायरेक्शन करने के लिए कैसे राजी हो गए? इसका वह जवाब देते हैं, ‘मेरे लिए बड़ा पर्दा-छोटा पर्दा जैसी बातें मायने नहीं रखती हैं। डायरेक्ट करने के लिए बस मुझे अच्छी कहानी मिलनी चाहिए और दर्शकों तक पहुंचनी चाहिए। मुझे जब ‘खिड़की’ का कॉन्सेप्ट बताया गया, तो लगा कि कुछ नया और अलग करने को मिल रहा है, इसलिए इसे डायरेक्ट करने के लिए राजी हो गया।’
सीरियल का नाम ‘खिड़की’ काफी अलग है। ऐसा नाम रखने के पीछे की वजह उमेश बताते हैं, ‘हमारी जिंदगी में खिड़की का बहुत महत्व है। हर घर में एक खिड़की होती है, जिससे बाहर-अंदर दोनों जगह के बारे में जाना जा सकता है। ऐसे ही हमारे दिल में भी एक खिड़की होती है, जब यह खुलती है, तो जिंदगी खुशियों से भर जाती है। अगर यह बंद रहे, तो जिंदगी नीरस हो जाती है। खिड़की हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा होती है, इसलिए सीरियल का नाम ‘खिड़की’ है।’
देखा जाए, तो ‘खिड़की’ एक कॉमिक-ह्यूमर बेस्ड शो है, टीवी पर कई शोज आ रहे हैं, जो कॉमेडी कंटेंट दिखा रहे हैं। ऐसे में ‘खिड़की’ इन सब से कितना अलग है? पूछने पर उमेश बताते हैं, ‘टीवी पर कॉमेडी के नाम पर काफी कुछ दिखाया जाता है, लेकिन हमारा सीरियल उनसे बिल्कुल अलग है। हम असल लोगों की जिंदगी में घटी सच्ची कहानियों को दर्शकों को दिखाएंगे। इन कहानियों में, इमोशंस हैं, हंसी है और एक मैसेज भी है। सबसे बड़ी बात ‘खिड़की’ को परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं। वैसे ‘खिड़की’ जैसा कॉन्सेप्ट अब तक टीवी पर नहीं आया है, इसलिए यह हर मायने में अलग सीरियल है।’
‘खिड़की’ की कहानियां आम लोगोें की हैं। इन कहानियों को चुनने का आधार क्या होता है, इस प्रश्न के जवाब में डायरेक्टर उमेश बताते हैं, ‘हमारे पास हजारों कहानियां आर्इं। मैं अकेला यह काम नहीं कर सकता हूं, हमारी टीम मिलकर इस काम को करती है। जो कहानी बहुत मजेदार थी, उन्हें हमने चुना। फिर उस शख्स से बात की, जिसकी वो कहानी थी। उससे परमिशन ली, उसके बाद कंटेंट को इंप्रूव किया। फिर हमारे एक्टर्स ने इन कहानियों को इतने उम्दा तरीके से निभाया कि सबको सीरियल देखकर अच्छा लगेगा।’
‘खिड़की’ में मजेदार किस्से-कहानियां हैं, जो सच्ची हैं। रियल लाइफ में उमेश के साथ कोई ऐसा किस्सा घटा हो, जिसकी वजह से जिंदगी में बदलाव आया हो? उमेश याद करते हुए एक किस्सा शेयर करते हैं, ‘पहले मैं पूजा-पाठ करवाता था। मुझे विधिवत पूजा कराना आता है। लेकिन लोगों को पूजा-पाठ कराने में भी जल्दी लगी रहती थी। मैंने इस बात पर गहन विचार किया तो लगा कि लोगों के मन में अब वो श्रद्धा-भाव नहीं रहे, जो कभी देखे जाते थे। मुझे लगा कि ऐसा काम करने से फायदा नहीं, जिसमें लोगों की आस्था सही रूप में न हो। मैंने ठान लिया कि ऐसा कोई काम करूंगा कि जिससे लोगों की जिंदगी में कोई चेंज आए। फिर मैंने थिएटर करना शुरू किया, इसके बाद फिल्मों में डायलॉग राइटिंग शुरू की फिर फिल्में डायरेक्ट करनी शुरू की। इस तरह मेरी जिंदगी बदल गई।’
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