Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

दिल्ली-केंद्र अधिकार विवाद: जानें क्या कहता है संविधान

सुप्रीम कोर्ट आज ये तय कर देगा कि दिल्ली का प्रशासनिक बॉस कौन है? दिल्ली-केंद्र अधिकार विवाद पर कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ का फैसला आएगा। इससे तय हो जाएगा कि दिल्ली का कामकाज चलाने में राज्य सरकार और एलजी की क्या भूमिका है?

दिल्ली-केंद्र अधिकार विवाद: जानें क्या कहता है संविधान

सुप्रीम कोर्ट बुधवार को ये तय कर देगा कि दिल्ली का प्रशासनिक बॉस कौन है? दिल्ली-केंद्र अधिकार विवाद पर कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ का फैसला आएगा। इससे तय हो जाएगा कि दिल्ली का कामकाज चलाने में राज्य सरकार और एलजी की क्या भूमिका है?

इस मामले में संविधान पीठ ने पिछले साल 6 दिसंबर को सुनवाई पूरी की थी। गौरतलब है कि 4 अगस्त 2016 को दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि दिल्ली एक केन्द्र शासित क्षेत्र है।

यहां केंद्र के प्रतिनिधि उपराज्यपाल की मंजूरी से ही फैसले लिए जा सकते हैं। इस फैसले को दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लगभग 15 दिन चली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहली नज़र में उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रमुख नज़र आते हैं।

राज्य सरकार और एलजी को मिल कर काम करना चाहिए

लेकिन रोज़ाना के कामकाज में उनकी दखलंदाज़ी से मुश्किल आ सकती है। दिल्ली के लोगों के हित में राज्य सरकार और एलजी को मिल कर काम करना चाहिए। दिल्ली सरकार की दलील थी कि दिल्ली का दर्जा दूसरे केंद्रशासित क्षेत्रों से अलग है।

दिल्ली का बॉस कौन है? क्या कहता है संविधान

संविधान के अनुच्छेद 239 एए के तहत दिल्ली में विधानसभा का प्रावधान किया है। यहां निर्वाचित प्रतिनिधियों के ज़रिए एक सरकार का गठन होता है। उसे फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

अनुच्छेद 239 एए

जवाब में केंद्र सरकार का कहना था कि जिस अनुच्छेद 239 एए का हवाला दिल्ली सरकार दे रही है, उसमें भी एलजी का दर्जा राज्य सरकार से ऊपर माना गया है। मंत्रिमंडल और उपराज्यपाल में किसी विषय पर मतभेद होने पर उसे राष्ट्रपति के पास भेजने की बात कही गई है।

उपराज्यपाल का फैसला

लेकिन ये साफ लिखा है कि राष्ट्रपति का निर्णय आने तक उपराज्यपाल का फैसला ही माना जाएगा। दिल्ली सरकार ने सुनवाई के दौरान एलजी के पास ज़रूरी फाइलें लंबित होने का भी हवाला दिया।

एलजी सचिवालय

कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा है तो ये दिल्ली के हित में नहीं है। हालांकि, केंद्र सरकार के वकील ने दावा किया कि फाइलों को अटकाने की शिकायत सही नहीं है। एलजी सचिवालय ज़रूरी फाइलों का तेजी से निपटारा करता है।

Next Story
Top