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Interview: ''बत्ती गुल मीटर चालू'' के डायरेक्टर श्रीनारायण सिंह ने बताया क्यों बनाई ये फिल्म

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से श्री नारायण सिंह 1990 में मुंबई संगीत सीखने और संगीत के क्षेत्र में नाम कमाने आए थे। लेकिन उन्हें संगीत महाभारती विद्यालय में संगीत की शिक्षा लेने के लिए एक साल का इंतजार करना पड़ा।

Interview:

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से श्री नारायण सिंह 1990 में मुंबई संगीत सीखने और संगीत के क्षेत्र में नाम कमाने आए थे। लेकिन उन्हें संगीत महाभारती विद्यालय में संगीत की शिक्षा लेने के लिए एक साल का इंतजार करना पड़ा।

इसी बीच उन्हें मनीष गोस्वामी प्रोड्यूस और मदन कुमार डायरेक्टेड सीरियल ‘परंपरा’ में बतौर सहायक निर्देशक काम करने का मौका मिला। लेकिन मदन कुमार के देहांत के बाद उन्होंने इस सीरियल से खुद को अलग कर लिया और फिर वह एडिटिंग में असिस्टेंट के तौर पर काम करने लगे।

इसके बाद उन्होंने ‘ए वेडनेस-डे’ के अलावा कई फिल्में एडिट कीं। 2012 में श्रीनारायण ने असीम सामंत के लिए फिल्म ‘ये जो मोहब्बत है’ का डायरेक्शन किया। इस फिल्म की असफलता के बाद वह एडिटिंग में व्यस्त हो गए।

इसके बाद 2017 में बतौर निर्देशक उन्हें फिल्म ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ करने का मौका मिला। इस फिल्म ने बतौर निर्देशक उन्हें एक पहचान दिला दी। जल्द ही उनकी तीसरी फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ आने वाली है। इसमें शाहिद कपूर, श्रद्धा कपूर और यामी गौतम लीड रोल में हैं। इस फिल्म से जुड़ी बातें डिटेल में बता रहे हैं डायरेक्टर श्रीनारायण सिंह।

स्टोरी लाइन

कहानी का सेंट्रल कैरेक्टर संतोष बल्लभ पंटोला (शाहिद कपूर), हटेला त्रिपाठी( दिव्येंदु शर्मा) और ललिता सिंह नौटियाल (श्रद्धा कपूर) हैं, ये तीनों दोस्त हैं। इनमें से ललिता एक फैशन डिजाइनर है।

वह अपने आपको सबसे बड़ी डिजाइनर मानती है। उसका मानना है कि उसके आगे मनीष मल्होत्रा भी कुछ नहीं हैं। जबकि उसे आता कुछ नहीं है। हटेला त्रिपाठी ने वकील संतोष बल्लभ पंटोला के दोस्त का किरदार निभाया है।

पढ़ाई पूरी करने के बाद हटेला त्रिपाठी अपने पिता से पैसे लेकर प्रिंटिंग प्रेस डालता है, लेकिन उसका इलेक्ट्रिसिटी का बिल इतना आ जाता है कि वह परेशान हो जाता है। वह उसे ठीक करवाने के लिए भाग-दौड़ करता है, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं आता।

तो निराश होकर वह आत्महत्या कर लेता है। तब संतोष बल्लभ पंटोला अपने दोस्त को न्याय दिलाने के लिए अदालत पहुंचता है। उसकी इस मुहिम में ललिता नौटियाल भी मदद करती है।

जबकि बिजली कंपनी की तरफ से एडवोकेट गुलनार मिर्जा (यामी गौतम) मुकदमा लड़ती है। आखिर में अदालत जो अपना फैसला देती है, दर्शक सुनकर हैरान रह जाएंगे।

एक्टर का सेलेक्शन

कहानी पढ़ने के बाद कलाकारों का सेलेक्शन मैंने किया। शाहिद कपूर तो खैर पहले से थे, लेकिन श्रद्धा कपूर, यामी गौतम और दिव्येंदु इन सबका चयन मैंने ही किया।

मैं थोड़ा जिद्दी इंसान हूं, मैं किसी की सुनता नहीं हूं। अगर मुझे लगता कि शाहिद अपने किरदार में फिट नहीं हैं तो मैं वहां भी अपनी बात रखता है। लेकिन वह अपने किरदार में एकदम फिट हैं।

उत्तराखंड के बैकड्रॉप की वजह

मैं अपनी फिल्म में लैंग्वेज, बैकड्रॉप के तौर पर कुछ बदलाव लाना चाह रहा था। टिहरी-गढ़वाल जाने से वहां की बोली मिली और लोकेशन भी बहुत अच्छी थी। मेरा तो मानना है कि हमारे देश में इतनी खूबसूरत लोकेशन हैं कि विदेश जाना ही नहीं चाहिए। हमारे फिल्म के कैमरा मैन अंशुमान महाले ने उत्तराखंड की खूबसूरती को पर्दे पर बखूबी दिखाया है।

फिल्म का मैसेज

मेरा मानना है कि सामाजिक मुद्दे वाली फिल्म को भाषणबाजी वाली ना बनाएं। जब आप ज्ञान बांटने लगते हैं तो कोई फिल्म नहीं देखता। मेरी फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ में भी सामाजिक मुद्दे के साथ मनोरंजन, रिश्ते और इमोशंस भी हैं।

इसे गरिमा सिद्धार्थ ने बहुत बेहतर तरीके से लिखा है। मेरा मकसद अपनी फिल्म के माध्यम से यह दिखाना है कि बिजली के बिल गलती से बहुत ज्यादा आ जाए तो न्याय कैसे मिले। मैंने अपनी फिल्म में किसी पर निशाना नहीं साधा है।

ना सरकार पर ना किसी कंपनी पर। लेकिन मेरा सिर्फ इतना मानना है कि गलती सिर्फ इंसान से ही होती है। मीटर रीडिंग लेने वाला आदमी कागज पर कुछ लिखकर लाया, जिसे बिल बनाने वाले ने कुछ और समझा। लेकिन इस मानवीय भूल की वजह से जो इंसान प्रताड़ित हो रहा है, उसकी परेशानी का जिक्र फिल्म में है।

म्यूजिक

टिहरी-गढ़वाल में फिल्माई गई इस फिल्म में चार गाने हैं, जिसके संगीतकार अन्नू मलिक, रोचक कोहली और सचेत हैं। सभी गाने बहुत अच्छे हैं।

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