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Interview : ''केसरी'' अवतार अक्षय कुमार ने फिल्म से जुड़े कई राज खोले

अक्षय कुमार जो भी फिल्में कर रहे हैं, वे सामाजिक-राष्ट्रीय सरोकारों से जुड़ी होती हैं। वह देश-समाज से जुड़ा कोई अहम मुद्दा उठाते हैं। इस बार अपनी फिल्म ‘केसरी’ के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रप्रेम का संदेश देना चाहा है, जो आज बहुत मायने रखता है। फिल्म में भारतीय फौजियों की वह शौर्य गाथा दिखाई गई है, जो बताती है कि हौसले बुलंद हों तो दुश्मन सेना की संख्या कितनी भी अधिक हो, उसके दांत खट्टे किए जा सकते हैं।

Interview :

अपनी हर फिल्म में एक नया विषय, नई तरह की कहानी लेकर प्रस्तुत होने वाले अक्षय कुमार की आगामी फिल्म ‘केसरी’ भी बहुत अलग तरह की फिल्म है। अनुराग सिंह डायरेक्टेड यह फिल्म 18वीं सदी के आखिर में हुए प्रसिद्ध सारागढ़ी युद्ध पर आधारित है, जो देशभक्ति के जज्बे से भरी है। इस फिल्म की कहानी, विशेषताओं और इसमें अपने किरदार से जुड़ी बातें बता रहे हैं अक्षय कुमार।

आपकी फिल्म ‘केसरी’ 21 मार्च को रिलीज होने वाली है। क्या है इस फिल्म की खासियत?

फिल्म ‘केसरी’, बैटल ऑफ सारागढ़ी पर आधारित है। 10 हजार अफगान फौजियों से सिर्फ 21 सिख फौजियों की रेजीमेंट ने कितनी शूरता से उनका सामना किया, यही है इसकी मुख्य कहानी। बहुत लोग नहीं जानते कि दुनिया के सबसे बड़े युद्धों में यह सारागढ़ी का युद्ध भी शामिल है। इसीलिए मुझे लगता है, यह फिल्म स्कूलों में भी दिखाई जानी चाहिए, ताकि बच्चे अपने भारतीय इतिहास की शौर्यगाथा से रूबरू हो सकें।

इस ऐतिहासिक कहानी की किस बात ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया?

यह युद्ध 12 सितंबर 1897 को सुबह 9:30 बजे शुरू हुआ था। जिन्होंने हमला किया था, उनका अनुमान था कि आधे घंटे में, यानी 10 बजे तक युद्ध खत्म हो जाएगा। लेकिन आक्रमण करने वालों से सिर्फ 21 भारतीय फौजियों ने भयंकर युद्ध किया और यह युद्ध शाम 6:30 बजे तक चलता रहा। देशभक्ति का जज्बा जिसके मन में होगा, इस लड़ाई की सच्चाई जानकर उन सभी के रोंगटे खड़े हो जाएंगे। हालांकि मुझे भी इसकी कहानी पहले पता नहीं थी, लेकिन पता चलने पर मैंने इस पर फिल्म निर्माण का निश्चय कर लिया।

आपने फिल्म में ईशर सिंह का किरदार निभाया है, इस किरदार को निभाने के लिए क्या तैयारियां कीं?

जैसा मैंने कहा, फिल्म के निर्माण से पहले मुझे बहुत ज्यादा जानकारी नहीं थी। इस युद्ध के बारे में बहुत अधिक जानकारी हिस्ट्री में भी नहीं है। इसीलिए निर्देशक अनुराग सिंह ने फैक्ट्स के बेस पर जो बताया, उसी अनुसार तैयारियां कीं। ईशर सिंह साहसी थे, युद्ध में 30 किलो की तलवार लेकर युद्ध करते थे। इसलिए स्वोर्ड फाइटिंग की ट्रेनिंग ली मैंने। वैसे मेरा मानना है, जो शख्स अपने सिर पर पगड़ी बांध लेता है, उसमें एक जिम्मेदारी का अहसास अपने आप आ जाता है। जब युद्ध की शूटिंग शुरू की, तेज गर्मी के कारण बहुत मुश्किल हो रही थी। लेकिन हर मुसीबत का सामना कर हमने शूटिंग की।

आपने पहली बार परिणीति चोपड़ा के साथ फिल्म की है, क्या है इसमें उनका किरदार? एक को-स्टार के रूप में उनके साथ आपका अनुभव कैसा रहा?

यह संजोग है कि मेरी फिल्मों की हीरोइनें शायद ही रिपीट होती हैं, ऐसे में हर आने वाली फिल्म में अलग लीडिंग हीरोइन होती है। इस फिल्म में परिणीति चोपड़ा ने मेरी पत्नी का किरदार निभाया है, एक ऐसी पत्नी जो पति की प्रेरणा बनी है। इनके साथ अनुभव अच्छा रहा।

जब फिल्म की अनाउंसमेंट हुई, तब सलमान भी इसके को-प्रोड्यूसर थे फिर क्या वजह रही, जो वह फिल्म ‘केसरी’ के निर्माण से पीछे हट गए?

हां, सलमान भी इसके एक निर्माता थे, लेकिन फिर वो अलग हो गए। ऐसा क्यों हुआ, इसका जवाब मैं नहीं दे सकता। कोई गल नहीं जी, फिर कभी सही। अब मैं ‘केसरी’ का निर्माता हूं, धर्मा प्रोडक्शंस के करण जौहर भी फिल्म के निर्माता हैं।

आपको पगड़ी में देखकर आपकी फैमिली का क्या रिएक्शन रहा?

मेरी मां मुझे पगड़ी में देखकर बहुत खुश हुईं। हम पंजाबी हैं और किसी भी पंजाबी के लिए सरदार ईशर सिंह का किरदार निभाना गर्व की बात है। मैंने फिल्म ‘सिंह इज किंग’ में भी सरदार का किरदार निभाया है। लेकिन इस बार मेरी बेटी नितारा मुझे पगड़ी में देखकर, दंग रह गई।

आपका स्टंट्स के प्रति भरपूर पैशन है, ये आपके लिए रिस्की नहीं लगता है?

मैं अपने बचपन में ही स्टंट्स करता था। जब फिल्म इंडस्ट्री में आया तो फिल्मों में भी स्टंट्स करता रहा। स्टंट्स मेरी पहचान बन चुकी है। करियर के शुरुआती दौर से आज तक मैंने बहुत से स्टंट्स खुद किए, यह एक आदत बन गई जो मुझे अच्छी लगती है। लेकिन हर समय मैंने खुद का ध्यान रखा और आगे भी रखूंगा।

मैं नहीं मानता कि स्टंट्स में रिस्क है। देखा जाए तो हर खेल में रिस्क होता है। हम अपने घरों से जब बाहर जाते हैं तो पता नहीं होता, कहां क्या हो जाए? तो वहां भी रिस्क होता है। अपने जीवन में हर कदम, हर समय एक नया रिस्क होता है, फिर उससे क्यों डरें?

मिस करता हूं दिल्ली की होली

होली आने वाली है। अक्षय कुमार के लिए यह त्योहार क्या मायने रखता है, पूछने पर बताते हैं, ‘होली का त्योहार मुझे एक अलग ही खुशी देता है। मैं पिछले तीस सालों से मुंबई में रह रहा हूं, लेकिन होली पर जो मजा दिल्ली में आता था, वह मुंबई में नहीं आता। दिल्ली में घर-घर, हर मोहल्ले में होली की धूम एक सप्ताह तक रहती थी। आज पुरानी दिल्ली में होली कैसे खेली जाती है, कह नहीं सकता। लेकिन मेरे बचपन में चांदनी चौक होली के रंगों से झूम उठता था। घर-घर में मिठाइयां बनती थीं। गुब्बारों में कलरफुल पानी भरके हम बच्चे आने-जाने वालों पर फेंका करते थे। होलिका दहन में भी बहुत मजा आता था। कई गिले-शिकवे, दिलों की दूरियां दूर हो जाती थीं। होली मनाने सभी धर्म के लोग आते थे। मैं आज भी दिल्ली की होली को मिस करता हूं।’

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