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आप को झटका: अंतरिम राहत देने से दिल्ली हाई कोर्ट का इनकार, जानें पूरा मामला

चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति से आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को कथित तौर पर लाभ के पद पर काबिज रहने के कारण अयोग्य घोषित किए जाने की अनुशंसा की है।

आप को झटका: अंतरिम राहत देने से दिल्ली हाई कोर्ट का इनकार, जानें पूरा मामला

चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति से आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को कथित तौर पर लाभ के पद पर काबिज रहने के कारण अयोग्य घोषित किए जाने की अनुशंसा की है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजी गई अपनी राय में चुनाव आयोग ने कहा है कि संसदीय सचिव होने के नाते आप विधायक लाभ के पदों पर थे, इसलिए दिल्ली विधानसभा के विधायक के तौर पर इनकी सदस्यता रद्द की जाए।

इस सिफारिश के खिलाफ 7 विधायकों ने दिल्ली हाईकोर्ट में तुरंत सुनवाई की डिमांड की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विधायकों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। बताया जाता है कि दिल्ली विधानसभा के विधायक के तौर पर अयोग्य घोषित होने योग्य हैं।

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राष्ट्रपति आयोग की अनुशंसा मानने को बाध्य हैं। जिन मामलों में विधायकों या सांसदों की अयोग्यता की मांग वाली याचिकाएं दी जाती हैं, उन्हें राष्ट्रपति राय जानने के लिए चुनाव आयोग के पास भेजते हैं।

चुनाव आयोग मामले पर अपनी राय भेजता है। वर्तमान मामले में 21 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की याचिका दी गई थी लेकिन एक ने कुछ महीने पहले इस्तीफा दे दिया था।

बहरहाल, आयोग ने कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोति ने कहा कि मामला चूंकि न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए वह इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं देंगे।

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जनरैल दे चुके इस्तीफा

चुनाव आयोग ने आप के 21 विधायकों को 'लाभ का पद' मामले में कारण बताओ नोटिस दिया था। इस मामले में पहले 21 विधायकों की संख्या थी, लेकिन जरनैल सिंह पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं।

आप बोली, मोदी का कर्ज उतार रहे जोति

आप ने चुनाव आयोग पर पलटवार किया है। आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने चुनाव आयोग के फैसले को आप के खिलाफ 'साजिश' करार दिया है। भारद्वाज ने कहा मुख्य चुनाव आयुक्त एके जोति रिटायर होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी का कर्ज उतारते की कोशिश कर रहे हैं।

आशुतोष ने ट्वीट किया चुनाव आयोग को पीएमओ का लेटर बॉक्स नहीं बनना चाहिए लेकिन आज यही हकीकत है।

सोनिया, जया ने छोड़ा था पद

ऐसा नहीं है कि जनप्रतिनिधियों पर इस तरह की कोई पहली कार्रवाई हुई है। यूपीए-1 के समय 2006 में 'लाभ के पद' का विवाद खड़ा होने की वजह से सोनिया गांधी को लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर रायबरेली से दोबारा चुनाव लड़ना पड़ा था।

इसी तरह 2006 में ही जया बच्चन पर भी आरोप लगा कि वह राज्यसभा सांसद होने के साथ-साथ यूपी फिल्म विकास निगम की चेयरमैन भी हैं।

इसे 'लाभ का पद' माना गया और चुनाव आयोग्य ने जया बच्चन को अयोग्य ठहरा दिया। जया बच्चन ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। यहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।

क्या कहता है संविधान

संविधान के अनुच्छेद 102 (1) ए के तहत सांसद या विधायक ऐसे किसी अन्य पद पर नहीं हो सकते जहां वेतन, भत्ते या अन्य दूसरी तरह के फायदे मिलते हों।

संविधान के अनुच्छेद 191 (1) (ए) और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 9 (ए) के तहत भी सांसदों और विधायकों को अन्य पद लेने से रोकने का प्रावधान है।

क्या है मामला

दिल्ली विधानसभा में 70 में से 67 सीटों पर आम आदमी पार्टी के विधायक चुनकर आए थे। 13 मार्च 2015 को केजरीवाल सरकार ने अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त किया था।

राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष रवींद्र कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में इन नियुक्तियों के खिलाफ याचिका दायर की थी। कुमार का कहना था कि ये नियुक्तयों गैरकानूनी हैं।

विधानसभा का गणित

कुल सीट : 70

आप : 66

भाजपा : 4

बहुमत के लिए जरूरी: 36

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