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Birthday Special: जानिए गुलशन कुमार की जमीन से आसमान की बुलंदियो तक पहुंचने की कहानी और फिर उनकी सरेआम हत्या

बॉलीवुड के मशहूर सिंगर और म्यूजिक कंपनी के मालिक गुलशन कुमार का जन्मदिन 5 मई को होता है। वह बॉलीवुड की उन हस्तियों में से एक थे जिन्होंने बिना किसी गॉडफादर के अपनी मेहतन के बल बूते पर एक ऊंचा मुकाम हासिल किया था।

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Birthday Special: जानिए गुलशन कुमार की जमीन से आसमान की बुलंदियो तक पहुंचने की कहानी 

टी-सीरीज़ (T-Series) संगीत कंपनी के संस्थापत और बॉलीवुड फ़िल्म निर्माता गुलशन कुमार(Gulshan Kumar) का आज जन्म दिन होता है। बॉलीवुड में बिना किसी गॉडफादर उन्होंने एक मुकाम हासिल किया था। गुलशन कुमार अपने गाये हुए भजनो से आम जन-मानस के बीच बहुत लोकप्रिय है। उनके बेटे भूषण कुमार(Bhushan Kumar) बॉलीवुड के जाने माने फिल्म निर्माता है। उनकी बेटी तुलसी कुमार(Tulsi Kumar) भी बॉलीवुड के मशहूर सिंगर में से एक है। एक वक्त था जब गुलशन कुमार ने अपने दम पर फिल्मी संगीत का चेहरा बदलने का काम किया था। उनकी कंपनी 'टी सीरीज' के कैसेट ने हिंदी संगीत को घर-घर पहुंचाने का काम किया था। आज गुलशन कुमार के जन्मदिन पर हम आपको उनके जिंदगी के सफर की दास्तां सुनाते है।

5 मई 1956 को जन्में गुलशन कुमार दिल्ली के एक पंजाबी अरोड़ा परिवार से आते थे। दिल्ली के दरियागंज बाजार में उनके पिता के फलों के जूस की दुकान चलाते थे। गुलशन कुमार भी अपने पिता के साथ उनके काम में हाथ बटाते थे। बाद में उनके परिवार ने रिकॉर्ड और सस्ते ऑडियो कैसेट बेचने का काम शुरू किया। वहां से शुरू हुई उनकी यात्रा एक अलग मुकाम तक पहुंची। गुलशन कुमार की जमीन से आसमान की बुलंदियों तक पहुंचने की कहानी बहुत ही रोचक है। उन्होंने धीरे-धीरे बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा और मशहूर होते चले गए।

इसके बाद गुलशन ने अपनी कंपनी खोली और भक्ती भरे गानों को बनाने लगे। गुलशन ने अपनी आवाज और भक्तिमय गानो से लोगों का दिल जीत लिया। गुलशन के कई भक्ति गीत ऐसे भी हैं जो आज भी लोगो के दिलों में बसते हैं। गुलशन कुमार ने सोनू निगम सहित कई गायकों को ब्रेक देकर उनके करियर में अहम योगदान दिया था। म्यूजिक इंडस्ट्री में अपना नाम बनाने के बाद गुलशन ने फिर फिल्मों की तरफ अपने कदम बढ़ाए। गुलशन ने फिर साल 1989 में फिल्म 'लाल दुपट्टा कमाल का' से बतौर प्रोड्यूसर अपने करियर की शुरुआत की।

फिल्मी जिंदगी के अलावा गुलशन कुमार दान-पुण्य के भी काफी काम किये। गुलशन ने वैष्णो देवी मंदिर में भंडारे की शुरुआत की थी जहां मंदिर में आए श्रद्धालुओं को निशुल्क भोजन दिया जाता था। गुलशन चाहते थे कि कोई भी मां के दर्शन करने आए वो खाली पेट ना जाए। तब से माता के दरबार में उनका यह भंडारा आज भी भी वहां आने वाले श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों को फ्री भोजन करवाता है।

लेकिन उनकी यह दरियादिली ही उनकी मौत का कारण बनी। फिल्म इंडस्ट्री में इतना बड़ा नाम बनने के बाद उनसे मुंबई के अंडरवर्ल्ड के लोग वसूली करने की चाह में उन्हे धमकी देने लगे। मुंबई में फैले अंडरवर्लड ने उनसे जबरन वसूली की थी लेकिन गुलशन कुमार ने उनकी मांग के आगे झुकने से मना कर दिया। जिसकी वजह से 2 अगस्त 1997 को जब गुलशन मंदिर से घर जा रहे थे तब कुछ बदमाशों ने गुलशन कुमार पर गोलियां बरसा दीं। गुलशन कुमार की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गुलशन की मौत सभी के लिए काफी शॉकिंग थी। किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी हस्ती को कोई ऐसे खुल्लेआम गोली मार कर चला जाएगा।

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