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Bhumi Pednekar Interview : मैं खुद को बागी मानती हूं, बहुत जल्द मुझे भी कोई साथी मिल जाएगा

भूमि पेडणेकर ने करियर की शुरुआत से ही अलग तरह की फिल्में की हैं। फिल्म ‘सोनचिड़िया’ में भी वह एक बागी के किरदार में हैं। इस किरदार के लिए उन्हें किस तरह की तैयारियां करनी पड़ी? क्या असल जिंदगी में खुद को बागी मानती हैं? अपने अब तक करियर को कैसे देखती हैं? एक खास मुलाकात में बता रही हैं, भूमि पेडणेकर।

Bhumi Pednekar Interview : मैं खुद को बागी मानती हूं, बहुत जल्द मुझे भी कोई साथी मिल जाएगा
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यशराज बैनर में कभी कास्टिंग डिपार्टमेंट में काम करने वाली भूमि पेडणेकर अब बतौर एक्ट्रेस बॉलीवुड में स्टैबिलिश हो चुकी हैं। अपने चार साल के करियर में उन्होंने ‘दम लगा के हइशा’, ‘टॉयलेट-एक प्रेमकथा’, ‘शुभमंगल सावधान’ और ‘लस्ट स्टोरीज’ जैसी फिल्में की हैं। इन दिनों वह फिल्म ‘सोनचिड़िया’ को लेकर चर्चा में हैं, इसमें सुशांत सिंह राजपूत भी अहम किरदार में हैं। फिल्म को अभिषेक चौबे ने डायरेक्ट किया है। हाल ही में भूमि से फिल्म और करियर को लेकर लंबी बातचीत हुई। पेश है, बातचीत के चुनिंदा अंश...

फिल्म ‘सोनचिड़िया’ में आप बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आ रही हैं। इस किरदार को निभाने के लिए आपने क्या खास तैयारियां कीं?

जब डायरेक्टर अभिषेक चौबे ने मुझे यह किरदार सुनाया तो मैं दंग रह गई। किरदार सुनने के बाद ही मुझे पता चल गया था कि इसके लिए अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना होगा। मुझे अपने किरदार को निभाने लिए मेंटली स्ट्रॉन्ग होना पड़ा। हमारी फिल्म का बैकड्रॉप 1970 का है, इसमें चंबल के पास मुरैना की कहानी है। यह कुछ बागियों की कहानी है। मनोज बाजपेयी, सुशांत सिंह राजपूत, रणवीर शौरी और आशुतोष राणा सभी डाकू बने हैं, सबके डाकू या बागी बनने की अलग दास्तां है। हमने चंबल में जाकर शूटिंग की। वहां जाकर अलग तरह के एक्सपीरियंस हुए। दो महीने के लिए हम सभी कलाकार शहरी जीवन, मोबाइल, परिवार और दोस्तों से दूर चले गए थे।

सुनने में आया था कि आपने फिल्म के लिए चूल्हा-चौका करने की ट्रेनिंग भी ली?

हां, चूल्हा कैसे जलाया जाता है? खाना कैसे चूल्हे पर बनाया जाता है? मसाले कैसे पीसे जाते हैं? मैंने हर एक बात की ट्रेनिंग ली। जबकि कभी अपने घर पर कोई काम नहीं किया था। लेकिन ट्रेनिंग लेने के बाद, कुछ दिनों में ही मैं सारे काम करने लगी। मुंबई में मुझे हल्का सी चोट भी लगती थी तो मैं चिल्लाया करती थी कि टिटनेस का इंजेक्शन लगाना होगा। जबकि चंबल में शूटिंग के दौरान हर रोज कांटे, कंकर, नुकीले पत्थर, चट्टान, रेत, मिट्टी और कीचड़ से वास्ता पड़ता था। इसके अलावा मैंने ग्रामीण बुंदेली महिलाओं की तरह दस-बारह किलो अनाज की बोरियां पीठ पर उठाईं, कई और तरह के काम भी किए। यह सब किरदार को रियल बनाने के लिए बहुत जरूरी था।

अपने रोल के लिए आपने लैंग्वेज पर कितना वर्क किया?

हां, बुंदेलखंडी लैंग्वेज को सिखाने के लिए एक असिस्टेंट डायरेक्टर को रखा गया था। शुरुआत में हमें लगा था कि इस लैंग्वेज को बोलना मुश्किल होगा लेकिन पंद्रह दिनों में ही हम इस लैंग्वेज को बोलने लगे। धीरे-धीरे तो पूरा क्रू ही इस भाषा में बात करने लगा।

फिल्म में आपका किरदार एक बागी का है? क्या असल जिंदगी में भी आपके भीतर बागी वाले गुण हैं?

हां, मैं खुद को बागी मानती हूं, क्योंकि मैंने मुश्किल रास्तों को चुना। फिल्म करियर की बात करूं तो यहां भी ऐसे किरदार चुनें, जो बहुत हटकर थे। साथ ही अपने किरदार को रियल बनाने के लिए हमेशा अपने कंफर्ट जोन से बाहर आई। जैसे फिल्म ‘टॉयलेट-एक प्रेमकथा’ में मुझे एक सीन में साड़ी ऊपर उठाकर खेतों में टॉयलेट के लिए बैठना था, उस वक्त शूटिंग के दौरान बहुत से लोग जमा थे तो मुझे झिझक हो रही थी। लेकिन एक्टिंग से गहरा लगाव था तो सीन जल्द ही ओके कर दिया है। मैं आगे भी ऐसी फिल्म करूंगी, जिनमें महिलाओं की आजादी का संदेश हो।

आपकी फिल्म में बदले की बात है, क्या आप बदले की भावना में विश्वास करती हैं?

नहीं, मैं जीयो और जीने दो में यकीन करती हूं। माफ करने में यकीन करती हूं। बदले की भावना से मेरा दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।

अपने अब तक के सफर को कैसे देखती हैं?

मेरा सफर आप सभी के सामने हैं। मैं एक्टिंग करियर के हर पल को एंज्वॉय कर रही हूं। यशराज फिल्म्स में मैं कास्टिंग डिपार्टमेंट में थी, वहां से ही मेरा एक्टिंग का सफर शुरू हुआ और मुझे यह किसी सपने के जैसा लगता है।

आपको फोर्बज इंडिया मैगजीन ने सफल बॉलीवुड शख्सियतों में शामिल किया है। इस बात को कैसे देखती हैं?

मेरे एक्टिंग करियर को चार साल हुए हैं। मैंने इतने कम समय में अलग-अलग तरह की फिल्में की हैं। शायद इसी वजह से मुझे फोर्बज की लिस्ट में शामिल किया गया। लेकिन यह सब मुमकिन न होता अगर मेरे पैरेंट्स, यशराज वाले, मेरी फिल्मों के डायरेक्टर्स, को-एक्टर्स सभी का सपोर्ट न मिलता। मैं इन सभी को अपनी सफलता का क्रेडिट देना चाहूंगी।

प्यार में पूरा विश्वास है

भूमि प्रोफेशनल फ्रंट पर नए मुकाम हासिल कर रही हैं। लेकिन पर्सनल लाइफ में उनकी जिंदगी में प्यार की दस्तक नहीं हुई। क्या वह रिलेशनशिप में जाना नहीं चाहती हैं या अभी तक कोई खास मिला ही नहीं है? पूछने पर भूमि जवाब देती हैं, ‘अभी मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है, न ही मैं किसी के साथ डेटिंग पर जाती हूं। लेकिन मेरा प्यार में पूरा विश्वास है। अभी तो काम ही मेरा प्यार है, मेरी प्रॉयोरिटी है। लेकिन उम्मीद है कि बहुत जल्द मुझे भी कोई साथी मिल जाएगा।’

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