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JNU के छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प, इंटेलिजेंस भी गुस्सा नियंत्रण करने में रही असफल, जानें क्या है मामला

जेएनयू के छात्र बार-बार कुलपति या विश्वविद्यालय प्रबंधन की टीम से नई लिस्ट को लेकर नाराज थे। इस मुद्दे को लेकर वो बातचीत करना चाहते थे पर विश्वविद्यालय से कोई जवाब नहीं आया।

JNU के छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प, इंटेलिजेंस भी गुस्सा नियंत्रण करने में रही असफलजेएनयू स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट

JNU कैंपस में नौ अक्तूबर को हॉस्टल के नए नियम की सूचना विश्वविद्यालय वेबसाइट पर अपलोड होते ही विरोध शुरू हो गया था। इसी बीच 28 अक्तूबर को हॉस्टल ड्रॉफ्ट पर आयोजित बैठक के बाद छात्रों का विरोध और बढ़ गया। छात्र बार-बार कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार या विश्वविद्यालय प्रबंधन की टीम से इस मुद्दे पर बातचीत करना चाहते थे पर विश्वविद्यालय से कोई जवाब नहीं आया। इसी बीच कई प्रोवोस्ट से प्रेशर बनाकर छात्रों ने इस्तीफा भी ले लिया।

JNU के छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प, इंटेलिजेंस भी गुस्सा नियंत्रण करने में रही असफल

छात्रों ने कुलपति से बात करने के लिए एसोसिएट डीन ऑफ स्टूडेंट प्रो. वंदना गुप्ता को शुक्रवार सुबह उस समय बंधक बना लिया, जब वे स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्ट्डीज में क्लास लेने के लिए पहुंची थी। लगभग 36 घंटे के बाद दिल्ली पुलिस सादे कपड़ों में क्लास रूम में पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से मारपीट की और प्रो. गुप्ता को वहां से अस्पताल ले जाया गया।

मारपीट की घटना से छात्रों में दिल्ली पुलिस के खिलाफ गुस्सा भरा पड़ा था। दो दिन तक प्लान बनाने के बाद छात्रों ने सोमवार को हंगामा व प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है की दिल्ली पुलिस शनिवार को आम छात्रों से क्लासरूम में मारपीट नहीं करती तो शायद ये सब नहीं होता।

वहीं, पुलिस यह जाजने में भी नाकाम रही कि यह आक्रोश छात्रसंघ या वामपंथी संगठनों का नहीं, बल्कि आम छात्रों की थी। शनिवार व रविवार को छात्रों ने दीक्षांत समारोह में विजिटर के समक्ष अपनी मांग रखने का फैसला लिया। इसमें सभी आम छात्रों को सोशल मीडिया व मैसेज के माध्यम से जोड़ा गया। बाहर रहने वाले छात्र सीधे All India Council for Technical Education (AICTE) मुख्यालय पहुंचे और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।

कुलपति ने किया विजिटर के आदेश का उल्लंघन -

केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर यानी उपराष्ट्रपति ने 2017 में विजिटर कांफ्रेस में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रतिवर्ष दीक्षांत समारोह आयोजित करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही कुलपतियों को छात्रों की समस्याओं का समाधान करने व उनसे लगातार बातचीत करने का आदेश भी दिया था।

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