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अक्टूबर में ''कौशिक'' के घर हुआ लल्ला, लोगों ने दी जमकर बधाई तो घरवालों का उतरा मुंह!

अमित रवींद्रनाथ शर्मा, अपनी मां से फिल्मों में हीरो बनने का वादा कर दिल्ली से मुंबई आए थे। वह फिल्मों में हीरो तो नहीं बन सके लेकिन एड फिल्म डायरेक्टर के रूप में दो हजार से ज्यादा फेमस एड फिल्में जरूर बना चुके हैं।

अक्टूबर में

अमित रवींद्रनाथ शर्मा, अपनी मां से फिल्मों में हीरो बनने का वादा कर दिल्ली से मुंबई आए थे। वह फिल्मों में हीरो तो नहीं बन सके लेकिन एड फिल्म डायरेक्टर के रूप में दो हजार से ज्यादा फेमस एड फिल्में जरूर बना चुके हैं।

साथ ही अमित क्रोम पिक्चर्स में भागीदार हैं। बतौर निर्देशक उनकी पहली फीचर फिल्म ‘तेवर’ 2015 में आई थी, जिसे सफलता नहीं मिली थी। अब वह अपनी दूसरी फिल्म ‘बधाई हो’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म से जुड़ी बातें डिटेल में बता रहे हैं अमित शर्मा।

फिल्म ‘बधाई हो’ की कहानी

विज्ञापन फिल्मों के चर्चित लेखक अक्षत घिलडियाल ने 2012 में एक एड फिल्म के लिए एक आइडिया लिखा था। लेकिन कुछ वजहों के चलते वह इस आइडिया को कभी किसी को बता नहीं पाए।

एक बार मेरी अक्षत और शांतनु श्रीवास्तव से मुलाकात हुई। उन दिनों मैं एक अच्छी कहानी की तलाश में था। बात चली, तो उन्होंने मुझे एक लाइन में कहानी सुनाई। मैं उछल पड़ा।

कहानी थी कि उम्र के पचासवें साल यानी कि अधेड़ उम्र की महिला प्रेग्नेंट हो जाती है। मैंने उनसे कहा कि यह तो अच्छा आइडिया है, इस पर फीचर फिल्म की कहानी लिखें, उन्होंने ऐसा ही किया।

फिर हमारी कहानी दिल्ली की रेलवे कॉलोनी में रहने वाले कौशिक परिवार से शुरू होती है। कौशिक (गजराज राव) रेलवे में टीसी हैं। घर में उनकी मां (सुरेखा सीकरी), पत्नी प्रियंवदा (नीना गुप्ता), एक 25 साल का बेटा नकुल (आयुष्मान खुराना) और एक बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाला बेटा जूना (राहुल तिवारी) है।

घर में पूजा-पाठ का माहौल रहता है। नकुल कौशिक एक कॉरपोरेट कंपनी में नौकरी करता है और अपनी सहकर्मी स्वाति शर्मा (सान्या मल्होत्रा) से प्यार करता है। स्वाति शर्मा की मां संगीता शर्मा (शीबा चड्ढा) आईएएस ऑफिसर है।

नकुल हमेशा इसी कोशिश में लगा रहता है कि उसे स्वाति के परिवार वालों के सामने नीचा न देखना पड़े। लेकिन अचानक पता चलता है कि नकुल की मां प्रियंवदा गर्भवती हैं। इससे नकुल को बड़ा ऑक्वर्ड महसूस होता है। इसके बाद कहानी में कई कॉमेडी सिचुएशंस आती हैं।

कलाकारों का चयन

हमने अपनी फिल्म के किरदारों के अनुरूप कलाकारों का चयन किया। नकुल कौशिक के किरदार में आयुष्मान खुराना एकदम फिट हैं। लघु फिल्म ‘खुजली’ देखकर मिसेज कौशिक के लिए मैंने नीना गुप्ता को कहानी सुनाई। उन्होंने भी हामी भर दी।

नीना गुप्ता बहुत अच्छी कलाकार हैं। वह दिल्ली के चांदनी चौक से हैं, गजराज राव भी दिल्ली से हैं। मजेदार बात तो यह है कि गजराज राव के पिता भी रेलवे में टीसी थे और उनके दो बच्चों के बीच में 13 साल का अंतर है।

वह कमाल के कलाकार हैं। मैं उन्हें 18 साल से जानता हूं। मुझे स्वाति शर्मा के किरदार के लिए एक सरल-साधारण और रिलेटेबल एक्ट्रेस की तलाश थी, मुझे यह खूबी सान्या मल्होत्रा में नजर आई। अब सुरेखा सीकरी को तो दादी के किरदार में कई सीरियलों में देखा जा चुका था। बारहवीं में पढ़ने वाले जूना के किरदार में राहुल तिवारी को चुना।

फिल्म का संदेश

मॉडर्नाइजेशन ने कई चीजों को बेवजह मुद्दा बना दिया है। मॉडर्नाइजेशन के बाद मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में अगर यह सुनने में आए कि किसी युवक की मां गर्भवती है, तो बड़ा अजीब-सा लगता है।

जबकि आज भी इस तरह की घटनाएं छोटे शहरों, गांव-कस्बों में आम बात हैं। हम बस इस फिल्म के माध्यम से लोगों से कहना चाहते हैं कि आप बड़े हो गए हैं, इसके मायने यह नहीं है कि आपके माता-पिता में प्यार खत्म हो गया। यह सोच गलत है।

आखिर वह भी इंसान हैं, उनकी भी अपनी शारीरिक जरूरतें हैं। इसी बात को हमने बहुत ही हल्के-फुल्के कॉमेडी स्टाइल में दर्शकों को दिखाने की कोशिश की है। मेरे लिए तो मेरे माता-पिता उदाहरण हैं।

पूरी कॉलोनी में उन्हें लव बर्ड कहा जाता है। दोनों जहां भी जाते हैं, एक साथ जाते हैं। शाम को खाना खाकर टहलने जाएंगे तो साथ जाएंगे। अगर मेरे पिता सब्जी लेने जाएंगे तो भी अकेले नहीं जाते। मैंने अपने माता-पिता के इसी प्यार को फिल्म ‘बधाई हो’ के मिस्टर कौशिक और मिसेज कौशिक में डाला है।

फिल्म का संगीत

फिल्म में पांच गाने हैं। ‘मोरनी..’ गाने को छोड़कर कोई भी गाना लिप सॉन्ग वाला नहीं है। बाकी गाने किरदारों के मन दिमाग में जो कुछ चल रहा है, उसकी दशा को बयां करते हैं।

एक गाना रोचक ने गाया है, दो गाने तनिश ने गाए हैं। एक गाना सनी बावरा ने गाया है। फिल्म को ग्यारह दिन मुंबई और 36 दिन दिल्ली के दरियागंज इलाके में फिल्माया है।

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