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''सुई धागा'' मे ममता के किरदार के लिए अनुष्का ने किया था इंकार, यशराज ने मनाने के लिए बेले थे कई पापड़

अनुष्का शर्मा की हालिया रिलीज फिल्म ‘सुई धागा’ को अच्छा रेस्पॉन्स मिला है। इसमें अनुष्का ने एक साधारण सी नजर आने वाली लेकिन बुलंद हौसले रखने वाली गृहिणी ममता का रोल निभाया।

अनुष्का शर्मा की हालिया रिलीज फिल्म ‘सुई धागा’ को अच्छा रेस्पॉन्स मिला है। इसमें अनुष्का ने एक साधारण सी नजर आने वाली लेकिन बुलंद हौसले रखने वाली गृहिणी ममता का रोल निभाया।

इस तरह का किरदार उन्होंने एक्टिंग करियर में पहली बार निभाया है। अनुष्का का मानना है कि फिल्म ‘सुई धागा’ को करके वह बतौर एक्ट्रेस कॉन्फिडेंट हो गई हैं। हाल ही में उनसे फिल्म की सफलता और करियर से जुड़ी बातचीत हुई।

फिल्म ‘सुई धागा’ को बॉक्स ऑफिस पर अच्छी-खासी कामयाबी मिली है। क्या आपको इस तरह के रेस्पॉन्स की उम्मीद थी?

मैं इस फिल्म की सफलता से बहुत खुश हूं। मनीष शर्मा (निर्माता यशराज फिल्म्स) ने जब शरद कटारिया की लिखी कहानी मुझे सुनाई तो यह मेरे दिल को छू गई। लेकिन ममता का रोल करने को लेकर मैं काफी कंफ्यूज थी। मुझे यही लगा कि ममता के किरदार में, उसकी सेंसिबिलिटी से रिलेट नहीं कर पा रही हूं।

यही वजह रही कि मैंने मनीष को फिल्म के लिए मना कर दिया था। लेकिन मनीष और शरद दोनों ने मुझे रोल निभाने के लिए मना लिया, उन्होंने मुझे समझाया कि मैं ही उनकी फिल्म की ममता बन सकती हूं।

अगर इस फिल्म में दर्शकों को ममता और ममता का पति मौजी पसंद है तो इसका क्रेडिट यशराज की टीम में मनीष और शरद को मिलना चाहिए।

क्या ममता का किरदार निभाकर आपमें कोई बदलाव आया?

हां, ममता का रोल निभाकर मेरा खुद पर विश्वास बढ़ गया है। फिल्म ‘सुई धागा’ की ममता खामोश रहती है, लेकिन अंदर से वह बहुत आत्मविश्वासी है।

इस किरदार को निभाते-निभाते मुझे भी बतौर एक्ट्रेस अपने ऊपर कॉन्फिडेंस और बढ़ा है। अब लगने लगा है कि मैं सिर्फ मॉडर्न ही नहीं हर तरह के किरदार अच्छे से निभा सकती हूं।

सुना है कि आपने ममता के रोल के लिए काफी तैयारियां की थीं?

मैंने फिल्म ‘सुई धागा’ के लिए सिलाई सीखी। यह एक्सपीरियंस बहुत ही अच्छा रहा। इस बात से मेरी मम्मी को बहुत खुशी मिली। मुझे याद है कि जब मैं स्कूल में थी और प्रोग्राम्स में हिस्सा लेती थी तो अलग-अलग ड्रेसेस चाहिए होती थीं।

ऐसे में मम्मी अपनी सिलाई मशीन से मेरे लिए हर प्रोग्राम की ड्रेसेस स्टिच करती थीं। मम्मी को कढ़ाई, बुनाई और एंब्रॉयडरी बहुत अच्छी आती है। मैं उनकी तरह तो यह सब काम नहीं सीख पाई, लेकिन काफी कुछ तो मुझे भी आ गया है।

आपकी फिल्म मेक इन इंडिया के कॉन्सेप्ट को प्रमोट करती है। आपको लगता है कि फिल्म का मैसेज लोगों को मोटिवेट करेगा?

मेरे डैड आर्मी में थे, उनकी देश के अलग-अलग शहरों में पोस्टिंग होती थी। हम जहां भी रहते थे, वहां के हैंडीक्राफ्ट्स जरूर खरीदते थे। मम्मी तो हैंडमेड साड़ियां खूब खरीदती थीं। मैंने भी अपने मैरिज रिसेप्शन में बनारसी साड़ी पहनी थी।

हम लोगों को समझना चाहिए कि जब हम अपने देश की बनी चीज खरीदेंगे तो ही हमारे यहां काम करने वाले कारीगरों को काम मिलेगा, पैसा मिलेगा और हमारा आर्टवर्क भी आगे बढ़ेगा। फिल्म में यही मैसेज दिया गया है, अगर इससे बदलाव आता है तो मुझे बहुत खुशी होगी।

वरुण धवन के साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा?

वरुण के साथ काम करने का बहुत ही अच्छा एक्सपीरियंस रहा। वह बहुत ही अच्छा कलाकार है। कम समय में उसने खुद को साबित किया है। एक्टिंग को लेकर बहुत डेडिकेटेड है।

मुझे याद है कि फिल्म में एक सीन था, जिसमें मौजी यानी वरुण को तेज धूप में टूटी हुई साइकिल चलानी थी और उसके पैर में घाव हो जाता है। इस सीन को परफेक्ट बनाने के लिए वरुण ने जी-तोड़ मेहनत की। उसका डेडिकेशन देखकर खुशी हुई।

फिल्म ‘सुई धागा’ में आपकी एक्टिंग देखकर हसबैंड विराट कोहली ने भी खूब तारीफ की?

हां, विराट ने ममता के किरदार में मेरे काम की खूब तारीफ की। अगर वह मेरी एक्टिंग को इग्नोर कर देते और कोई रिएक्शन न देते तो भी यह बात मुद्दा बन जाती।

आपके करियर को जल्द ही दस साल हो जाएंगे। इस जर्नी को कैसे देखती हैं?

मैं अपनी जर्नी से खुश हूं। मुझे लगता है कि वक्त के साथ मेरे अंदर ठहराव आया है। मैं मैच्योर हुई हूं। दुनिया को समझने लगी हूं। यह सब पर्सनल लेवल पर है। एक एक्टर के तौर पर मेरा आकलन आप लोग और दर्शक करेंगे। मेरी एक्टिंग में कितना बदलाव आया है, कितना सुधार हुआ यह दर्शकों को पता चल रहा है।

एक्टिंग के अलावा अनुष्का प्रोड्यूसर के तौर पर भी बॉलीवुड में एक्टिव हैं। ‘एनएच-10’, ‘परी’, ‘फिल्लौरी’ जैसी फिल्में बना चुकी हैं। क्या प्रोडक्शन की फील्ड में आने की प्लानिंग अनुष्का ने की थी?

‘मेरा फिल्म प्रोडक्शन में आना एक संजोग था। जब नवदीप सिंह ने मुझे ‘एनएच-10’ की कहानी सुनाई तो लगा कि इस फिल्म को बनाना चाहिए। देशभर के लोग आए दिन हाइवेज से गुजरते हैं, और कुछ दर्दनाक हादसे उनके आस-पास होते हैं।

मैं चाहती थी कि ऐसी दर्दनाक घटनाएं किसी के साथ न हों। इस वजह से मैंने ‘एनएच-10’ को प्रोड्यूस किया। आगे भी मेरी ख्वाहिश अलग-अलग सब्जेक्ट पर फिल्में बनाने की हैं।’

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