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मानव तस्करी रोकेगी विशेष जांच एजेंसी!

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मानव तस्करी के लिए ''ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्स बिल 2016'' का प्रारूप तैयार किया है।

मानव तस्करी रोकेगी विशेष जांच एजेंसी!

नई दिल्ली. केंद्र सरकार मानव तस्करी रोकने के लिए एक विशेष जांच एजेंसी बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसका ढांचा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जैसा हो सकता है। यह अवैध मानव तस्करी जैसे सभी मामलों की जांच करेगी। अभी इस बाबत सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इसके लिए 'ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्शन एंड रिहेबीलिटेशन) बिल 2016' का प्रारूप तैयार किया है।

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प्रारूप को जारी करते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि इसमें हमने एक प्रावधान अवैध मानव तस्करी को रोकने को लेकर एक राष्ट्रीय स्तर की विशेष जांच एजेंसी बनाने का भी रखा है। आने वाले एक महीने में इस प्रारूप पर विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और अन्य सभी हितधारकों से सार्वजनिक और ऑनलाइन सुझाव मंगवाए जाएंगे। इसके बाद ही प्रारूप को अंतिम रूप देकर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

उन्होंने संभावना जताई कि इस वर्ष के अंत तक यानि दिसंबर माह तक इस बिल को संसद की मंजूरी दिलाकर कानून की शक्ल में तब्दील किया जा सकता है। प्रारूप में मानव तस्करी के लिए 7 से 10 साल तक की जेल के प्रावधान को भी शामिल किया गया है।

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सभी तरह की तस्करी रोकने में मददगार
इस प्रारूप के जरिए सभी तरह की तस्करी को एक कानून के तहत लाने की कोशिश की जा रही है। इसे आईपीसी की धारा 370 से 373 के तहत लाया गया है। तस्करी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। संगठित अपराधों के मामले में ड्रग्स व हथियारों की तस्करी के बाद यह तीसरा बड़ा संगठित अपराध है। कानून के तहत प्लेसमेंट एजेंसियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
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