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Dadasaheb Phalke Birthday: जानिए हिंदी फिल्मों के जनक 'दादासाहेब फाल्के' और पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' के बनने की कहानी

फाल्के ने फिल्मों की शूटिंग के लिए एक विशाल जगह की तलाश शुरू कर दी। जब फाल्के का परिवार 'इस्माइल बिल्डिंग' चरनी रोड से मथुरा भवन बंगले, दादर में शिफ्ट हो गया। तो उन्होंने बंगले के अहाते में एक छोटे से कांच के कमरे का निर्माण किया और एक अंधेरे कमरे को तैयार किया जंहा उन्होंने फिल्म की एडिटिंग और डेवलपिंग की व्यवस्था की। एक्सपोर्ट किये हुए फिल्म निर्माण उपकरण मई 1912 में मुंबई पहुंचे और फाल्के ने सामान के साथ उपलब्ध कराए गए स्केच की सहायता से इसे चार दिनों के अन्दर ही स्थापित कर लिया।


उन्होंने अपने परिवार को फिल्म को विकसित करने और एडिटिंग करने के काम को सिखाया। कैमरा और प्रोजेक्टर के काम का परीक्षण करने के लिए, फाल्के ने कुछ लड़के और लड़कियों को फिल्माया। फाल्के ने सबसे पहले एक लघु फिल्म बनाने का फैसला किया। उसने एक गमले में कुछ मटर लगाए और उसके सामने एक कैमरा रखा।

उन्होंने एक महीने के लिए एक दिन में एक फ्रेम की शूटिंग की, जिसमें बीज उगने, अंकुरित होने से पौधा बनने की कहानी को दिखाया लघु फिल्म का शीर्षक अंकुरची वाध (ग्रोथ ऑफ ए मटर प्लांट) था। फाल्के ने इसे चुनिंदा व्यक्तियों को दिखाया और उनमें से कुछ यशवंतराव नादकर्णी और नारायणराव देवारे उन्हें फिल्म निर्माण के लिए पैसे देने के लिए तैयार हो गये।


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