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युवाओं के मोटापे से परेशान यूजीसी, विश्वविद्यालयों में जंक फूड पर लगाई पाबंदी!

यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को जारी किया पत्र

युवाओं के मोटापे से परेशान यूजीसी, विश्वविद्यालयों में जंक फूड पर लगाई पाबंदी!
नई दिल्ली. देश में महामारी का रूप ले चुकी मोटापे की समस्या ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी है। इसलिए अब दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करने में लगे हुए हैं कि उच्च-शिक्षण संस्थानों में जंक फूड की बिक्री पर पाबंदी लगायी जाए। मंत्रालय के निर्देंश पर यूजीसी ने इस बाबत बीते 10 नवंबर को सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को एक पत्र लिखकर कहा है कि वो अपने-अपने क्षेत्राधिकार में आने वाले कॉलेजों में जंक फूड पर पांबदी लगाएं और युवाओं को मोटापे व इससे होने वाली समस्याआें के बारे में जागरूक करें।
छात्रों को मिलेगा बेहतर जीवन
मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से यूजीसी को इस संबंध में बीते 20 अक्टूबर को पत्र लिखा गया था। इसमें युवाआें के बेहतर जीवन के लिए कॉलेजों में जंक फूड की बिक्री पर पाबंदी लगाकर अच्छे खाने को एक मानक के रूप में प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई थी। मंत्रालय का मानना है कि ऐसा होने पर छात्र न सिर्फ स्वस्थ्य व लंबा जीवन जी पाएंगे। बल्कि उन्हें संस्थानों में ज्यादा तेजी से सीखने में भी मदद मिलेगी।
ये निर्देंश हुए जारी
यूजीसी ने सभी केंद्रीय विवि के कुलपतियों को लिखे पत्र में इस संबंध में कुछ दिशानिर्देंशों का पालन करने को कहा है। इसमें छात्रों को जंक फूड के नुकसान के बारे में जागरूक करने को कहा गया है। विश्वविद्यालय छात्रों के स्वास्थ्य के बारे में एक अहम डेटा सोर्स के रूप में भूमिका निभा सकते हैं। इसमें बच्चों के बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), शरीर के वजन का प्रतिशत, कमर का वजन जैसी जानकारियां एकत्रित करके उन्हें बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर विवि के फैकेल्टी और अन्य स्टाफ के लिए अनुपालन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना, स्टूडेंट वेलफेयर डिपार्टमेंट के तहत वेलनेस कलस्टरों की स्थापना की जानी चाहिए। इसमें बच्चों की अच्छे खान-पान, स्वास्थ्य और नियमित व्यायाम को लेकर काउंसलिंग की जानी चाहिए। इन गतिविधियों की मदद से युवा छात्रों को मोटापे की समस्या से निजात दिलाने में मदद की जा सकती है।
30 मिलियन मोटापे का शिकार
भारत में मोटापा 21वीं शताब्दी में एक महामारी का रूप ले चुका है। एक निजी कंपनी द्वारा किए गए हालिया शोध के मुताबिक भारत दुनिया में मोटापे की समस्या से गंभीरता से जूझता हुआ दुनिया का तीसरा देश बन गया है। यहां 11 फीसदी युवक, 20 फीसदी वयस्क इस समस्या से पीड़ित हैं। आबादी के हिसाब से भारत की 30 मिलियन जनसंख्या मोटापे से ग्रसित है। युवा पीढ़ी को इस संबंध में जागरूक करना बेहद जरूरी हो गया है। क्योंकि यहां तेजी से बढ़ रहे महानगरीय जीवन, इंटरनेट के फैलते जाल, मोबाइल और टीवी जैसे संचार माध्यमों की उपलब्धता और इनमें युवाआें की बढ़ती रूचि की वजह से चिंता में इजाफा हो रहा है।
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