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यहां भिखारियों के पास भी हैं नामी वकील

दिल्ली सरकार परेशान, पैरवी कर आसानी से छुड़ा लाते हैं दूसरे भिखारी

यहां भिखारियों के पास भी हैं नामी वकील

नई दिल्ली. सड़क पर किसी भिखारी को देख कर यदि दया आ रही है और उसे कुछ देने का मन बना रहे हो तो रुको, हो सकता है कि वह आपसे ज्यादा रईस हो। दिल्ली सरकार भी इनकी हैसियत से परेशान हैं। दरअसल बॉम्बे भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी दिल्ली की सड़कों से भिखारियों को पकड़कर लामपुर स्थित केंद्र में लाते हैं।

यहां इन्हें रखकर सुधारने से पहले मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करना पड़ता है। जब अधिकारी इन भिखारियों को मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत करते हैं उस दौरान अधिकारियों के जवाब इन भिखारियों के नामी वकील के सवालों व दलीलों के सामने टिक नहीं पाते और मजबूरन इन्हें छोड़ना पड़ जाता है। हालात यह है कि अधिकारी एनजीओ की मदद से हर माह 25-30 भिखारी को पकड़कर लाते हैं, लेकिन साक्ष्य के अभाव में अधिकतर को छोड़ना पड़ता है।

स्थिति यह है कि लामपुर स्थित केंद्र में महज 10-15 भिखारी ही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नियमों के अभाव में भिखारियों सुधार पाना मुश्किल हो रहा है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार ने सुझाव व निर्देश भेजे थे जिसपर दिल्ली सरकार ने अपनी टिप्पणी भेज दी है। दिल्ली सरकार इस पर अपना दिल्ली का मॉडल तैयार करेगी। इसके लिए 9 मई को बैठक होगी। देश के अन्य राज्यों के मुकाबले यहां परिस्थितियां अलग है। सरकार सुधारने की जगह पुर्नवास पर ध्यान देगी। यह मॉडल केवल उन भिखारियों के लिए होगा जो वास्तव में सुधरना चाहते हैं।
तेजी से बढ़ रही संख्या
दिल्ली में भिखारियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आकड़ों के अनुसार, दिल्ली में तीन लाख से अधिक भिखारी हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। कुछ क्षेत्रों में एक भिखारी प्रति दिन एक हजार रुपये तक जमा कर लेता है। यहीं कारण है कि वह इस पेशे को छोड़ना नहीं चाहता। वहीं अधिकारियों की माने तो इनके पीछे बहुत बड़ी लॉबी काम कर रही है, जो सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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