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रामायण की सीता ''दीपिका चिखलिया'' ने खोले अपनी जिंदगी के कई राज, फिल्म ''गालिब'' से कर रही कमबैक

रामानंद सागर के धारावाहिक ‘रामायण’ में सीता की भूमिका निभाकर दीपिका चिखलिया घर-घर प्रसिद्ध हो गई थी। अब दीपिका हिंदी फिल्मों में वापसी कर रही हैं। वह राइटर धीरज मिश्रा और डायरेक्टर मनोज गिरी की हिंदी फिल्म ‘गालिब’ में एक अहम किरदार निभा रही हैं।

रामायण की सीता

रामानंद सागर के धारावाहिक ‘रामायण’ में सीता की भूमिका निभाकर दीपिका चिखलिया घर-घर प्रसिद्ध हो गई थी। इस धारावाहिक के बाद भी उन्होंने टीवी पर काम किया। हिंदी और रीजनल लैंग्वेज की फिल्में भी की। फिर वह इंडस्ट्री से दूर हो गई।

अब दीपिका हिंदी फिल्मों में वापसी कर रही हैं। वह राइटर धीरज मिश्रा और डायरेक्टर मनोज गिरी की हिंदी फिल्म ‘गालिब’ में एक अहम किरदार निभा रही हैं। हाल ही में दीपिका चिखलिया से लंबी बातचीत हुई। पेश है, बातचीत के चुनिंदा अंश-

दर्शक आज भी आपको रामायण की सीता के रूप में याद रखते हैं, इस छवि की वजह से फिल्मों में आपको नुकसान नहीं हुआ?

धारावाहिक ‘रामायण’ की सीता से ही मुझे पहचान मिली। आज भी सीता की भूमिका में लोगों को मेरा चेहरा याद है। मैं भी इस धारावाहिक और अपनी भूमिका को अपने करियर में बहुत खास मानती हूं। मैं सीता की भूमिका में इतनी प्रसिद्ध हो गई थी कि जहां भी जाती थी, लोग मुझे बड़े सम्मान और भक्ति की नजर से देखते थे।

लेकिन सीता की छवि, हिंदी फिल्म वालों को खटकती थी। जबकि दूसरी भाषाओं में मैंने खूब काम किया। बांग्ला, तेलुगू, तमिल और कन्नड़ फिल्मों में अच्छे रोल किए। राजश्री प्रोड्क्शन ने भी बॉलीवुड में मुझे मौका दिया था।

लगभग चौबीस साल बाद हिंदी फिल्मों में कमबैक की क्या वजह है? इस दौरान आप कहां बिजी रहीं?

मैंने गुजरात के बिजनेसमैन हेमंत टोपीवाला से शादी की। मेरी दो बेटियां हैं। मैं पॉलिटिक्स में भी एक्टिव रही, बीजेपी के टिकट पर गुजरात के बड़ौदा से सांसद रह चुकी हूं। 2016 में मैंने कलर्स गुजराती पर एक गुजराती सीरियल से कमबैक किया था। इसी बीच मुझे फिल्म ‘गालिब’ मिली। इसके बाद मैंने एक गुजराती फिल्म ‘नट सम्राट’ की है, यह फिल्म नाना पाटेकर की मराठी फिल्म का गुजराती रीमेक है।

‘गालिब’ किस तरह की फिल्म है?

देखिए, किसी आतंकवादी या मुजरिम की पत्नी और बच्चे पर जो गुजरती है, वही इस फिल्म में दिखाने की कोशिश की गई है। आमतौर पर लोग आतंकवादी की फैमिली को भी नफरत भरी निगाहों से देखते हैं। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि पत्नी को भी पता नहीं होता कि उसका पति आतंकवादी है।

‘गालिब’ की कहानी गालिब नाम के लड़के के पिता की फांसी के बाद से शुरू होती है। फिल्म में दिखाया गया है कि एक मां कैसे अपने बेटे को बड़ा करती है? और कैसे उसका बेटा बोर्ड के एग्जाम में टॉप करता है। इस कहानी में मां अपने बेटे में बदले की भावना पनपने नहीं देती है। वह अपने बेटे गालिब को हथियार की जगह किताब, कलम पर यकीन करने की सीख देती है। मैंने फिल्म में गालिब की मां का रोल किया है।

कहा जा रहा है कि यह फिल्म अफजल गुरु के बेटे से इंस्पायर है?

हां, कहानी में अफजल गुरु का टच है। लेकिन कहानी उस पर नहीं है। अफजल के बेटे का नाम गालिब है और हमारी फिल्म का नाम भी गालिब है। यही वजह है कि लोग अफजल गुरु से हमारी कहानी को कनेक्ट कर रहे हैं।

फिल्म में मां का किरदार निभाना आपके लिए आसान रहा होगा, क्योंकि आप असल जिंदगी में भी मां हैं?

मेरी बेटियां इक्कीस-बाइस साल की हैं। मैंने शादी से पहले भी मां के रोल किए हैं, लेकिन तब इतने अच्छे से किरदार से रिलेट नहीं कर पाती थी। अब पर्दे पर मां के किरदार को अच्छे से निभा पाती हूं, क्योंकि खुद भी मां होने का अहसास समझती हूं, जज्बात समझती हूं।

जब आपको यह फिल्म ऑफर की गई तो क्या रिएक्शन था?

मुझे अलग-अलग किस्म के रोल निभाना पसंद रहा है। जब मुझे फिल्म ‘गालिब’ ऑफर हुई थी तो इस रोल में एक्टिंग का स्कोप नजर आया। धीरज मिश्रा ने एक अलग ही नजरिए के साथ कहानी लिखी है। फिल्म में आखिर में मेरा डायलॉग है-अगर सरकार आपको बुरे काम की सजा देती है तो अच्छे काम की शाबाशी भी देती है।

फिल्म में दिखाया गया है, जो जज गालिब के पिता को फांसी की सजा देते हैं। बाद में गालिब के बोर्ड में टॉप करने पर इनाम भी देते हैं। यह फिल्म बहुत अच्छा मैसेज देती है, इस वजह से मैंने इसे एक्सेप्ट किया।

आज के सिनेमा में आप क्या बदलाव महसूस करती हैं?

आज तकनीकी रूप से फिल्म और टीवी बेहतर हो गया है। साथ ही रियलिस्टिक सिनेमा बन रहा है, जो बड़ी अच्छी बात है। मैं ऐसा सिनेमा करना भी चाहती हूं। लेकिन अब मैं फिल्मों में काम करने को ही प्रॉयोरिटी देना चाहूंगी, क्योंकि उसमें टीवी जितना समय नहीं लगता है।

क्या आप वेब सीरीज में भी इंट्रेस्टेड हैं?

बेशक वेब सीरीज में भी मैं इंट्रेस्टेड हूं। साथ ही मुझे लिखने का भी शौक है, कई बार सोचा है कि कुछ लिखूं।

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