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भूमि पेडनेकर को मां के साथ बोल्ड सीन देखना पड़ा महंगा, बताया खुद क्या हुआ उस दिन

एक अभिनेत्री के रूप में मैं अपनी जिम्मेदारी समझती हूं। लेकिन मैं यह नहीं कह रही हूं कि हर फिल्म में सामाजिक संदेश जरूर हो। एक तर्कहीन कॉमेडी से भी पॉजिटिव चेंज मुमकिन है।’

भूमि पेडनेकर को मां के साथ बोल्ड सीन देखना पड़ा महंगा, बताया खुद क्या हुआ उस दिन
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एक अभिनेत्री के रूप में मैं अपनी जिम्मेदारी समझती हूं। लेकिन मैं यह नहीं कह रही हूं कि हर फिल्म में सामाजिक संदेश जरूर हो। एक तर्कहीन कॉमेडी से भी पॉजिटिव चेंज मुमकिन है।’

यह कहना है अब तक सिर्फ चार फिल्म करने वालीं भूमि पेडनेकर का। उन्होंने अब तक जितने भी किरदार निभाए हैं, उस वजह से भूमि बॉलीवुड का नया बोल्ड चेहरा बन गई हैं।

यह शायद इसलिए हुआ कि भूमि की परवरिश अच्छा सिनेमा देखते हुए हुई। उनकी मां की फिल्मों की पसंद जबरदस्त थी, घर में बच्चे ‘मंडी’ (1983), ‘खट्टा मीठा’ (1978), ‘कासाब्लांका’ (1962) जैसी क्लासिक फिल्में देखते हुए बड़े हुए।

इन्हीं फिल्मों ने भूमि को इंस्पायर किया कि वह एक्ट्रेस बनें। जब 17 साल की उम्र में उनके पास यह मौका था कि वह मैनचेस्टर जाकर बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में बैचलर्स करें तो उन्होंने यशराज फिल्म्स में कास्टिंग असिस्टेंट का जॉब ले लिया, बिना यह जाने कि यह होता क्या है।

यशराज में काम करते हुए भूमि को साढ़े तीन साल हो गए थे, एक दिन वह किसी का ऑडिशन ले रही थीं तो कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा ने उन्हें कुछ लाइनें पढ़ते हुए सुना और कहा, ‘मुझे बेवकूफ बनाना बंद करो कि तुम डायरेक्टर बनना चाहती हो, तुम्हें तो एक्टर बनना चाहिए, है कि नहीं?’

इस तरह भूमि को ‘दम लगा के हईशा’ फिल्म मिली, जिसके लिए उन्हें अपना वजन 30 किलो बढ़ाना पड़ा। इस फिल्म का सीधा-सा मैसेज था कि सुंदरता तन की नहीं, मन की होती है और ओवरवेट लोग भी अपने और अपने साथी के जीवन को खुशहाल बना सकते हैं।

यह फिल्म बॉडी शेमिंग के खिलाफ एक जबरदस्त नारा थी। भूमि बताती हैं, ‘असल जीवन में मैं भी अपनी कमियों को समझती हूं, लेकिन वह मेरे लिए बोझ नहीं हैं। मेरा संदेश स्पष्ट है, अपनी कमियों को जाहिर करो। आपका बॉडी साइज यह तय नहीं करेगा कि आप जीवन में कितने खुश हैं।’

भूमि की दूसरी फिल्म ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ थी, जिसमें उनकी भूमिका एक विद्रोही बहू की थी, जो देहात के अपने घर में टॉयलेट बनवाने के लिए संघर्ष करती है, जिसका घर में बनाना इसलिए ‘अपवित्र’ समझा जाता है, क्योंकि वहां मंदिर भी होता है।

एक मुंबईकर होने के नाते भूमि को यह मालूम ही नहीं था कि गांव में, घर में टॉयलेट होना कलंक समझा जाता है। वह बताती हैं, ‘मुझे यह सुनकर धक्का लगा कि महिलाओं को यूरीन रोकना पड़ता है, खाना-पीना भी कम करना पड़ता है।

ताकि वह सवेरे पौ फटने से पहले खुले मैदान में शौच के लिए जा सकें। इस रोल की तैयारी करने के लिए मैंने कई बार अपना यूरीन रोकने की कोशिश की। तब अहसास हुआ कि गांव-कस्बों की महिलाओं को कितनी तकलीफों से गुजरना पड़ता है।’

भूमि की तीसरी फिल्म ‘शुभ मंगल सावधान’ थी, जिसका विषय ‘नामर्दी’ था। यह फिल्म कंटेंट के लिहाज से बोल्ड जरूर थी, लेकिन अपनी बात कहने के लिए कॉमेडी का सहारा लिया।

भूमि बताती हैं, ‘अपने देश में नामर्दी या पत्नी को यौन सुख न दे पाना और खानदान को आगे न बढ़ा पाना केवल पुरुष ही की समस्या नहीं है बल्कि पूरे परिवार का मुद्दा है। हमने अपनी फिल्म के जरिए इस समस्या पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया।’

भूमि बॉलीवुड फिल्मों के अलावा वेब फिल्म भी करने लगी हैं। कुछ दिनों पहले उनकी नेटफ्लिक्स पर एक वेब फिल्म आई थी, ‘लस्ट स्टोरीज’। इसका डायरेक्शन जोया अख्तर ने किया है।

यह फिल्म और भूमि का रोल चर्चा में रहा था। भूमि कहती हैं, ‘वेब फिल्म ‘लस्ट स्टोरीज’ भी एक सामाजिक समस्या को सामने लाती है। एक युवा मेड (घर में काम करने वाली महिला) का अपने मालिक से अफेयर है।

लेकिन उसकी स्थिति उस समय अजीब हो जाती है, जब उसे अपने लवर की होने वाली पत्नी को चाय परोसनी पड़ती है। इस फिल्म में बोल्ड सीन भी थे। मैंने इसे मां के साथ देखा।

जैसे ही फिल्म में बोल्ड सीन आए, मैं अपनी सीट में नीचे को खिसक गई। हालांकि मां हमेशा निर्णय लेने में मुझे सहयोग करती हैं, लेकिन उस दिन जब हम साथ फिल्म देख रहे थे तो एक-दूसरे से नजरें मिलाने से बचे और बाद में भी उसके बारे में कोई बात नहीं की।

आप कितने भी खुले विचारों के क्यों न हों, परिवार के सदस्यों के साथ बोल्ड सीन देखना परेशान करने वाला अनुभव होता है। मेरे कजिन भी अपनी बहन को बोल्ड सीन में नहीं देखना चाहते।

इसलिए मैंने उनसे कहा कि पहले मिनट की फिल्म छोड़ दो और बाकी देख लो। मुझे याद है कि मैं जयपुर में अपने नाना को ‘दम लगा के...’ की डीवीडी दिखा रही थी। जब लव सीन आया तो मेरे दो कजिन टीवी स्क्रीन के सामने जाकर खड़े हो गए और सीन खत्म होने के बाद हट गए।’

आगे जो फिल्में भूमि पेडनेकर कर रही हैं, उनमें भी रोल स्ट्रॉन्ग हैं। वह बताती हैं, ‘अपकमिंग फिल्म ‘सोन चिरैया’ है। इसमें चंबल के डकैतों की कहानी है। मेरा रोल भी काफी सशक्त है। आगे भी मैं दमदार किरदार ही करना चाहती हूं।’

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