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सिंगिग रिएलिटी शो को लेकर अभिषेक रे ने उठाए सवाल, म्यूजिक डायरेक्टर और सिंगर की ट्यूनिंग पर किया खुलासा

कोलकाता के अभिषेक रे को बचपन से ही घर में संगीत का माहौल मिला। दिल्ली में कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे तो उन्होंने गुलजार साहब के साथ साउंड की थीम पर बेस्ड ‘उदास पानी’ नामक एलबम को संगीत से संवारने के साथ-साथ इसके गीतों को गाया भी था

सिंगिग रिएलिटी शो को लेकर अभिषेक रे ने उठाए सवाल, म्यूजिक डायरेक्टर और सिंगर की ट्यूनिंग पर किया खुलासा
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कोलकाता के अभिषेक रे को बचपन से ही घर में संगीत का माहौल मिला। वह जब दिल्ली में कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे तो उन्होंने गुलजार साहब के साथ साउंड की थीम पर बेस्ड ‘उदास पानी’ नामक एलबम को संगीत से संवारने के साथ-साथ इसके गीतों को गाया भी था, तब अभिषेक की उम्र महज 19 साल थी।

उसके बाद से अब तक वह करीबन बीस गैर फिल्मी एलबम्स और बीस फिल्मों में संगीत देने के अलावा कई एलबम्स और फिल्मों में गा भी चुके हैं। इन दिनों अभिषेक जी म्यूजिक के गैर फिल्मी गाने यानी सिंगल ‘आतिशा आतिशा…’ को लेकर चर्चा में हैं।

इस सॉन्ग को अभिषेक ने अपने संगीत निर्देशन में गायिका जश के साथ मिलकर गाया है। इस गीत के गीतकार हैं गुलरेल शाहिद। गीत के बोल हैं, ‘आतिशा आतिशा आतिशा सुरमुई रात का...’ सिंगल गीत ‘आतिशा आतिशा..’ की चर्चा करते हुए संगीतकार और गायक अभिषेक रे कहते हैं, ‘यह बहुत ही अलग किस्म का गाना है।

इसमें वूमेन एंपावरमेंट की बात है। जब जश हमारे पास आईं तो हमने सोचा कि उनकी आवाज का इस्तेमाल कर अलग-अलग सिंगल गाने निकाले जाएं। उनकी आवाज में एक खनक है, जो मुझे बहुत नई लगती है।’

जश को अभिषेक बतौर सिंगर बॉलीवुड में स्टैब्लिश करना चाहते हैं। जबकि आज सिंगर्स की भरमार है, लेकिन किसी के पास भी बड़ी पहचान नहीं है या लंबा करियर नहीं है। इस सिचुएशन पर अभिषेक कहते हैं, ‘मैंने अब तक चार पीढ़ियों के गायकों के साथ काम किया है।

यह मेरी खुशकिस्मती रही है कि मैंने आशा भोसले, कविता कृष्णमूर्ति, अलका याज्ञनिक, उदित नारायण, अभिजीत, श्रेया घोषाल, सुनिधि चौहान और शान के साथ काम किया है। अब वर्तमान पीढ़ी के नए गायकों के साथ काम कर रहा हूं।

इन चारों पीढ़ियों में मुझे जो सबसे बड़ा अंतर नजर आया वह है, सिंगर की शेल्फ लाइफ की घटना, जिसकी कई वजहें हैं। सिर्फ गायक को दोष देना ठीक नहीं होगा। पहले एक फिल्म में एक संगीतकार हुआ करता था, अब हर फिल्म में चार से पांच संगीतकार होते हैं।

ऐसे में जिस संगीतकार की ट्यूनिंग जिस गायक के साथ होती है, उसी से वह प्लेबैक सिंगिंग करवाता है। इस तरह हर फिल्म में एक साथ कई नई आवाजें सुनाई पड़ती हैं। अब भला ऑडियंस एक साथ कितनी आवाजों को पसंद करेगी?

दूसरी वजह यह है कि अब ज्यादातर गायक रियालिटी शो से आ रहे हैं। रियालिटी शो से आने वाले गायकों में परफेक्शन होता है, क्योंकि वे बचपन से किसी न किसी स्थापित गायक के गीतों को गाकर आगे आते हैं।

लेकिन उनका नकारात्मक पक्ष यह है कि वे शुरू से ही दूसरों के गाने गाकर रियालिटी शो में चमकते हैं, लेकिन उनके गायन में मौलिकता नहीं होती है। रियालिटी शो के मंच पर वह दूसरे के गाए गीतों को गाते हुए यानी मतलब नकल करते हुए ही सफल होते हैं।

इस वजह से वे एक मुकाम पर आकर अपनी सिंगिंग स्टाइल को भूल जाते हैं। इस वजह से लंबे समय तक म्यूजिक वर्ल्ड में बने नहीं रह पाते हैं।’अभिषेक रे फिल्मों में म्यूजिक देने की बजाय एलबम्स पर ज्यादा काम कर रहे हैं।

इसकी वजह भी वह बताते हैं, ‘अब फिल्मों में अच्छे गानों की जरूरत कम होती जा रही है। लेकिन डिजिटल मीडियम हमारे जैसे संगीतकारों के लिए वरदान की तरह है। मैं डिजिटल मीडियम पर हर महीने अपनी पसंद का एक सिंगल गाना लेकर आ रहा हूं।

इसके अलावा हर बड़ा गायक मेरे साथ आज भी काम करना चाहता है। मेरे पिछले सिंगल ‘उजली उजली’ को शान ने गाया था। अगला सिंगल श्रेया घोषाल के साथ कर रहा हूं। डिजिटल मीडियम की वजह से मैं मौलिक संगीत से बनाए गए गीतों को रिलीज कर उन्हें पूरी दुनिया में सुना पा रहा हूं।’

पुराने गायकों को श्रोता आज भी पसंद करते हैं, इसकी वजह संगीतकार-गायक अभिषेक रे क्या मानते हैं? पूछने पर वह बताते हैं, ‘पुराने गायकों के गीत श्रोताओं को आज भी पसंद हैं तो इसकी वजह कहीं न कहीं सशक्त संगीतकार भी हैं।

अगर आप लता मंगेशकर के गीतों से संगीतकार मदन मोहन जी को हटा दें तो उनके कितने गाने कम हो जाएंगे। आशा भोसले के करियर से आर.डी. बर्मन को हटा दें तो क्या होगा? हमें यह मानकर चलना चाहिए कि गायक किसी भी संगीत को क्रिएट नहीं करता।

गायक को गाना तो संगीतकार ही देता है। सशक्त संगीतकार ही अच्छा संगीत बना सकता है। ओ.पी. नैय्यर और आर.डी. बर्मन जैसे संगीतकारों ने आशा भोसले को पॉपुलर सिंगर बनाया।

कहने का मतलब है कि जो भी गायक ब्रांड बनता है, उसके पीछे संगीतकार की मेहनत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हां, कुछ उस गायक की अपनी मौलिकता भी होती है, तभी गायक उड़ान भरता है।’

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