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नौ वीं में पढ़ने वाली किशोरी बनी मां

जानकार ने बनाया हवस का शिकार

नौ वीं में पढ़ने वाली किशोरी बनी मां
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नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में लोकलाज के कारण एक मासूम की मौत हो गई। उत्तरी जिले के सब्जी मंडी इलाके में एक 15 साल की किशोरी बिन ब्याही मां बन गई। लोकलाज के डर से किशोरी की मां ने नवजात को अस्पताल के कूड़ेदान में डालने का प्रयास किया।
समय रहते अस्पतालकर्मी ने उसे रोक लिया और बच्चे की जान बचाने के लिए उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया। लेकिन उसकी जान नहीं बच पाई। वहीं सूचना मिलने के बाद पुलिस ने जब जांच की तो इस मामले में नया खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि एक 30 वर्षीय युवक ने किशोरी को हवस का शिकार बनाया था।
सब्जी मंडी थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान राहुल (30) के रूप में हुई है। वहीं पुलिस ने बच्चे को कूड़े में फेंकने के बाबत भी केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, रविवार सुबह 15 साल की किशोरी के पेट में अचानक दर्द होने पर उसकी मां बाड़ा हिंदूराव अस्पताल लेकर पहुंची। जहां किशोरी ने एक बेटे को जन्म दिया।
सभी की नजरों से बचाते हुए किशोरी की मां उस बच्चे को अस्पताल के कूड़ेदान में डालने लगी। इसी दौरान एक अस्पताल कर्मी ने उसे देख लिया और उसने बच्चे को महिला से लेकर उसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया और घटना की सूचना पुलिस को दी। हालांकि डॉक्टरों ने बच्चे को बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन दो घंटे बाद बच्चे की मौत हो गई। अस्पताल पहुंची पुलिस ने किशोरी की मां से पूछताछ शुरू की।
पूछताछ में उसकी मां ने खुलासा किया कि उसके एक जानकार ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया था। लोकलाज की वजह से परिवार ने चुप्पी साध ली। लेकिन उस घटना के बाद किशोरी गर्भवती हो गई। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले की छानबीन में जुटी है। वहीं परिजनों ने पुलिस को बताया कि किशोरी पास ही के स्कूल में नौ वीं की छात्रा है।
खास बातें:
-रविवार को बाड़ा हिन्दुराव अस्पताल में दिया बेटे को जन्म
-लाख कोशिश के बाद नवजात को नहीं बचाया जा सका
-मामले में आरोपी गिरफ्तार

दुष्कर्मी को सात साल की जेल
एक महिला से बलात्कार और धमकाने के लिए दिल्ली की एक अदालत ने एक युवक को सात साल के लिए जेल में भेज दिया है। अदालत ने इस कृत्य को 'अधम और निंदनीय' बताते हुए कहा कि इसने पीड़िता के मन में अपमान, घृणा, सदमा और आजीवन दाग छोड़ दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन ने 22 वर्षीय हसीब को महिला से बलात्कार के लिए कारावास की सजा सुनाई।
महिला उस घर में घरेलू कामगार के तौर पर काम करती थी, जहां वह दर्जी का काम करता था। अदालत ने कहा कि दोषी ने पीड़िता के साथ अधम कृत्य किया। अदालत ने कहा कि, इसे वैश्विक तौर पर नैतिक और शारीरिक तौर पर समाज में सर्वाधिक निंदनीय अपराध और पीड़िता के शरीर, मस्तिष्क और निजता पर हमला माना जाता है। उसकी गरिमा तार-तार हो गई है।
इस अपराध को लेकर सामाजिक कलंक इस तरह का है कि कई बार पीड़िता अपराध की शिकायत भी नहीं करती है। अदालत ने दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण (दक्षिण जिला) को पीड़िता को उचित मुआवजा देने पर फैसला करने को भी कहा। अदालत ने कहा कि, अदालतों को यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं की दुर्दशा पर प्रतिक्रियाशील होना चाहिए। समाज की आस्था और मूल्य प्रणाली को सबसे ऊपर दिमाग में रखने की आवश्यकता है।
अदालत ने कहा, 'जबरन यौन हमला पीड़िता के मन में अपमान, घृणा की भावना, काफी परेशानी, शर्म की भावना, सदमा और जीवन भर के लिए भावनात्मक दाग दे जाता है।'
पुलिस के अनुसार तीन अक्तूबर 2015 को हसीब ने महिला से उस वक्त बलात्कार किया जब वह घर में अकेली थी, जहां वह घरेलू नौकरानी के तौर पर काम करती थी। उसने उसे बंद कर दिया और अगर उसने किसी को घटना के बारे में जानकारी दी तो उसे मार डालने की धमकी भी दी। महिला ने अपने पति को घटना के चार दिन बाद इसकी जानकारी दी और उसके बाद शिकायत दर्ज की गई।
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