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तिहाड़ भी हुआ कैशलेस, डिजिटल पेमेंट से होती है खरीद-फरोख्त

कैदी कैटिन में खाने-पीने के लिए करते हैं डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल

तिहाड़ भी हुआ कैशलेस, डिजिटल पेमेंट से होती है खरीद-फरोख्त
नई दिल्ली. साउथ एशिया की सबसे बड़ी जेल तिहाड़ अब पूरी तरह से कैशलेस और डिजिटल हो गई है। देश में हुई नोटबंदी के बाद सरकार देशभर में कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। लेकिन तिहाड़ जेल का प्रशासन इस व्यवस्था में पहले ही पूरी तरह से खुद को ढाल चुका है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां के कैदी अब अपनी बनाई हुई चीजों को डिजिटल पेमेंट के जरिए बेच रहे हैं।
शुक्रवार को नीति आयोग और सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय से एक सर्कुलर जारी कर जेल में कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने को कहा गया है, लेकिन इस आदेश से पहले ही जेल प्रशासन ने इसे पहले ही अमल में ला रखा है।
DG (जेल) सुधीर यादव ने बताया कि टीजे ब्रैंड के अंतर्गत बेची जाने वाली चीजों के लिए पूरी तरह से कैशलेस व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने बताया, 'हमने सभी टीजे स्टॉल पर POS मशीनें लगवाई हैं। इंपोरियम में भी ऐसी ही व्यवस्था करवाई गई है।' तिहाड़ में अब कार्ड स्वाइप करके प्रिजनर प्रॉपर्टी अकाउंट में पैसे भेजे जा सकते हैं। अगर कैदी का परिवार दिल्ली में नहीं भी है तो सीधे उनके अकाउंट में पैसे भेजे जा सकते हैं।
तिहाड़ के अडिशनल IG, मुकेश कुमार ने बताया, 'कैदियों द्वारा कमाए गए पैसे उनके इंडियन बैंक के प्रॉपर्टी अकाउंट में जमा हो जाते हैं। कैदियों को स्मार्ट कार्ड्स दिए गए हैं, जिन्हें वे महीने में 6,000 तक रिचार्ज कर सकते हैं। इससे वे जेल की कैंटीन से खाने-पीने और रोजाना के इस्तेमाल की चीजें खरीद सकते हैं।'
जेल प्रशासन ने हाई स्पीड इंटरनेट के लिए फाइबर केबल नेटवर्क बिछवाया है। तिहाड़ में सभी कैदियों की डीटेल डेटाबेस में स्टोर की गई है। इसे बायोमेट्रिक से जोड़ा गया है। कैदियों के फिंगर प्रिंट के जिरिए जेल में आने-जाने से संबंधित सारी जानकारी सुरक्षित रखी जाती है।
इसके अलावा जेल के दोनों गेटों पर विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम बनाया गया है। जानकारी के मुताबिक, यहां रोजाना करीब 1800 लोग लोग कैदियों से मिलने आते हैं। सुरक्षा जांच के मद्देनजर यहां आने वाले लोगों को फोटो पास दिया जाता है। विजिटर की डीटेल का इस्तेमाल पुलिस जांच के लिए किया जाता है। तिहाड़ में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम भी है जिसका इस्तेमाल खतरनाक कैदियों को कोर्ट में पेश करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे के जिरिए गार्ड और कैदियों की चहलकदमी पर नजर रखी जाती है।
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