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Exclusive Interview: मनोज बाजपेयी ने फिल्म भोसले को लेकर किया खुलासा

मनोज बाजपेयी स्टारडम की बजाय अदाकारी को अहमियत देने वाले एक्टर हैं। यही वजह है कि वह मेन स्ट्रीम सिनेमा के साथ ही लीक से हटकर बनने वाले सिनेमा में भी व्यस्त रहते हैं।

Exclusive Interview: मनोज बाजपेयी ने फिल्म   भोसले   को लेकर किया खुलासा
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मनोज बाजपेयी स्टारडम की बजाय अदाकारी को अहमियत देने वाले एक्टर हैं। यही वजह है कि वह मेन स्ट्रीम सिनेमा के साथ ही लीक से हटकर बनने वाले सिनेमा में भी व्यस्त रहते हैं।

साथ ही मनोज शॉर्ट फिल्में भी कर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिलीज हो रही ‘सत्यमेव जयते’ में जॉन अब्राहम के साथ वह भी नजर आएंगे। इस फिल्म का विषय देशभक्ति से जुड़ा है।

फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ की थीम क्या है?

यह एक ऐसी मास एंटरटेनर फिल्म है, जिसमें अहम मुद्दा भ्रष्टाचार है। इसमें मैंने एक पुलिस अफसर का किरदार निभाया है, जो अपराधियों को लेकर बहुत सख्त है। दूसरी तरफ जॉन अब्राहम एक आम इंसान के किरदार में हैं, इन दोनों के टकराव के बीच अहम मुद्दा भ्रष्टाचार है।

अब आप यह कतई मत सोचिए कि मैंने इसमें भ्रष्ट पुलिस अफसर का किरदार निभाया है। ‘सत्यमेव जयते’ में मैं ईमानदार पुलिस अफसर बना हूं, जो कि एक अच्छे परिवार से आता है। जॉन अब्राहम का किरदार भी एक अच्छे बैकग्राउंड से आता है। लेकिन इन दोनों के बीच टकराव होता है।

फिल्म में करप्शन का मुद्दा उठाया है। तो क्या कोई हल भी दिखाया गया है?

कलाकार या फिल्मकार के तौर पर हमारा काम मुद्दों को या समस्याओं को उठाना है, हल बताना नहीं। हम हल बताने वालों में से नहीं हैं। हम तो कहानी सुनाने वाले हैं।

फिल्म के ट्रेलर को देखकर लगता है कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पुलिस वाले की हत्या की जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा?

किसी की हत्या कर देने से भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा बात यह नहीं है। मुद्दा यह है कि जो आम आदमी है, वह इस तरह का कदम क्यों उठाता है? उसके पीछे उसकी बहुत बड़ी पीड़ा होती है। आम आदमी की इसी पीड़ा को समझने की कोशिश फिल्म ‘सत्यमेव जयते’ में की गई है।

आम आदमी भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी कदम उठाता है तो वह कदम उसकी पीड़ा की यात्रा होती है। उसके पीछे कोई कहानी होती है। जब उससे वह पीड़ा झेली नहीं जाती तो वह उसके खिलाफ आवाज उठाता है। उस पीड़ा को जानने की जरूरत है।

आप एक फिल्म ‘गली गुलइयां’ कर रहे हैं, इसके बारे में कुछ बताइए?

यह एक साइकोलॉजिकल ड्रामा फिल्म है। यह फिल्म एक ऐसे इंसान की कहानी है, जो अपने पड़ोस में हो रहे बच्चे पर जुर्म से व्यथित है। फिर उस बच्चे को बचाने की पूरी जर्नी है। उसके परिवार से बचाने की जर्नी है।

फिल्म ‘गली गुलइयां’ को हाल ही में न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में काफी सराहा गया और मुझे इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिला। इस फिल्म के निर्देशक दीपेश जैन की यह पहली फिल्म है। इससे पहले यह फिल्म 15 अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में धूम मचाते हुए प्रशंसा बटोर चुकी है।

आपने जब से शॉर्ट फिल्मों में काम करना शुरू किया, इसके बाद से इनका ट्रेंड बॉलीवुड में काफी बढ़ गया, क्या कहेंगे?

दरअसल, मैं चाहता था कि अच्छी शॉर्ट फिल्में बनें। पहले कोई कुछ भी बनाकर डाल रहा था। जब से मैंने ‘तांडव’, ‘कृति’ और ‘हाउस’ जैसी शॉर्ट फिल्मों में एक्टिंग की, उसके बाद लोगों ने गंभीरता से इनको लेना शुरू किया।

अब अनाप-शनाप शॉर्ट फिल्म कोई नहीं बना रहा है। अब लोगों ने शॉर्ट फिल्मों को भी प्रोफेशनली लेना शुरू कर दिया है। इससे इस प्लेटफॉर्म की इज्जत बढ़ी है। अब लोग मेहनत कर रहे हैं। शॉर्ट फिल्मों के जरिए अच्छी कहानी कहने की कोशिश कर रहे हैं, जो बहुत बड़ा बदलाव है।

आपने एक शॉर्ट फिल्म ‘भोसले’ बनाई है। इस फिल्म को लेकर कुछ कहना चाहेंगे?

मुझे लगता है कि अभी इस फिल्म को लेकर बात करना जल्दबाजी होगी। अभी हमने इसकी शूटिंग पूरी की है। हम पहले इसे इंटरनेशनल लेवल पर रिलीज करेंगे। उसके बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाएंगे। यह फिल्म एक अवकाश प्राप्त हवलदार की कहानी है, जो मुंबई शहर में रहता है। इससे अधिक बताना अभी सही नहीं है।

इसके अलावा कौन-सी फिल्में कर रहे हैं?

दो-तीन फिल्में हैं। जिनमें से एक ‘सोन चिरैया’ भी है।

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