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सेप्टिक टैंक में मौत का मामलाः दिल्ली सरकार ने दिए जांच के आदेश, दलित अधिकार संगठनों ने की मुआवजे की मांग

दिल्ली सरकार ने पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर इलाके में डी एल एफ ग्रीन अपार्टमेंट्स में एक सेप्टिक टैंक साफ करते समय दम घुटने से पांच लोगों की मौत के मामले में दिल्ली सरकार ने सोमवार को जांच का आदेश दिया।

सेप्टिक टैंक में मौत का मामलाः दिल्ली सरकार ने दिए जांच के आदेश, दलित अधिकार संगठनों ने की मुआवजे की मांग

दिल्ली सरकार ने पश्चिमी दिल्ली के मोती नगर इलाके में डी एल एफ ग्रीन अपार्टमेंट्स में एक सेप्टिक टैंक साफ करते समय दम घुटने से पांच लोगों की मौत के मामले में दिल्ली सरकार ने सोमवार को जांच का आदेश दिया।

वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त से रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही दलित अधिकार संगठनों ने मांग की कि मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय ने श्रम आयुक्त से तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट देने को कहा।
उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को दस-दस लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एन सी एस सी) के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया के नेतृत्व में एक टीम ने आज शाम घटनास्थल का दौरा किया और दिल्ली के मुख्य सचिव तथा पुलिस के संयुक्त आयुक्त से लापरवाही के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

एनसीएससी के उपाध्यक्ष एल मुरुगन ने पीटीआई से कहा,‘‘हमने उन्हें कार्रवाई के लिए तीन दिन का समय दिया है...यहां रोजगार प्रदाता डी एल एफ और संबंधित ठेकेदार लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं।'
इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किए और मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी। एन एच आर सी ने एक बयान में कहा, ‘‘हम मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और मृतकों के आश्रितों के लिए राहत एवं उनके पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी जानना चाहेंगे।' घटना रविवार को मोतीनगर के डी एल एफ ग्रीन अपार्टमेंट्स में हुई थी।
पुलिस ने कहा कि इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और यह पता लगाने के लिए जांच की जा रही है कि हादसा किसकी लापरवाही की वजह से हुआ।
मंत्री राय के सचिव विवेक कुमार त्रिपाठी ने एक बयान में कहा, ‘‘श्रम मंत्री चाहते हैं कि घटना की तथ्यान्वेषी जांच होनी चाहिए जिससे कि सरकार गलती करने वाली एजेंसियों/कंपनियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय कर सके।'
इस बीच, दलित अधिकार संगठनों ने मांग की कि घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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