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पॉल्यूशन से निपटने के लिए ''एंटी स्मॉग गन'' का डोज, चीन करता है इसका इस्तेमाल

सीवियर स्मॉग के वक्त चीन में इसी गन का इस्तेमाल किया जाता है।

पॉल्यूशन से निपटने के लिए

दिल्ली में बढ़ती प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने अपना रुख एंटी स्मॉग गन की ओर किया है। गन का ट्रायल पूर्वी दिल्ली के सबसे प्रदूषित इलाके आनंद विहार बस अड्डा आईएसबीटी में किया गया।

इसके बाद ही इसका इस्तेमाल डीटीयू और अन्य प्रदूषित इलाकों में स्मॉग हटाने के लिए किया जाएगा। वहीं, इससे पहले सोमवार को पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने उप -मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ मिलकर दिल्ली सचिवालय पर एंटी स्मॉक गन का इस्तेमाल किया था।

अधिक जानकारी के लिए आपको बता दें कि स्मॉग गन के इस्तेमाल से लेकर इसके बारे में समझने तक अभी और ट्रायल किए जाने पर विचार किया जा रहा है। इस गन की कीमत करीब 20 लाख रुपए है।

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बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक चीन ही इस गन का इस्तेमाल प्रदूषण कम करने के लिए करता है। सीवियर स्मॉग के वक्त चीन में इसी गन का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में अपनी तरह का यह पहला प्रयोग है।

गौरतलब है कि दिल्ली से पहले हरियाणा में भी पराली और इंडस्ट्री के धुएं से बचने के लिए इस गन का इस्तेमाल किया गया था। वहीं, जब आनंद विहार में आज सुबह जब एंटी स्मॉग गन का जब ट्रायल किया जाएगा उस वक्त दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहेंगे।

गन ऐसे कम करती प्रदूषण

एंटी स्मॉग गन एक ऐसा विशाल डिवाइस है, जो एक बड़े व्हीकल पर एक वॉटर टैंक से जु़ड़ा होता है। ये डिवाइस हवा में 50 मीटर ऊपर तक पानी की बौछार छोड़ सकता है। पानी के कण प्रदूषण के कणों से चिपक जाते हैं।

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इसके बाद इनमें संघनन की प्रोसेस शुरू होती है। इसके बाद जलवाष्प के रूप में मौजूद ये कण एकजुट होते हैं तथा धूल के चिपकने से जल्द भारी हाेकर धरती पर बूंद के रूप आ जाते है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि मशीन से निकले जलवाष्प में सिर्फ 50 मीटर तक ही हवा में मौजूद धूलकण (पीएम 2.5 और पीएम 10) नमी के साथ जमीन पर बैठ जाते हैं।

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