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अदालत ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई

दिल्ली की एक अदालत ने 10 वर्षीय लड़की को अगवा करने और उससे बलात्कार करने के जुर्म में 29 वर्षीय व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के प्रति समाज में कोई सहानुभूति नहीं होती है और उनसे दूरी बनाकर रखा जाता है।

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दिल्ली की एक अदालत ने 10 वर्षीय लड़की को अगवा करने और उससे बलात्कार करने के जुर्म में 29 वर्षीय व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं के प्रति समाज में कोई सहानुभूति नहीं होती है और उनसे दूरी बनाकर रखा जाता है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सीमा मैनी ने राम सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून की संबंधित धाराओं के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें से आधी रकम पीड़िता के परिवार को दी जाएगी।

अदालत ने एक हालिया आदेश में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हमारे देश में सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। लेकिन, यह दुखद है कि सामाजिक और भावनात्मक मोर्चे पर, हमारा समाज लगातार कठोर और बेरहम होता जा रहा है, अदालत ने कहा कि बलात्कार पीड़िता के लिए इसमें कोई सहानुभूति या संवेदना नहीं है।

बलात्कार की पीड़िताओं से पुराने समय की तरह एक अछूत जैसा ही बर्ताव होता है और उनसे हर कोई एक दूरी बनाकर रखता है। खुद पीड़िता के भीतर भी आत्मसम्मान की भावना खत्म हो जाती है, वह टूट जाती है। पीड़िता की जिंदगी पर हमेशा के लिये इस अपराध का साया रहता है।

यह देखा गया है कि बलात्कार ऐसे निशान छोड़ देता है जो पीड़िता के पूरे व्यक्तित्व को तबाह कर देता है। पीड़िता की जिंदगी बर्बाद हो जाती है सिर्फ और सिर्फ एक अपराधी की वासना के कारण। ऐसे अपराधी किसी तरह की संवेदना या नरमी बरते जाने के हकदार नहीं होते।

अभियोजन के मुताबिक, 2015 में जब लड़की खेलने के लिए अपने दोस्त के घर गयी थी तो सिंह ने दो अन्य लोगों के साथ उसे अगवा कर लिया और उसे पास की एक जगह एक कमरे में बंद कर दिया। लड़की के अभिभावक जब उसे खोजने गए और कमरे का दरवाजा तोड़ा तो लड़की ने दुष्कर्म की बात उन्हें बताई। अदालत ने दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को निर्देश दिया कि दुष्कर्म पीड़िता को पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाये।

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