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खारिज हुआ यूजीसी का फैसला, जारी रहेगी नॉन नेट फेलोशिप

बीते दो दशक से नेट की परीक्षा का आयोजन यूजीसी साल में दो बार करती है। इसमें चयनित छात्रों को शोध करने के लिए फेलोशिप दी जाती है।

खारिज हुआ यूजीसी का फैसला, जारी रहेगी नॉन नेट फेलोशिप
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नई दिल्ली. नॉन-नेट फेलोशिप को लेकर बीते कुछ दिनों से जारी हंगामे के बीच बुधवार को आधिकारिक रूप से केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस बाबत यूजीसी के फैसले को खारिज कर दिया और आयोग द्वारा दी जा रही नेट और नॉन-नेट फेलोशिप की समीक्षा के लिए आईआईटी गोवाहाटी के पूर्व निदेशक प्रो गौतम बरूवा की अध्यक्षता में समीक्षा समिति के गठन किए जाने की घोषणा कर दी है। ये समिति आगामी दिसंबर महीने तक अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी।

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मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस मामले पर हाल में उसके द्वारा नॉन-नेट फेलोशिप का विस्तार करने और एक समीक्षा समिति का गठन किए जाने की बात कही गई थी जिसकी घोषणा की गई है। समिति में सदस्य के रूप में प्रो सईद बारी (कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय,गुजरात) प्रो कुलदीप अग्निहोत्री (कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश) डॉ मीना राजीव चंद्रवर्कर (कुलपति, कर्नाटक स्टेट वूमेंस यूनिवर्सिटी) शामिल हैं। इसके अलावा यूजीसी सचिव सदस्य संयोजक के रूप में समिति में हैं।

समिति मुख्य रूप से नेट-नॉन नेट फेलोशिप का मेरिट के आधार पर विस्तार करने, फेलोशिप के रूप में हर महीने चयनित छात्रों को दी जाने वाली धनराशि के लिए पारदर्शी प्रक्रिया बनाने, नॉन-नेट फेलोशिप के लाभार्थियों में राज्य विश्वविद्यालयों को भी शामिल करने ,नॉननेट फेलोशिप पाने वालों छात्रों की पात्रता में आर्थिक पृष्ठभूमि और अन्य जरूरी मुद्दों को आधार बनाने, फेलोशिप के दिशानिर्देंशों के निर्माण के लिए कार्य करने जैसे विषयों पर अपनी समीक्षा को केंद्रित करेगी।

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बीते दो दशक से ऑल इंडिया नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट नेट का आयोजन यूजीसी साल में दो बार करती है। इसमें चयनित छात्रों को शोध करने के लिए फेलोशिप दी जाती है। वर्तमान में 9 हजार छात्र एमफिल और पीएचडी कार्यक्रम में शामिल हैं। नॉन-नेट फेलोशिप यूजीसी ने साल 2006 में लागू की थी। अभी ये केवल 50 संस्थानों में लागू है, जिसमें केंद्रीय विश्वविद्यालय और शोध के मामले में शीर्षस्थ संस्थान शामिल हैं। इनमें करीब 35 हजार छात्र इन दोनों फेलोशिप का लाभ ले रहे हैं। यूजीसी ने दिसंबर 2014 में नेट के आधार पर दी जाने वाली रिसर्च फेलोशिप की वित्तीय सहयोग राशि बढ़ा दी थी। लेकिन इसके विस्तार पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस पर अब मंत्रालय के फैसले के बाद काम शुरू होगा।

नीचे की स्लाइड में पढ़िए, क्या था मामला -

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