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Interview: ''मिर्जापुर'' के डॉन मुन्ना ने बतया किस में मिलता है ''सैटिस्फेक्शन''

दिव्येंदु शर्मा ने कई फिल्मों में पैरलल, साइड कैरेक्टर निभाए हैं। लेकिन वह सेलेक्टिव काम ही करना चाहते हैं। अपनी इमेज से हटकर वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ में नेगेटिव कैरेक्टर निभा रहे हैं।

Interview:
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अब तक ‘प्यार का पंचनामा’, ‘चश्मेबद्दूर’, ‘बत्ती गुल मीटर चालू’, ‘टॉयलेट-एक प्रेमकथा’ जैसी कई फिल्मों में सिंपल, फन लविंग कैरेक्टर दिव्येंदु शर्मा ने निभाए हैं। लेकिन अब वह अपनी इमेज से हटकर किरदार एक वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ में निभा रहे हैं। फिल्म करियर और वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ से जुड़ी बातें, दिव्येंदु शर्मा से।

आपको अपना करियर कहां जाता हुआ नजर आ रहा है?

भविष्य तो कोई नहीं जानता। मैं कम फिल्में सिर्फ इसलिए करता हूं क्योंकि मेरी एक ही तमन्ना है कि लोग मुझे हर बार अलग किरदार में देखें। लोगों को मेरा किरदार यकीन करने लायक लगना जरूरी है।

मैं आगे भी अलग तरह का काम ही कर रहा हूं, लेकिन इसमें से कितना सफल हो पाऊंगा, इसका दावा मैं कर नहीं सकता हूं। हां, मैं इस बात का भरोसा दे सकता हूं कि मैं पूरे मन से काम करूंगा।

बहुत जल्द दर्शक मुझे वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ में देखेंगे, जो एक क्राइम ड्रामा है। इसमें मेरा किरदार एकदम डार्क है। अब तक इस तरह के किरदार में दर्शकों ने मुझे नहीं देखा है। अमेजॉन पर 16 नवंबर से इसका टेलीकास्ट हो चुका है।

आपको ‘मिर्जापुर’ में एक बुरे व्यक्ति का किरदार निभाने का मौका कैसे मिला? आपकी इमेज तो एक भले इंसान की है?

पहले मुझे इस सीरीज में बबलू के किरदार का ऑफर आया था, जिसे अब विक्रांत मैसी निभा रहे हैं। हमने चार-पांच बार इसकी स्क्रिप्ट पढ़ी, उसके बाद निर्देशक अंशुमन करण ने मुझसे पूछा कि मुन्ना त्रिपाठी के किरदार को लेकर मेरी क्या सोच है?

मैंने कहा कि यह अच्छा किरदार है। इसमें कई लेयर हैं। लोग इसे जरूर पसंद करेंगे। यह बेहतरीन लिखा हुआ किरदार है। फिर उनके कहने पर मैंने इसे स्वीकार कर लिया क्योंकि मैं चुनौतीपूर्ण किरदार करने में यकीन करता हूं।

मुन्ना के किरदार को लेकर क्या कहेंगे?

मुन्ना बहुत गुस्सैल, बात-बात पर गाली-गलौज और मारा-मारी करने वाला शख्स है। लेकिन इसकी वजहें कुछ हालात हैं। वह बहुत जटिल इंसान है। वह सोने का चम्मच लेकर पैदा हुआ है।

वह अपने पिता से अच्छे रिश्ते रखना चाहता है। पिता से उपेक्षा मिलने पर हिंसात्मक काम करने लगा है। इस सीरीज को देखते हुए कई जगहों पर दर्शक मुन्ना त्रिपाठी को गलत नहीं मानेंगे।

इस तरह के किरदार में ओवर होने का खतरा बना रहता है?

ऐसा नहीं होगा। राइटर्स ने मेरे किरदार को बहुत अच्छे ढंग से लिखा है। मुन्ना त्रिपाठी सत्तर या अस्सी के दशक का विलेन नहीं है। वह जो कुछ करता है, उसके पीछे कोई न कोई वजह होती है।

‘मिर्जापुर’ की शूटिंग वाराणसी और मिर्जापुर में करने के अनुभव कैसे रहे?

हमने रियल लोकेशन पर शूटिंग की है। ऐसा महसूस किया कि मेरे किरदार को वाराणसी और मिर्जापुर की गलियों, सड़कों से एनर्जी मिली। जिस माहौल का किरदार है, उस माहौल में शूट करने का बड़ा असर होता है।

वेब सीरीज का फ्यूचर आप किस तरह देखते हैं?

इन दिनों वेब सीरीज में बहुत अच्छे कंटेंट पर काम हो रहा है। अच्छे किरदार लिखे जा रहे हैं। वेब सीरीज का मार्केट बहुत बड़ा है। भारत में यह अभी बढ़ रहा है। फिल्म देखने के लिए टिकट खरीदकर जाना होता है।

टिकटों के दाम सस्ते नहीं रहे। वेब सीरीज में हर बार यह चिंता नहीं सताती है। आपने साल में एक बार किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के पैसे भर दिए तो साल भर उसके प्रोग्राम देखते रहेंगे।

दूसरी बात वेब सीरीज से कलाकार को अपनी क्षमता का अहसास होता रहता है। अभी लोग समझ नहीं रहे हैं कि फिल्म की बजाय वेब सीरीज में कॉम्पिटिशन सबसे ज्यादा है।

विश्व की सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज और भारतीय वेब सीरीज एक ही प्लेटफॉर्म पर है, तो कंपैरिजन स्ट्रेट होता है ऐसे में पसंद न आने पर दर्शक एक सेकेंड में बंद कर देते हैं।

आपको कहां ज्यादा सैटिस्फेक्शन मिल रहा है?

मुझे मीडियम नहीं बल्कि कहानी और किरदार के आधार पर संतुष्टि मिलती है। फिल्म दो से ढाई घंटे की होती है। जबकि वेब सीरीज दस एपिसोड की होती है, जिसमें हर किरदार को डेवलप होने का पूरा मौका होता है। वेब सीरीज में कलाकार खुलकर काम करने का अवसर पाता है।

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