logo
Breaking

Interview : अनुजा साठे ने बताया आखिर क्यों उन्हें नेगेटिव किरदार पसंद है

धारावाहिक ‘पेशवा बाजीराव’ में राधाबाई का किरदार निभाने के बाद अनुजा साठे एक बार फिर ऐतिहासिक धारावाहिक ‘खूब लड़ी मर्दानी.. झांसी की रानी’ में जानकी बाई के रोल में नजर आ रही हैं। इस रोल में उनके शेड्स ग्रे हैं। राधाबाई के पॉजिटिव रोल के बाद उन्होंने नेगेटिव रोल क्या सोचकर चुना? वह पहले की तुलना में आज की महिलाओं को कितना स्ट्रॉन्ग मानती हैं? सीरियल और कैरेक्टर से जुड़े सवाल अनुजा साठे से।

Interview : अनुजा साठे ने बताया आखिर क्यों उन्हें नेगेटिव किरदार पसंद है

अनुजा साठे ने अपने करियर की शुरुआत बतौर थिएटर आर्टिस्ट की थी। उन्होंने कई मराठी प्ले किए। इसके बाद अनुजा ने टेलीविजन की और रुख किया लेकिन शुरुआत मराठी सीरियल से की। कई मराठी सीरियल्स करने के बाद अनुजा ने मराठी फिल्म भी की। इसके बाद फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ में भिउबाई का किरदार निभाकर उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया।

‘तमन्ना’ में धरा का रोल अदाकर उन्होंने हिंदी सीरियल्य में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने ऐतिहासिक धारावाहिक ‘पेशवा बाजीराव’ में बाजीराव की मां राधाबाई का किरदार निभाया। अनुजा पिछले साल फिल्म ‘ब्लैकमेल’ और ‘परमाणु’ में नजर आईं। अब वह ऐतिहासिक धारावाहिक ‘खूब लड़ी मर्दानी- झांसी की रानी’ में जानकी बाई के किरदार में नजर आ रही हैं। इस किरदार के जरिए वह अपने करियर में पहली बार नेगेटिव रोल प्ले कर रही हैं। सीरियल और किरदार से जुड़ी बातचीत अनुजा साठे से।

इस ऐतिहासिक धारावाहिक को करने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?

यह मेरे करियर का पहला ऐतिहासिक धारावाहिक नहीं है, इससे पहले भी मैं ऐतिहासिक धारावाहिक ‘पेशवा बाजीराव’ में राधाबाई का किरदार निभा चुकी हूं। इसलिए मेरे लिए इसका पीरियड ड्रामा होना नया नहीं था। मेरे लिए नया था, इसमें मेरा किरदार। इस किरदार के जरिए अपने करियर में मैं पहली बार नेगेटिव रोल कर रही हूं। कह सकते हैं कि मैं इस सीरियल की वैंप हूं। एक्टर होने के नाते दर्शकों को मैं अपना ग्रे शेड भी दिखाना चाहती थी। एक एक्टर के लिए इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। यह किरदार राधाबाई के बिल्कुल अपोजिट है। मुझे काफी इंटरेस्टिंग लगा, इसलिए मैंने इसके लिए तुरंत हामी भर दी।

पीरियड ड्रामा ‘खूब लड़ी मर्दानी-झांसी की रानी’ में अपने रोल के बारे में कुछ बताएं?

इस सीरियल में मैं जानकीबाई का रोल अदा कर रही हूं। जानकीबाई गंगाधर राव की भाभी हैं। गंगाधर राव रानी लक्ष्मीबाई के पति हैं यानी जानकीबाई रानी लक्ष्मीबाई की जेठानी हैं। दरअसल, जानकीबाई सीरियल की सबसे बड़ी वैंप है। वो बहुत ही शातिर दिमाग है। राजमहल में इंटरनल पॉलिटिक्स वो खूब खेलती है। अपनी पोजिशन को मेंटेन करने के लिए जो कुछ उससे बन पड़ता है, वो करती है। वो किसी के साथ भी राजगद्दी शेयर करना नहीं चाहती है।

आप पॉजिटिव रोल करती रही हैं, अब नेगेटिव रोल कर रही हैं, दोनों रोल में आपके लिए ज्यादा चैलेंजिंग कौन सा है?

मेरे लिए हर रोल चैलेंजिंग है। मेरे लिए यह बात मायने नहीं रखती कि मेरा किरदार पॉजिटिव है या नेगेटिव। मैं अपने हर किरदार को चैलेंज की तरह लेती हूं, अपना बेस्ट देने के लिए जो बन पड़ता है, वो करती हूं। वैसे मेरी मानें तो ऐतिहासिक धारावाहिक करना ही एक तरह का चैलेंज है, क्योंकि इनके विषय में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होती, जब जानकारी होती है, तब वो इसके साथ किसी भी तरह के छेड़छाड़ को पसंद नहीं करते हैं। सो, ऐसे सीरियल का हिस्सा बनना भी अपने आप में एक चैलेंज है।

चूंकि आप मराठी भाषी हैं, ऐसे में आपको शुद्ध हिंदी भाषा बोलने में दिक्कत होती होगी?

जैसा कि मैंने बताया यह मेरे करियर का दूसरा अहम ऐतिहासिक किरदार है। जब मैं राधाबाई का किरदार निभा रही थी, तब मुझे हिंदी बोलने में काफी परेशानी होती थी। मैं नहीं चाहती थी कि मेरे शब्दों में भी मराठी का एसेंट हो, सो मैंने भाषा पर बहुत मेहनत की। मैं हिंदी की साहित्यिक किताबें पढ़ती थी। जो स्क्रिप्ट मुझे दी जाती थी, उसके संवाद मैं बार-बार पढ़कर दोहराती थी। धीरे-धीरे मुझे अंदाजा आने लगा कि किस शब्द का उच्चारण किस तरह करना है, क्योंकि बोलचाल की हिंदी और ऐतिहासिक धारावाहिक में बोली जाने वाली हिंदी में काफी अंतर होता है। अभी भी कभी-कभी गलती हो जाती है।

आपने राधाबाई, जानकीबाई के किरदार को करीब से जाना है, आपको क्या लगता है, पहले की महिलाएं ज्यादा स्ट्रॉन्ग थीं या आज की महिलाएं?

मैं दोनों की तुलना तो नहीं कर सकती, फिर भी कहूंगी कि मुझे लगता है पहले की महिलाएं ज्यादा स्ट्रॉन्ग थीं। वो महिलाएं बहुत प्रोग्रेसिव थीं। उनके विचार भी प्रोग्रेसिव थे। औरतें ये नहीं कर सकतीं, वो नहीं कर सकतीं, उन्हें पर्दे में रहना चाहिए, ऐसी जितनी भी बातें हैं, ये सब बातें उनके बाद की हैं, इन महिलाओं के समय यह बातें मायने नहीं रखती थीं और ना ही ऐसी कोई पाबंदी थी। राधाबाई ने खुद एजुकेशन को बढ़ावा दिया था। जानकीबाई भी दहेज प्रथा के खिलाफ थीं। ऐसी कितनी ही चीजें हैं, जहां उस समय की महिलाओं पर पाबंदी नहीं लगाई जाती थी।

असल जिंदगी में अनुजा साठे अपनी रोल मॉडल किस महिला को मानती हैं?

‘मेरी मां मेरे लाइफ की रोल मॉडल रही हैं। वो बहुत ज्यादा शांत रहती हैं। उनकी डिसिजन मेकिंग पावर बहुत ही स्ट्रॉन्ग है। उनकी सबसे अच्छी बात यह कि वो भले कितने भी गुस्से में हों, लेकिन अपना आपा कभी नहीं खोतीं। वो बहुत मेहनती हैं। उन्होंने बाहर काम करते हुए हमारी परवरिश में कोई कमी नहीं होने दी है। वो अकेले घर को संभालते हुए बाहर का कामकाज भी संभालती थीं। मैं बचपन से उन्हें देखते हुए बड़ी हुई हूं, मैंने आज तक उनके जैसी महिला नहीं देखी है।’

Share it
Top