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सास-बहुओं से ''युद्ध'' हारे अमिताभ, बेहद कम टीआरपी

''युद्ध'' की टीआरपी महज 0.7 रही।

सास-बहुओं से
मुंबई. कहा तो यह जा रहा था कि सदी के सबसे बड़े स्टार अमिताभ बच्चन छोटे परदे पर भी बड़ा हंगामा खड़ा करने वाले है और कहाँ उनके पहले सीरियल के मुंह के बल गिरने की नौबत आ गयी है। हिंदी सिनेमा में जिस अमिताभ बच्चन का सिक्का सत्तर की उम्र में भी चलता है, टीवी पर उनके पहले सीरियल युद्ध का कोई नामोनिशान नजर नहीं आ रहा है। न कहीं अखबारों में सुर्खियां बन रही हैं और न ही कहीं टीवी शोज में इसकी चर्चा है।
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क्यों छाया है सन्नाटा: हालांकि 'युद्ध' को शुरू हुए दो ह़फ्ते होने जा रहे हैं पर इतना सन्नाटा क्यों है। अचरज इस बात का है कि टीवी इंडस्ट्री से जुड़े जाने-माने लोगों ने शो और अमिताभ की इस विफलता पर चुप्पी साध रखी है। शो के क्रिएटिव डायरेक्टर अनुराग कश्यप से जब सवाल किया गया तो वो बोले, अभी मैं अपनी फिल्म बॉम्बे वैलवेट को लेकर इतना व्यस्त हूं कि मुझे किसी बात की कोई खबर नहीं। कहा जा रहा है कि यह भारतीय टीवी इतिहास का सबसे महंगा फिक्शन शो है और हर एपिसोड की लागत कथित तौर पर तीन करोड़ रुपए है। इतने ताम-झाम के बाद भी शो का न चल पाना हैरानी भरा है।
टाइम स्लॉट: जानी-मानी फिल्म समीक्षक नम्रता जोशी कहती हैं कि शो का टाइम स्लॉट रात साढ़े दस बजे है जो शायद उपयुक्त नहीं है। लेकिन नम्रता इतने भर से शो को क्लीन चिट देने को तैयार नहीं है। वो कहती हैं, शो की कहानी बड़ी उलझी है। हम भारतीय दर्शक टीवी पर ऐसे शो देखने के आदी नहीं है और जिस तरह के दर्शक वर्ग को यह टारगेट करता है वो पहले से ही इससे कहीं ज्यादा अच्छे और सधे हुए अंग्रेजी फिक्शन शो देखता है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, ‘युद्ध’ की बेहद कम टीआरपी -
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