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आप के 5 साल, विश्वास ने कहा- मै अभिमन्यु, हत्या में भी मेरी विजय

कुमार विश्वास ने कहा, ''षड्यंत्रकारी कहते हैं कि हम दूसरी पार्टी में चले जाएं।

आप के 5 साल, विश्वास ने कहा- मै अभिमन्यु, हत्या में भी मेरी विजय
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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में कुमार विश्वास ने पार्टी नेतृत्व पर जमकर हमला बोला है। सम्मलेन में खुद को अभिमन्यु बताते हुए कुमार विश्वास ने कहा, 'षड्यंत्रकारी कहते हैं कि हम दूसरी पार्टी में चले जाएं या वहां चले तो नहीं जाएंगे, लेकिन मैं कहता हूं कि वहां तो अंधेरा है तो कैसे स्वराज का दीपक जलेगा।

कुमार ने कहा यदि यह आंदोलन असफल हुआ तो माताएं 40 साल तक बेटों को आंदोलन में भेजना बंद कर देंगी, आंदोलन से लोगों का भरोसा ही उठ जाएगा।

कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बिना पार्टी नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए अहंकार से बाहर निकलने की सीख दी तो दूसरी ओर खुद के पार्टी छोड़ जाने के कयासों पर भी खुलकर बोले।

उन्होंने कहा कि 'आप' के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वास ने पार्टी संयोजक केजरीवाल पर इशारों में निशाना साधते हुए कहा कि चेहरा बनाने से आंदोलन खत्म हो जाएगा।

अन्ना पर ही टिप्पणी कर रहे लोग

विश्वास ने अन्ना हजारे पर टिप्पणियां करने वाले पार्टी के लोगों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, 'आज कुछ लोग जो अन्ना हजारे की कृपा से ही चमके हैं, वे उन पर टिप्पणी करने से बाज नहीं आते हैं। लेकिन, मैं उन्हें प्रणाम करता हूं

मैं कहीं नहीं जा रहा हूं

महाभारत के चक्रव्यूह का जिक्र करते हुए कहा कि मैं अभिमन्यु हूं, मेरी हत्या में भी मेरी विजय है।' विश्वास ने पार्टी में अपने खिलाफ लोगों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'एक दिन 20-25 लोगों ने घेर कर मुझे कहा कि तुम्हें इतना अपमानित कर दिया जाएगा कि हाथ जोड़कर भागोगे, लेकिन मैं बता देना चाहता हूं कि मैं कहीं नहीं जा रहा हूं।

चेहरा बनाने से खत्म होगा आंदोलन

कुमार विश्वास ने अपने भाषण में अरविंद केजरीवाल का एक बार भी नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों में सब कुछ कह गए। उन्होंने कहा, 'हमारी पार्टी के कार्यकर्ता सबसे मजबूत सिपाही हैं, जो अनुशासन से चलते हैं।

इस आंदोलन को खत्म करने का एक तरीका है। आंदोलन को चेहरे में बदल दो, यह समाप्त हो जाएगा। पहले नंबर पर देश रखिए, दूसरे नंबर पर दल और तीसरे नंबर पर नेता।'

आशुतोष पर भी वार

विश्वास बोले, 'जब हम रामलीला मैदान पर इकट्ठा हुए तो कुछ लोग कॉरपोरेट में अखबारों में नौकरी कर थे, लेकिन उनमें क्रांति नहीं जगी। इसके बाद हमने पार्टी बनाई, लेकिन क्रांति नहीं जगी। इसके बाद जब पहली बार सरकार बनी तो ऐसे लोग आए, हो सकता है क्रांति देर से जगी हो, लेकिन इनका भी स्वागत है।'

'7 महीने से न बोलने पर थी बेचैनी'

कुमार विश्वास ने खुद को किनारे लगाने के प्रयासों पर तंज कसते हुए कहा, 'बीते 8 महीनों से मैं बोला नहीं हूं क्योंकि पीएसी की बैठक नहीं हुई। एक नैशनल काउंसिल हुई, लेकिन वक्ताओं में मेरा नाम नहीं था।

बीते 7 महीने से हजारों कार्यकर्ताओं से मिलकर मैंने जाना कि 7 महीने से बोलने का अवसर न मिलने पर मुझमें इतनी बेचैनी है तो जो 5 साल से नहीं बोल पा रहे, उनमें कितनी बेचैनी होगी।'

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