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लाभ का पद मामला: अधिकारीयों को गवाह बनाने वाली आप की याचिक चुनाव आयोग ने की खारिज

चुनाव आयोग ने आप के विधायकों की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें दिल्ली सरकार और विधानसभा के अधिकारियों को गवाह के रुप में तलब करने की मांग की गयी थी।

लाभ का पद मामला: अधिकारीयों को गवाह बनाने वाली आप की याचिक चुनाव आयोग ने की खारिज
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चुनाव आयोग ने आप के विधायकों की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें दिल्ली सरकार और विधानसभा के अधिकारियों को गवाह के रुप में तलब करने की मांग की गयी थी जिससे अपीलकर्ता यह साबित कर सकें कि बतौर संसदीय सचिव वे लाभ के पद से जुड़े किसी भी प्रकार के लाभ नहीं ले रहे थे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत और दो अन्य चुनाव आयुक्तों सुनील अरोड़ा और अशोक लवासा ने लाभ के पद के मामले में आप के 20 विधायकों द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुये मंगलवार को जारी आदेश में कहा ‘‘इस मामले में साक्ष्यों की खातिर गवाह बुलाने की कोई वजह नहीं है। आप विधायकों ने गत 11 सितंबर को यह याचिका आयोग के समक्ष दायर की थी।

अधिकारियों को गवाह के रूप में बुलाने की मांग को गैरजरूरी बताते हुये आयोग ने कहा कि जहां तक इस मामले में लाभ अर्जित नहीं करने का सवाल है तो यह साबित करने के लिये किसी गवाह को तलब करने की कोई जरूरत नहीं है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले आयोग लाभ के पद मामले में शिकायतकर्ता प्रशांत पटेल से जिरह की अनुमति देने वाली आप विधायकों की याचिका भी खारिज कर चुका है।

आयोग के इस फैसले को आप विधायकों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनाती दी थी। इसके फैसले में न्यायालय ने कहा था कि पटेल को जिरह के लिये नहीं बुलाया जा सकता है लेकिन आप विधायक दिल्ली सरकार के अधिकारियों को जिरह के लिये बुलाने की मांग करते हुये चुनाव आयोग में नयी याचिका दायर कर सकते हैं।

आयोग ने विधायकों की याचिका पर अपने फैसले में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का जिक्र करते हुये कहा कि अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि अगर विधायकों अधिकारियों को गवाह के रूप में बुलाना चाहते हैं तो उन्हें विस्तृत दस्तावेजी विवरण के साथ यह बताना होगा कि अधिकारियों की मौखिक गवाही क्यों जरूरी है।

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आयोग ने कहा कि याचिका में विधायकों की अर्जी निर्धारित मसौदे के मुताबिक दायर नहीं की गयी ।साथ ही इसमें विस्तृत विवरण भी नहीं दिया गया। यहां तक कि याचिकाकर्ताओं ने उन अधिकारियों के नाम आदि का भी विवरण नहीं दिया जिन्हें वे गवाह के रूप में बुलाना चाहते हैं। आप विधायकों की दलील दी थी कि उन्होंने यह याचिका दिल्ली सरकार में लाभ के पद पर रहने के बारे में सही तथ्यों को सामने लाने के लिये दायर की थी।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार में संसदीय सचिव नियुक्त किये गये आप के 20 विधायकों को लाभ के पद पर होने के कारण इनकी विधानसभा सदस्यता खत्म करने की शिकायत पर आयोग में नये सिरे से सुनवाई चल रही है।

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