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दिल्ली: विकास के नाम पर 17 हजार पेड़ काटे जाने को लेकर भाजपा और आप आमने-सामने

दक्षिण दिल्ली की सात कॉलोनी के पुनर्विकास के लिए पेड़ों की कटाई के मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है।

दिल्ली: विकास के नाम पर 17 हजार पेड़ काटे जाने को लेकर भाजपा और आप आमने-सामने

दक्षिण दिल्ली की सात कॉलोनी के पुनर्विकास के लिए पेड़ों की कटाई के मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री हर्षवर्द्धन ने दावा किया कि गैर वन वाले क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के लिए आप सरकार जिम्मेदार है।

वहीं आप ने दावा किया कि इसके लिए पिछले वर्ष नवम्बर में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दी थी।

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ आमने-सामने है और उसने आरोप लगाए कि पुनर्विकास योजना में करीब 17 हजार पेड़ काटे जाएंगे।

हर्ष वर्द्धन ने कहा कि उनके पास जो सूचना है उसके मुताबिक जिन इलाकों में पेड़ काटे जाने हैं वे ‘गैर वन क्षेत्र' हैं और भारत सरकार के वन विभाग का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने कहा, ‘गैर वन क्षेत्रों में जो भी स्थानीय अनुमति दी जाती है वह दिल्ली सरकार देती है। यह सीधे दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में है न कि हमारे।

आप ने आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि पेड़ों को काटने की अनुमति पिछले वर्ष नवम्बर में हर्ष वर्द्धन के मंत्रालय ने दिया।

आप नेता सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट किया, ‘पुनर्विकास योजना की फाइल बताती है कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग ने 27 नवम्बर 2017 को दी।'

उन्होंने यह भी दावा किया कि पेड़ों को काटने की अनुमति देने के लिए ‘सक्षम प्राधिकारी' उपराज्यपाल हैं।

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