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केजरीवाल की कमजोरी का काला चिट्ठा, इस वजह से ''आप'' नेता छोड़ रहे साथ!

आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अपने साथी नेता आशुतोष, आशीष खेतान ने आखिरकार पार्टी का साथ छोड़ दिया। इससे पहले योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, किरण बेदी जैसे कद्दावर नेताओं ने भी केजरीवाल को बाय, बाय... बोल दिया।

केजरीवाल की कमजोरी का काला चिट्ठा, इस वजह से

आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अपने साथी नेता आशुतोष, आशीष खेतान ने आखिरकार पार्टी का साथ छोड़ दिया। इससे पहले योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, किरण बेदी जैसे कद्दावर नेताओं ने भी केजरीवाल को बाय, बाय... बोल दिया।

खुद की ईमानदारी का ढोल पीटने वाले केजरीवाल अब अपनों के द्वारा ही बेईमान करार दे दिए गए हैं। राजनीति में सुधार करने का ढकोसला करने वाले अरविंद केजरीवाल आज खुद ही राजनीति का शिकार हो गए हैं।

अब अगर आम आदमी पार्टी को देखा जाए तो पूरी तरह खोखला नजर आ रही है। खोखला इसलिए क्योंकि इस्तीफा देने वाले नेताओं ने केजरीवाल की असली छवि जनता को दिखा दी है। ऐसे में आगामी चुनाव केजरीवाल के लिए क्या परिणाम लेकर आएंगे ये तो वक्त तय करेगा। लेकिन किस चेहरे पर चुनाव लड़ेंगे ये एक बड़ा सवाल है और आप के लिए चुनौती भी।

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अब अगर साथ छोड़ गए नेताओं की बातों को सुनिए तो पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल की आखिर किस आदत की वजह से उनके अपने दोस्त ठोकर मार कर जा रहे हैं।

योगेंद्र यादव का आरोप

योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने केजरीवाल के साथ मिलकर 'आप' को खड़ा किया। लेकिन कुछ सालों के बाद ही दोनों दिग्गज नेता पार्टी से अलग हो गए। खबरों की मानें तो इनका आरोप था कि वे केवल अपनी सुनते हैं। हालांकि अरविंद केजरीवाल ये आरोप लगते रहते हैं कि पार्टी में खुद पर सवाल बर्दाश्त नहीं करते हैं।

योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण 'आप' के संस्थापक सदस्य रह चुके हैं और वे कई बार ऐसे आरोप लगा चुके हैं। कहा जाता है कि कई नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी 'सिंगल मैन पार्टी' बन गई है।

आशुतोष की नाराजगी

भले ही 'आप' के पूर्व नेता और पत्रकार आशुतोष ने जातिवाद को लेकर केजरीवाल की पोल खोली है लेकिन जब केजरीवाल ने कारोबारी सुशील गुप्ता और चार्टर्ड अकाउंटेंट एनडी गुप्ता को राज्यसभा का सासंद बनाया था। तो आशुतोष ने नाराजगी जाहिर की थी।

हालांकि इसको लेकर बाकि नेताओं ने भी कहा था कि जिन लोगों ने पार्टी को खड़ा किया और इसके लिए मेहनत की केजरीवाल उनकी अनदेखी कर रहे हैं। इसी वजह से केजरीवाल टीम बिखरती चली गई।

आशीष खेतान का सवाल

आशीष खेतान केजरीवाल के सबसे करीबी माने जाते थे लेकिन जब इन्होंने पार्टी छोड़ी तो ये साफ हो गया कि 'आप' में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसके बाद कई तरह की बातें सामने आई।

पार्टी छोड़ने को लेकर आशीष खेतान ने ट्विटर पर लिखा, 'मैं एक पत्रकार हूं और हमेशा एक नागरिक के तौर पर भी सक्रिय रहकर मैंने खुद को आभारी पाया है. सकारात्मक बदलाव के इरादे से ही मैं राजनीति में आया था और फिर दिल्ली सरकार का हिस्सा बना. पिछले दो सालों से मुझे ख़ुद पर शक हो रहा था और सवाल भी कर रहा था कि क्या चुनावी राजनीति में रहना चाहिए?'

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