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तिहाड़ जेल की खुली पोल: आरोपी को ब्लेड मारने पर मिलते हैं पैसे, सांसद ने सुनाई दास्तान

तिहाड़ जेल के गैंगवार का जिक्र करते हुए पप्पू यादव ने लिखा है कि यहां हमेशा कृष्ण गिरोह और अनूप गिरोह के गैंगस्टर जेल में आने के बाद एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश करते हैं।

तिहाड़ जेल की खुली पोल: आरोपी को ब्लेड मारने पर मिलते हैं पैसे, सांसद ने सुनाई दास्तान

'मेरे मोबाइल फोन की घंटी बज उठी। जी हां, मैं जेल में था और मोबाइल फोन की ही बात कर रहा हूं। आपको बहुत आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए, जेल में बंदियों के पास मोबाइल होना वैसी ही आम बात है, जैसे बिना टिकट लोकल ट्रेन में चलना।' जेल में कैद के दौरान मोबाइल के खुलेआम इस्तेमाल को स्वीकार किया है एक लोकसभा सांसद ने।

बिहार के मधेपुरा से निर्देलीय सांसद पप्पू यादव ने पटना के बेऊर जेल से लेकर दिल्ली के तिहाड़ जेल में अपने बिताए अपने दिनों के अनुभव को विस्तार से लिखा है एक किताब 'जेल' में, जो जल्द ही रिलीज होने वाली है। मालूम हो कि पप्पू यादव संगीन आरोप में 17 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं।

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ब्लेड है जेल का खतरनाक औजार

तिहाड़ जेल के गैंगवार का जिक्र करते हुए पप्पू यादव ने किताब में लिखा है कि यहां हमेशा दो गैंगों का टकराव होता रहा है। खासकर कृष्ण गिरोह और अनूप गिरोह के गैंगस्टर जेल में आने के बाद एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश करते हैं।

जेल में ब्लेड कैसे सबसे खतरनाक हथियार है और यह किस तरह अपराधियों तक पहुंचता है, इसका भी विवरण है। पप्पू यादव ने अपने अनुभव के आधार पर लिखा कि जेल में मजबूत होने की परिभाषा है कि कौन सा गुट ब्लेड से आम कैदियों पर अधिक हमला कर सकता है।

इसमें सनसनीखेज बात है कि इनमें से कई तो सालों तक जेल में ही रहते हैं और ब्लेड से हमला के बदले बाहर से पैसा लेते हैं और इससे लाखों कमा लेते हैं। इसी कमाई से उनका घर चलता है। इन सबका रिमोट कंट्रोल कहीं बाहर रहता है।

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दबंग जातियों का दबदबा

जेलों में जातिगत संघर्ष के बारे में लिखा गया है कि पटना के बेऊर जेल में अलग-अलग जातियों के कैदियों के मुलाकातियों के लिए अलग-अलग खिड़की होती थी और दंबग जाति के कैदी कमजोर जाति के कैदियों को जोर आवाज में बात करने की अनुमति नहीं देते थे।

यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि किस तरह जेल में दबंग कैदी दूसरे कमजोर कैदियों का शारीरिक शोषण करते थे। बेऊर जेल की एक खास घटना के जिक्र से इस बारे में बताया गया है।

किताब में इसके अलावा तमाम दूसरी घटनाओं का भी जिक्र किया है, जिसे बिहार के इस सांसद ने अनुभव किए और इसी आधार पर सरकार को कई सुझाव भी दिए हैं।

इनपुट- भाषा

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