मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। अब सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थी शिकायत निवारण समितियों का गठन अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था University Grants Commission (यूजीसी) के निर्देशों के तहत लागू की जा रही है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों की शिकायतों का त्वरित, पारदर्शी और संस्थागत समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि उन्हें अपनी समस्याओं के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। यूजीसी के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज में लोकपाल (Ombudsperson) की नियुक्ति अनिवार्य होगी। यदि किसी स्तर पर छात्र की शिकायत का समाधान नहीं होता है, तो संबंधित संस्थान के प्राचार्य, कुलसचिव या अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही Madhya Pradesh Private University Regulatory Commission ने भी संकेत दिए हैं कि इस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा, ताकि निजी विश्वविद्यालयों में भी जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षण संस्थान अपनी आधिकारिक वेबसाइट और प्रॉस्पेक्टस में शिकायत निवारण समिति और लोकपाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करें। इसमें शामिल होगा:
- समिति के सदस्यों के नाम और पद
- संपर्क नंबर और ईमेल आईडी
- कार्यकाल की जानकारी
- शिकायत दर्ज करने और अपील की प्रक्रिया
इसका उद्देश्य यह है कि छात्र जानकारी के अभाव में परेशान न हों और तय प्रक्रिया के तहत सीधे शिकायत दर्ज कर सकें।
पहले क्यों थी समस्या?
कई संस्थानों में पहले भी लोकपाल की नियुक्ति की गई थी, लेकिन शिकायतों के प्रभावी समाधान की मजबूत प्रणाली विकसित नहीं हो पाई थी। इससे छात्रों को समय पर राहत नहीं मिल पाती थी।
अब नई व्यवस्था के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उम्मीद है कि इस कदम से उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुशासन मजबूत होगा और छात्रों का भरोसा बढ़ेगा।
