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जेएनयू में अब नहीं लगेंगे देश विरोधी नारे…

लोकसभा में एक लंबे वक्त के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लगाए गए देश-विरोधी नारों का मामला फिर से सुनाई दिया। जिसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री (एमएचआरडी) रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि जेएनयू शोध के मामले में विश्व का शीर्ष संस्थान रहा है।

जेएनयू में अब नहीं लगेंगे देश विरोधी नारे…No Anti Nationalist Slogans In JNU

लोकसभा में एक लंबे वक्त के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में लगाए गए देश-विरोधी नारों का मामला फिर से सुनाई दिया। जिसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री (एमएचआरडी) रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि जेएनयू शोध के मामले में विश्व का शीर्ष संस्थान रहा है। कुछ लोगों ने इसे बदनाम किया है। लेकिन हम उनकी मंशा को कभी कामयाब नहीं होने देंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन की सरकार उच्च-शिक्षा के इस उत्कृष्ट संस्थान को ठीक से रखेगी और कभी भी राष्ट्र की मुख्यधारा से अलग नहीं होने देगी। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री ने शुक्रवार को लोकसभा में आंध्र-प्रदेश के पुर्नगठन के बाद सूबे में खोले जो रहे दो केंद्रीय विश्वविद्यालयों से जुड़े संशोधन विधेयक 2019 को सदन की मंजूरी दिलाने से पहले हुई बहस का जवाब देते हुए दी। बिल को लोकसभा में पारित कर दिया गया है, जिसमें विभिन्न दलों के 13 सदस्यों ने अपनी बात रखी।

छह माह में भरी जाएंगी रिक्तियां

उन्होंने यह भी कहा कि 13 और 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम में से किसी एक को चुनने को लेकर लंबे वक्त से रिक्त पड़े शिक्षकों के करीब 7 हजार पदों को आगामी छह महीने में युद्धस्तर पर भरा जाएगा। इसे लेकर शुरूआत में कुछ कानूनी अड़चनें थीं। जो अब दूर कर ली गई हैं और इस बाबत हाल ही में एक कानून भी संसद से पारित हो गया है।

शिक्षकों की कमी से दोचार हो रहे पश्चिम-बंगाल के विश्वभारती विश्वविद्यालय को हम पूरी ताकत के साथ उभार रहे हैं। यह सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। बीते एक महीने में शिक्षा को लेकर चार विधेयक सदन में पारित हो चुके हैं।

आंध्रा को दिए 7 संस्थान

बिल में मौजूदा संशोधन के जरिए 2014 में राज्य पुर्नगठन के बाद बने कानून का मौजूदा संशोधन विधेयक के जरिए क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह आजादी के बाद इतिहास में पहली बार हो रहा है जब किसी राज्य को बेहद कम समय में सात संस्थानों की सौगात दी गई है। इसमें शुरूआत में आंध्र-प्रदेश को आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपलआईटी, आईआईएम, आयसर और अब दो केंद्रीय विश्वविद्यालय (एक केंद्रीय विवि (अनंतपुर), दूसरा केंद्रीय जनजातीय विवि (विजयनगरम) दिए गए हैं।

इन दोनों के निर्माण कार्य में पैसे की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। स्थायी परिसर बनने तक इनका संचालन अस्थायी परिसर में होगा। शुरुआत में इनके लिए केंद्र ने 1 हजार 700 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। शिक्षा का बजट 2013-14 के 66 हजार करोड़ रुपए के मुकाबले इस साल 95 हजार करोड़ रुपए हो गया है। इसमें हीफा का 30 हजार शामिल करने पर यह धनराशि 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपए हो जाती है।

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