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आलिया की बहन शालीन भट्ट ने इस कारण की थी सुसाइड की कोशिश, महेश भट्ट ने फिल्म इंडस्ट्री को लेकर किए अहम खुलासे

महेश भट्ट की पहचान एक फिल्म लेखक-निर्देशक और निर्माता के रूप में रही है। वह अब एक्टिंग की फील्ड में भी कदम रख चुके हैं। महेश भट्ट युवा निर्देशक तारिक खान की फिल्म ‘द डार्क साइड ऑफ लाइफ : मुंबई सिटी’ में बड़े पर्दे पर पहली बार दिखाई देंगे।

आलिया की बहन शालीन भट्ट ने इस कारण की थी सुसाइड की कोशिश, महेश भट्ट ने फिल्म इंडस्ट्री को लेकर किए अहम खुलासे

महेश भट्ट की पहचान एक फिल्म लेखक-निर्देशक और निर्माता के रूप में रही है। वह अब एक्टिंग की फील्ड में भी कदम रख चुके हैं। महेश भट्ट युवा निर्देशक तारिक खान की फिल्म ‘द डार्क साइड ऑफ लाइफ : मुंबई सिटी’ में बड़े पर्दे पर पहली बार दिखाई देंगे।

तनाव, अवसाद के कारण देश में, खासकर मुंबई में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं पर बनी इस फिल्म का ट्रेलर लॉन्च करने खुद महेश भट्ट पहुंचे थे। वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन-डे के मौके पर रिलीज किए गए इस फिल्म के ट्रेलर में महेश भट्ट के साथ एक्टर के. के. मेनन भी नजर आए।

इस मौके पर महेश भट्ट ने फिल्म और अपने एक्टिंग में आने की वजह के बारे में बताया वह बताते हैं, ‘देखिए, जब इस फिल्म के डायरेक्टर तारिक खान मेरे पास आए और मुझसे कहा कि वह समाज के एक सेंसिटिव इश्यू सुसाइड पर फिल्म बनाना चाहते हैं तो मैं चौंका।

आत्महत्या 21वीं सदी का ऐसा खतरनाक इश्यू है, जिस पर पूरी संवेदना के साथ ध्यान दिए जाने की जरूरत है। फिर उन्होंने बताया कि इस फिल्म में मेरा किरदार एक मुस्लिम पेंटर का है, जो मुंबई में सपने लेकर आने वाले एक हिंदू लड़के को पनाह देता है। तो मुझे लगा कि यह बड़ा इंट्रेस्टिंग किरदार होगा, ऐसी फिल्मों और ऐसे किरदारों की देश को जरूरत है।

इंडस्ट्री इस किस्म के इश्यू से घबराती है मगर यंग डायरेक्टर्स आजकल इस किस्म के सब्जेक्ट को फिल्मों के माध्यम से सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं। डायरेक्टर तारिक खान की हिम्मत की दाद देनी होगी कि उन्होंने एक ब्रेव मूवी बनाई है।

मुझे लगा कि उन्हें सपोर्ट करना चाहिए। इसलिए मैं इस फिल्म का हिस्सा बनने के लिए तैयार हुआ। फिल्म के जरिए हम कहना चाहते हैं कि जिंदगी बहुत अनमोल है।’महेश भट्ट इस फिल्म की यूएसपी इसके साइकोलॉजिकल मैसेज को मानते हैं।

वह कहते हैं, ‘यह फिल्म सपनों की नगरी मुंबई के अंधेरे पहलू को उजागर करती है। यह कई किरदारों की इमोशनल और एंबिशियस जर्नी को बड़ी बेबाकी से दर्शाती है। बड़े शहरों में लोग आज इतने प्रेशर और तनाव के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं कि कभी-कभी वह अपनी जान देने के बारे में सोचने लगते हैं।

आज आत्महत्या इस दुनिया की कड़वी सच्चाई है लेकिन समाज इसके बारे में बात करना नहीं चाहता। हमें सबसे ज्यादा खतरा अपने आप से है और मुझे फिल्म की यही थीम टच कर गई। यह फिल्म एक साइकोलॉजिकल मैसेज भी देती है।

फिल्म यही पॉजिटिव मैसेज देना चाहती है कि सबकी जिंदगी में परेशानियां आती हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप जीवन खत्म कर लें। इसके बजाय जिंदगी को जीना और एंज्वॉय करना चाहिए।

यही वजह कि फिल्म के ट्रेलर को सुसाइड प्रिवेंशन-डे के दिन ही रिलीज करने का फैसला पूरी टीम ने किया था। दरअसल, यह फिल्म भी आत्महत्या जैसे इश्यू को डील करती है। इस फिल्म के ट्रेलर के आखिर में एक लाइन आती है, जिसका मतलब यह है कि आप खुद अपने सबसे बड़े दुश्मन हैं।

मायानगरी मुंबई में हजारों लोग रोजाना अपने सपने लेकर आते हैं। लेकिन कुछ लोगों को निराशा का सामना करना पड़ता है, मगर इसका मतलब यह नहीं है कि खुदकुशी कर ली जाए। यह शहर आपको यह भी सिखाता है कि आप कभी हार मत मानो।

अपने सपने को मत छोड़ो। जिंदगी कितनी भी मुश्किल क्यों ना हो, अपने आप से मत हारो। अपने आप को एक और मौका दो, कुछ करिश्मा हो सकता है और यही बात मुंबई शहर को सबसे अनोखा शहर बनाती है।’

देश में और विशेष कर बड़े शहरों और फिल्मी दुनिया में डिप्रेशन बढ़ता जा रहा है। खुद महेश भट्ट की बेटी शाहीन डिप्रेशन का शिकार थीं। वह बताते हैं, ‘जिस तरह शारीरिक बीमारी होती है, उसी तरह डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है।

जैसे अगर आपको डायबिटीज हो जाए तो आपको इंसुलिन लेनी पड़ती है, उसी तरह अगर आप डिप्रेस पर्सन हैं तो आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है। हमारे देश की समस्या यह है कि हम मेंटल हेल्थ को लेकर जागरुकता नहीं फैला पाए हैं।

लोग आज भी इससे अनजान हैं कि कोई आपका अपना आपके घर में ही डिप्रेशन का शिकार है। न तो खुद मरीज को जल्दी पता चल पाता है और न उसके करीबी महसूस कर पाते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मेरी बेटी शाहीन, जो आलिया की बड़ी बहन है और पूजा की छोटी बहन है, भी डिप्रेशन की शिकार हो चुकी है।

अगले महीने उसकी एक किताब आने वाली है, जिसमें उसने उन लम्हों के बारे में लिखा है जब वह डिप्रेशन के दौर से गुजर रही थी। वह भी जब 12-13 साल की थी तो एक समय ऐसा आया था, जब उसने खुदकुशी करने के बारे में सोचा था। यह मेरे घर की सच्चाई है।’

फिल्म ‘द डार्क साइड ऑफ लाइफ : मुंबई सिटी’ में महेश ने एक्टिंग की है लेकिन वह एक्टर होने का दावा नहीं करते हैं। महेश भट्ट कहते हैं, ‘भाई एक्टिंग बड़ा मुश्किल काम है।

डायलॉग याद करना और कैमरे का सामना करना आसान नहीं होता। कैमरे के पीछे बैठकर दादागीरी करना अलग बात है, कैमरे के सामने खड़े होकर मुस्कुराना भी बड़ा मुश्किल हो जाता है। यह एक अलग फील्ड है।

मैंने कभी खुद को एक्टर नहीं माना। अगर मेरा काम फिल्म में किसी को जरा भी ठीक लगता है तो उसका पूरा क्रेडिट डायरेक्टर को जाता है। मैंने अपने आप के बारे में कोई दावा नहीं किया है कि मैं एक एक्टर हूं।’

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