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Interview: पूनम पांडे के ''शुगर बिस्किट'' के लिए दानिश अल्फाज ने बेले थे कई पापड़, किया खुलासा

आजकल बॉलीवुड में नए संगीतकाकारों और गायकों को जल्द ही काम करने का मौका मिल जाता है। दरअसल, यंग म्यूजिक कंपोजर, सिंगर डिजिटल प्लेटफॉर्म, यूट्यूब के जरिए अपने टैलेंट को दुनिया तक पहुंचा रहे हैं।

Interview: पूनम पांडे के

आजकल बॉलीवुड में नए संगीतकाकारों और गायकों को जल्द ही काम करने का मौका मिल जाता है। दरअसल, यंग म्यूजिक कंपोजर, सिंगर डिजिटल प्लेटफॉर्म, यूट्यूब के जरिए अपने टैलेंट को दुनिया तक पहुंचा रहे हैं, जिससे उनके लिए म्यूजिक वर्ल्ड के दरवाजे भी खुल रहे हैं।

दानिश अल्फाज भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के थैंकफुल हैं, जिसकी वजह से उन्हें एक फिल्म में बतौर संगीतकार, संगीत देने मौका मिला। शक्ति कपूर और पूनम पांडेय स्टारर, जगबीर दाहिया डायरेक्टेड फिल्म ‘द जर्नी ऑफ कर्मा’ में दानिश ने संगीत दिया है।

अपने म्यूजिक कंपोजर, सिंगर बनने के सफर के बारे में दानिश अल्फाज बताते हैं, ‘मैं उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से हूं। मैंने छह महीने तक बतौर आर्किटेक्ट नौकरी की थी, लेकिन उस काम में मन नहीं लगा।

दरअसल, मैं शुरुआत से ही सिंगर, कंपोजर बनना चाहता था। मैंने डिसाइड किया कि एक बार मुंबई जाकर अपनी किस्मत जरूर आजमाऊंगा। मुंबई में मैंने स्ट्रगल का दौर देखा, अच्छे और बुरे हर तरह के लोग मिले।

किसी तरह अपने पैसों से एक गाना बनाकर रिलीज किया, इसके बाद एक सिंगल ‘तेरा निशां’ रिलीज किया। लेकिन मुझे पहचान मिली पिछले साल टी सीरीज से रिलीज हुए सिंगल ‘तेरी तन्हाइयां’ से।

इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बहुत पसंद किया गया। इस गाने के बाद मेरी मुलाकात ‘द जर्नी ऑफ कर्मा’ के लाइन प्रोड्यूसर राकेश सबरवाल से हुई। उन्हें मेरा गाना पसंद आया।

राकेश सबरवाल ने मुझे एक सिचुएशन देकर उस पर एक गाना बनाने का काम दिया। मैंने उन्हें चार दिन बाद उस सिचुएशन पर एक गाना सुनाया ‘आओ ना…’ बनाकर दिया। यह सॉन्ग उन्हें पसंद आ गया। इसे लैला शर्मा ने गाया है।’

दानिश आगे बताते हैं, ‘इस फिल्म में मैंने तीन गाने कंपोज किए हैं। दूसरे गाने के बोल हैं ‘मौला मेरे…’, इसे भी मैंने लिखा और गाया है। यह गाना शक्ति कपूर और पूनम पांडेय पर फिल्माया गया है। मुझे खुशी है कि इस गाने को लोग पसंद कर रहे हैं।’

पहली बार किसी फिल्म के लिए दानिश ने संगीत तैयार किया है। इस दौरान उन्हें चुनौतियों का भी सामना भी करना पड़ा होगा? पूछने पर दानिश बताते हैं, ‘फिल्म का तीसरा सॉन्ग ‘शुगर बिस्किट…’ बनाना मेरे लिए काफी मुश्किल काम था।

दरअसल, डायरेक्टर ने इस सॉन्ग के लिए मुझे पहले एक वीडियो दिखाया, इसमें शक्ति कपूर और पूनम पांडेय पर कुछ रॉ फुटेज मौजूद थीं। इसे देखकर मुझे गाना बनाना था।

शायद पहली बार ऐसा हो रहा था कि वीडियो देखकर कोई कंपोजर, सॉन्ग राइटर गाना लिखे और उसकी धुन बनाए। खैर मुझे यह काम चैलेंजिंग लगा। मैंने गाना तैयार किया और लैला शर्मा के साथ मिलकर इसे गाया भी।

बाद में जब हमारे गाने को वीडियो फुटेज के साथ जोड़ा गया, अच्छे से एडिटिंग की गई तो बहुत ही अच्छा रिजल्ट सामने आया। देखकर लगा ही नहीं कि गाने का वीडियो पहले शूट हुआ था और ऑडियो बाद में बना है।’

दानिश के नाम के साथ अल्फाज शब्द जुड़ा हुआ है। वह खुद के गाने में, लिरिक्स में, अल्फाज की अहमियत को समझते भी हैं। दानिश कहते हैं, ‘बेशक अच्छे अल्फाजों के बिना कोई भी गाना मीठा और यादगार बन ही नहीं सकता।

आज भी पुराने गाने हमें खूबसूरत अल्फाजों की वजह से ही याद हैं। पुराने गानों के शब्दों में गहराई होती है, जो लोगों के दिल को छू जाते थे। यही वजह है कि मैं भी गीतों में अल्फाजों को बहुत अहमियत देता हूं।’

दानिश अल्फाज फिल्म ‘द जर्नी ऑफ कर्मा’ के अलावा कुछ और प्रोजेक्ट में भी बिजी हैं। वह राकेश सबरवाल के साथ एक और प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। साथ ही जल्द ही अपने दो सिंगल भी रिलीज करने की तैयारी में हैं।

हर सिंगर का, म्यूजिक कंपोजर का कोई फेवरेट सिंगर, कंपोजर भी होता है। दानिश के फेवरेट सिंगर्स, कंपोजर कौन हैं? पूछने पर वह बताते हैं, ‘मोहम्मद रफी और किशोर कुमार मेरे फेवरेट सिंगर्स हैं, इनका कोई सानी नहीं है।

आज के दौर के गायकों में अरिजीत सिंह और आतिफ असलम की आवाज पसंद है। कंपोजर्स में मेरे फेवरेट ए.आर. रहमान हैं, वह मेरे रोल मॉडल हैं। मैं उनके साथ काम करने की ख्वाहिश रखता हूं।’

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