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सुप्रीम कोर्ट का फरमान, बिना बताए छुट्टी गए तो होंगे बर्खास्त!

पीठ ने फैसला देते हुए सिपाही मनोज देसवाल को बर्खास्त करने के सेना के निर्णय को सही ठहाराया।

सुप्रीम कोर्ट का फरमान, बिना बताए छुट्टी गए तो होंगे बर्खास्त!
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बिना बताए छुट्टी पर जाने वाला कभी सिपाही अच्छा सैनिक नहीं बन सकता ऐसे व्यक्ति को सेना से बिना नोटिस बर्खास्त करने में कोई दिक्कत नहीं है। जस्टिस एआर दवे और एके गोयल की पीठ ने यह फैसला देते हुए सिपाही मनोज देसवाल को बर्खास्त करने के सेना के निर्णय को सही ठहाराया। मनोज बिना अनुमति लिए 108 दिनों की छुट्टी पर गया था।
आदेश को देसवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी जहां 2007 में उसे डिस्चार्ज करने के आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया और उसे सेवा में बहाल करने का फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में उसे न तो अपना केस रखने को मौका दिया गया और न ही उसे नोटिस जारी किया गया। इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट आई। केंद्र ने कहा कि जो व्यक्ति बिना अनुमति के गैरहाजिर रहा है और जिसे सेना नियमों के तहत भगौड़ा घोषित किया जा चुका हो, वह कभी अच्छा सैनिक नहीं बन सकता। सेना रूल्स के रूल 13(3) के तहत कमाडिंग आफिसर को यह शक्ति हासिल है कि वह गैरसत्यापित कर्मी को सेवा से हटा सकता है।
पीठ ने सेना की इस दलील को स्वीकार कर लिया और कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में डिस्चार्ज आदेश को इस बिना रद्द कर गंभीर गलती की है कि सिपाही को अपना पक्ष रखने को मौका नहीं दिया गया। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि सेना एक्ट, 1950 के प्रावधान 16, 17 गैर सत्यापित कर्मचारी को बिना नोटिस दिए सेवा से निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि देसवाल को सैनिक के रूप में नियमित नियुक्ति भी नहीं दी गई थी, वह एक प्रोबेशनर यानी परिवीक्षाधीन कर्मी थी और कमांडिंग आफिसर को यह शक्ति थी कि वह सेना नियम 13(3) के तहत उसे सेवा से हटा दे।

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