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सरकारी आदेश से लाखों अभिभावक परेशान, बच्चों को पढ़ाने का वैकल्पिक प्रबंध करें सरकार- विजेंद्र

दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने सरकार से मांग की है कि वह पहले गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ रहे लाखों बच्चों के लिए शिक्षा का वैकल्पिक प्रबंध करे इसके बाद ही गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों के बारे में फैसला ले।

सरकारी आदेश से लाखों अभिभावक परेशान, बच्चों को पढ़ाने का वैकल्पिक प्रबंध करें सरकार- विजेंद्र
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दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने सरकार से मांग की है कि वह पहले गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ रहे लाखों बच्चों के लिए शिक्षा का वैकल्पिक प्रबंध करे इसके बाद ही गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों के बारे में फैसला ले।

सरकार दस लाख बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करे और गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को मान्यता देने के बारे में नियमों को सरल करें ताकि जिन स्कूलों को अस्थाई मान्यता दी गई है वह मान्यता प्राप्त करके चलते रहें। ये स्कूल झुग्गी, गरीब बस्तियों, अनधिकृत बस्तियों और गांवों में चल रहे हैं जहां सरकार ने शिक्षा के समुचित प्रबंध नहीं किए हैं।

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इन स्कूलों में पढने वाले बच्चे इतने गरीब परिवारों से आते हैं जो इन बच्चों को बडें स्कूलों में शिक्षा दिलाने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। शिक्षा का अधिकार कानून 2009 में बना था। इसके बाद भी नए स्कूल खोलने और गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को मान्यता देने के बारे में सरकार चुप बैठी रही।

इन स्कूलों को अपग्रेट करने और उन्हें मान्यता देने के बारे में सरकार ने 3 साल पहले आवेदन मांगे थे लेकिन एक भी स्कूल को स्थाई मान्यता नहीं दी गई। उन्हें एक साल के लिए अस्थाई मान्यता दी जाती रही और अब अचानक 2,500 स्कूलों को बंद करने का निर्णय सरकार ने किया है जो गरीब बच्चोें की शिक्षा के हित में नहीं है।

ज्ञात हो कि दिल्ली में इस समय 2,500 ऐसे स्कूल चल रहें हैं जो मान्यता प्राप्त नहीं हैं। इनमें से 1,000 प्ले स्कूल हैं जहाँ अभिभावक अपने घर के नजदीक ही शिक्षा दिलाने के लिए अपने बच्चों का दाखिला करा चुके हैं। 1,500 ऐसे स्कूल हैं जो घर के समीप ही कई वर्षों से लाखों बच्चों को शिक्षा दे रहें हैं।
इन्हें 1 अप्रैल 2018 से बंद करने का आदेश दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने जारी कर दिया है। जो स्कूल इस आदेश का पालन नहीं करेंगे उन्हें एक लाख रुपया एकमुश्त जुर्माना भरना पड़ेगा। इसके बाद 10,000 रुपया प्रति दिन के हिसाब से अलग से जुर्माना सरकार वसूलेगी।

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