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Fathers Day Special : अपने बाबू जी को अपना आदर्श मानते हैं अमिताभ बच्चन

फादर्स-डे के मौके पर अमिताभ बच्चन साझा कर रहे हैं, अपने पिता हरिवंश राय बच्चन से जुड़ी यादें।

Fathers Day Special : अपने बाबू जी को अपना आदर्श मानते हैं अमिताभ बच्चन
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मेरे आदर्श मेरे बाबू जी
जहां अमिताभ बच्चन का सिनेमा जगत में एक कद है, वहीं उनके पिता कवि हरिवंशराय बच्चन का भी हिंदी साहित्य जगत में बहुत ऊंचा स्थान है। अपने दौर में वह जाने-माने कवि थे। उनकी कविताएं अमिताभ के जीवन में बहुत महत्व रखती हैं। यह कवितायेँ आज भी अमिताभ को कंठस्थ हैं। वह इन्हें मंच पर कभी-कभी अपनी आवाज में सुनाते भी हैं। फादर्स-डे के मौके पर अमिताभ बच्चन साझा कर रहे हैं, अपने पिता हरिवंश राय बच्चन से जुड़ी यादें।
मेरी यादों में रहेंगे हमेशा
मैं बाबूजी को हमेशा ही याद करता हूं। वो भले ही आज हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन मेरी यादों में हमेशा रहेंगे। जिस तरह भगवान दिखते नहीं, लेकिन वो दिल में बसते हैं, उसी तरह मेरे पिता जी भी मेरे दिल में बसे हैं। वहां से वह कभी नहीं निकल सकते। मुझे जब उनकी बहुत याद आती है, मैं उनकी तस्वीर से बातें कर लेता हूं। उस वक्त मुझे ऐसा लगता है, जैसे वह मेरी बात सुन रहे हैं।
मेरे जीवन पर बाबू जी का प्रभाव
बाबूजी का मेरे जीवन पर बहुत प्रभाव रहा है। वो मेरे आदर्श हैं। मैंने उनकी बातों को अपने जीवन में पूर्णत: लागू किया है। बाबूजी विद्वान थे, उनकी कही हर बात में कोई ना कोई शिक्षा होती थी। फिर चाहे उनकी कविताएं हों या लेख। बाबू जी, वही लिखते थे, जो अपने जीवन में अनुभव करते थे। जैसे मैं उनके बारे में सोचता था कि वे दुनिया के सबसे अच्छे पिता हैं, वैसे ही वह भी मेरे बारे में सोचते थे कि उनका बेटा लाखों में एक है।
उनके साथ बिताए पल अनमोल
बाबूजी की एक बात हमेशा याद आती है। जब वह बीमार चल रहे थे, मैं अपनी फिल्मों की शूटिंग में बिजी रहता था, उस वक्त बाबूजी मुझसे कहते थे-बेटा दिन में एक बार हमारे पास आ जाया करो, तुम्हें देख लेते हैं, तो एक तसल्ली मिलती है। उनके यह कहने के बाद मैं बिजी होने के बावजूद उनके साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजारता था। बाबूजी के साथ बिताया हर पल मेरे लिए अनमोल है।
उनकी सारी रचनाएं प्रिय हैं
बाबूजी की कई सारी कविताएं मुझे याद हैं। ‘जीवन की आपाधापी में...’ और ‘जो बीत गई सो बात गई...’ जैसी कविताओं ने मेरा हमेशा मार्गदर्शन किया है। जीवन के सबक बताए हैं। बाबूजी की सभी कविताएं मुझे बहुत प्रिय हैं। मैंने बाबूजी को एक वेबसाइट समर्पित की है, जिसमें उनकी सभी रचनाएं उपलब्ध होंगी।
मैं पिता से ज्यादा दोस्त हूं
बाबूजी और हमारे बीच प्यार बहुत था, लेकिन हम दोस्तों की तरह व्यवहार नहीं करते थे, क्योंकि वो जमाना थोड़ा अलग था। उस दौर में हर रिश्ते की अपनी एक गरिमा थी। लेकिन आज ऐसा नहीं है, आज काफी कुछ बदल गया है, मैं और अभिषेक पिता-पुत्र कम और दोस्त ज्यादा हैं।
एक बात का अफसोस है
जब बाबूजी जिंदा थे, तब राजनीति से जुड़ने के बाद मुझ पर कुछ इल्जाम लगे थे, खासतौर पर बोफोर्स को लेकर। बाद में 2012 में मुझे निर्दोष करार दिया गया। लेकिन उस वक्त बाबूजी मुझे छोड़ कर जा चुके थे। जब मुझे निर्दोष करार दिया गया तो मेरे मन में एक ही बात आई कि-काश, ये फैसला उस वक्त आ गया होता, जब बाबूजी जिंदा थे। उनको पता चलता कि उनके बेटे को बेवजह बदनाम किया गया था, मेरी ये इच्छा अधूरी रह गई।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, कैसे बयां कर रहे हैं अभिषेक बच्चन भी अपने पिता से अपने खूबसूरत रिश्ते को -

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