Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

दिल्ली: अन्ना हजारे की ललकार, अंग्रेज चले गए लेकिन लोकतंत्र नहीं आया

छह साल बाद एक बार फिर दिल्‍ली का रामलीला मैदान समाजसेवी अन्ना हजारे का कुरुक्षेत्र बन गया है।

दिल्ली: अन्ना हजारे की ललकार, अंग्रेज चले गए लेकिन लोकतंत्र नहीं आया

छह साल बाद एक बार फिर दिल्‍ली का रामलीला मैदान समाजसेवी अन्ना हजारे का कुरुक्षेत्र बन गया है। अपनी तमाम मांगों को लेकर उन्‍होंने केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी सरकार को खबरदार किया है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अंग्रेज चले गए, लेकिन लोकतंत्र नहीं आया। साथ ही कहा कि सिर्फ गोरे गए और काले आ गए। अन्ना ने सरकार के सामने किसानों के मुद्दे पर अलग-अलग मांगे रखी हैं।

यह भी पढ़ें- हताश विपक्ष सरकार के खिलाफ झूठ फैला रहा है: पीएम मोदी

इस महाआंदोलन की शुरुआत करने से पहले शुक्रवार सुबह वह राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि स्थल पर बापू को नमन किया। इसके बाद अन्‍ना सीधे रामलीला मैदान पहुंचे और तिरंगा फहराने के बाद अनशन प्रारंभ किया।

क्या यही लोकतंत्र है

अन्‍ना ने कहा कि मैंने सरकार को 42 बार पत्र लिखा, लेकिन सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया और अंत में मुझे अनशन पर बैठना पड़ रहा है। अपनी मांगों के संदर्भ में अन्ना हजारे ने कहा कि सिर्फ जुबानी आश्वासन पर अनशन नहीं रुकेगा, बल्कि पुख्ता निर्णय लेना पड़ेगा।

जब तक प्राण हैं बात करेंगे

अन्ना हजारे ने लंबी लड़ाई का संकेत देते हुए कहा कि जब तक शरीर में प्राण हैं बात करेंगे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की उम्र में हार्ट अटैक से मृत्यु होने की बजाए समाज की भलाई के लिए मृत्यु हो।

इस बार आर-पार की होगी लड़ाई

अन्ना ने बताया कि वे इस आंदोलन में सिर्फ किसानों की लड़ाई लड़ेंगे। अन्ना ने मांगों को लेकर यह भी कहा कि इस बार जो लड़ाई होगी वो आर-पार की होगी।

जेल में डाला तो पतन निश्चित

आंदोलन से पहले गरजे अन्ना, बोले- हमें जेल में डालने के बाद सरकार का पतन निश्चित है। केंद्र सरकार को घेरते हुए अन्ना ने कहा कि आंदोलनकारियों को यहां आने से रोका जा रहा है। क्या यही लोकतंत्र है। सभा में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं।

दुबारा पैदा न हों, केजरी, सिसोदिया

अन्ना ने कार्यकर्ताओं से शपथपत्र लिया है कि वह भविष्य में किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लेगा।

यह शपथ पत्र इसलिए लिया है, ताकि भविष्य में उनके आंदोलन के सहारे नया केजरीवाल, सिसौदिया या किरण बेदी पैदा न हों। अन्ना के मंच पर किसी भी राजनीतिक पार्टी को जगह नहीं दी जाएगी।

सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध

पुलिस का कहना है कि मेटल डिटेक्टर से गुजरने के बाद मैन्युअल जांच करने के बाद ही किसी को अंदर जाने दिया जाएगा। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। रामलीला मैदान के चारों तरफ व अंदर भी चप्पे-चप्पे पर पैरामिलिट्री व दिल्ली पुलिस तैनात है।

Next Story
Top