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जो सपना बेचैन कर दे, वो जरूर पूरा होता हैः अनुजा साठे

रिश्तों में बैलेंस बनाने के साथ अपने सपनों को पूरा करना चाहती

जो सपना बेचैन कर दे, वो जरूर पूरा होता हैः अनुजा साठे

विज्ञान भूषण. अनुजा साठे मराठी थिएटर, सीरियल्स और फिल्मों में अभिनय करने के बाद अब पहली बार हिंदी सीरियल ‘तमन्ना’ में नजर आ रही हैं। इसमें वह एक ऐसी लड़की का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों में बैलेंस बनाने के साथ अपने सपनों को पूरा करना चाहती है। हाल में ही स्टार प्लस पर शुरू हुए सीरियल ‘तमन्ना’ में धरा सोलंकी के लीड कैरेक्टर में अनुजा साठे दिख रही हैं। धरा एक ऐसी लड़की है, जिसका सपना क्रिकेटर बनने का है। हालांकि उसके इस सपने को साकार करने में उसके पापा साथ खड़े रहते हैं लेकिन उसकी दादी की पारंपरिक सोच एक लड़की को क्रिकेटर बनने को अच्छा नहीं मानते हैं। ऐसे में धरा किस तरह अपने सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ती है, यही इसमें दिखाया जा रहा है। इस सीरियल में धरा के किरदार और समाज की पारंपरिक सोच से जुड़े कुछ जरूरी सवालों को लेकर रंगारंग की टेलीफोन पर अनुजा से लंबी बातचीत हुई। प्रस्तुत हैं, इसके प्रमुख अंश।

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सीरियल में धरा की तमन्ना क्रिकेटर बनने की है। रियल लाइफ में अनुजा की सबसे बड़ी तमन्ना या सपना क्या है? दर्शकों का प्यार मुझे खूब मिलता रहे, यही मेरी सबसे बड़ी तमन्ना है। मुझे जो किरदार मिलें उसे बेहतरीन तरीके से निभा सकूं, अपना बेस्ट परफॉर्म करूं, यही मेरा सपना है।

सीरियल में धरा क्रिकेटर बनना चाहती है, पर्सनली आपको क्रिकेट देखने या खेलने का कितना शौक है? बचपन में मैं गली-मोहल्ले में अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेला करती थी। आज भी क्रिकेट बहुत शौक से देखती हूं। मेरा तो यह भी मानना है कि क्रिकेट का शौक तो इंडियंस के खून में मौजूद रहता है। इस सीरियल के जरिए मुझे अपना शौक बाहर निकालने का भी अवसर मिल रहा है।

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धरा सीरियल में अपने फैमिली के रिलेशंस को संभालते हुए अपने सपनों को पूरा करना चाहती है। वह कोई रिवोल्यूशन नहीं करती। रियल लाइफ में रिलेशंस में बैलेंस बनाते हुए अपने सपने को पूरा करना कितना मुश्किल होता है?

मैं अपना ही एग्जांपल सामने रखकर अगर कहूं तो मैंने खुद बैलेंस बनाते हुए अपने एक्टिंग करियर को, जो मेरा पैशन है, आगे बढ़ाया है। ऐसे में घर वालों के सपोर्ट का बहुत इंपॉर्टेंट रोल होता है। फैमिली के सपोर्ट मिलने पर अपने सपने को पूरा करना बहुत आसान हो जाता है। इस मामले में मैं बहुत लकी हूं कि मुझे हमेशा फैमिली का पूरा सपोर्ट मिला और मैं सपना साकार कर पा रही हूं। लेकिन बहुत सी ऐसी लड़कियां भी होती हैं, जिन्हें फैमिली में पूरा सपोर्ट नहीं मिल पाता है। उन्हें मैं यही कहना चाहूंगी कि अपने-अपने को पूरा करने के लिए डटे रहिए और उसके लिए जी-तोड़ मेहनत करिए। यह कही न भूलें कि अगर आपके पास ऐसा कोई सपना है, जिसे पूरे किए बिना आप बेचैन रहते हैं, उसके बिना नहीं जी सकते तो एक दिन वो सपना जरूर पूरा हो जाएगा। अगर आपका सपना आपके वजूद से जुड़ जाए, उसे आप पूरे दिल से पाना चाहते हैं तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।

धरा का सपना पूरा करने में उसके पापा सपोर्ट करते हैं, इससे निश्चित ही उसे काफी शक्ति मिलती है। लेकिन हमारे आस-पास के परिवारों में कई लड़कियों को पापा या घर वालों का सपोर्ट नहीं मिलता। ऐसे में उसे किस तरह अपने कदम आगे बढ़ाने चाहिए?

मेरा तो मानना है कि बेटी और पापा का रिलेशन ज्यादा प्यारा और मजबूत होता है। ऐसे में तो वे अपनी बेटी का सपोर्ट खुद ही करते हैं। उसे पढ़ाने-लिखाने, आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करते हैं। मुझे तो लगता है, आज के दौर में पिता अपनी बेटी को पढ़ाने, उसका ख्याल रखने पर ज्यादा ध्यान देते हैं। लेकिन इसमें बेटी का भी दायित्व बनता है कि वह अपने पिता का भरोसा हासिल करे। उन्हें विश्वास दिलाए कि वह उनके प्रयास को व्यर्थ नहीं जाने देगी।

अपने सपने को साकार करने के लिए आप कौन-सी क्वालिटीज सबसे जरूरी मानती हैं?

सबसे महत्वपूर्ण है महत्वाकांक्षा। दूसरा है, आत्मविश्वास। तीसरा है- धैर्य यानी रास्ते की बाधाओं से घबराए बगैर लगातार सपने को पूरा करने का प्रयास। इन सबके साथ अथक परिश्रम भी बहुत जरूरी है।

साइंस-टेक्नोलॉजी के स्तर पर तो हमारी सोसायटी काफी डेवलप हो गई है लेकिन लड़कियों को लेकर जो सोच है, समाज की वो आज भी बहुत रूढ़िवादी बनी हुई है। इसके बदलाव के लिए किस तरह के प्रयास किए जाने की जरूरत है?

मुझे लगता है इसमें एजुकेशन बड़ा रोल निभा सकती है। इसके अलावा लड़का-लड़की में अंतर को लेकर जो सोच मौजूद है, उसे मिटाने की भी जरूरत है। हालांकि ऐसी इक्वेलिटी वाली सोच डेवलप होना आसान नहीं है। लेकिन कई स्तरों पर घर-परिवार से अगर यह सोच विकसित हो तो धीरे-धीरे यह परिवर्तन संभव है। हालांकि इसमें काफी समय लगेगा अभी। लेकिन अच्छी बात है काफी बदलाव आ चुका है और निरंतर हो भी रहा है।

उम्र कोई हो, सपना पूरा किया जा सकता है

सीरियल ‘तमन्ना’ एक जरूरी सवाल उठाता है, ‘क्या किसी महिला के सपने की एक्सपायरी डेट होती है?’ इस बारे में अनुजा साठे का क्या कहना है? पूछने पर वह जवाब देती हैं, ‘मेरा तो स्पष्ट मानना है कि सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती है। चाहे जीवन कितना भी बीत जाए अगर आपका कोई सपना है तो उसे किसी भी उम्र में पूरा किया जा सकता है। हमारे यहां दरअसल, लड़कियों को कई सारी भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। कभी बेटी, पत्नी, बहन और मां। और इन भूमिकाओं के निभाने में वे अपने सपने को सेकेंड्री मान लेती हैं। लेकिन रह-रहकर उन्हें वो याद आता है कि मेरा कोई सपना था। तो मैं तो सभी लड़कियों/महिलाओं से कहूंगी कि जब जागो, तभी सवेरा मानकर, अपने सपने को जरूर पूरा करें।’

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