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1984 सिख दंगा : न्याय की मांग कर रहे सिखों ने जंतर-मंतर पर निकाला कैंडल मार्च

30 साल बाद भी सिख परिवारों को इंसाफ और न्याय के लिए लड़ना पड़ रहा है।

1984 सिख दंगा : न्याय की मांग कर रहे सिखों ने जंतर-मंतर पर निकाला कैंडल मार्च
नई दिल्ली. दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने 1984 के पीड़ित सिख परिवारों ने बृहस्पतिवार को कैंडल मार्च निकाला। शिरोमणी अकाली दल बादल के दिल्ली प्रदेश व गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी के के नेतृत्व में बंगला साहिब से जंतर-मंतर तक मार्च निकाला गया। इस दौरान सैंकड़ों लोगों ने मार्च में हिस्सा लिया।

मार्च में मौजूद लोगों ने हाथों में सज्जनकुमार और जगदीश टाईटल्र को फांसी देने की मांग करने वाली तख्तियां पकड़ी हुई थी। कैंडल मार्च के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए जी के ने कहा कि 30 साल बाद भी सिख परिवारों को इंसाफ और न्याय के लिए लड़ना पड़ रहा है।

क्या था मामला
दिल्ली में खासकर मध्यम और उच्च मध्यमवर्गीय सिख इलाकों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया। राजधानी के लाजपत नगर, जंगपुरा, डिफेंस कॉलोनी, फ्रेंड्स कॉलोनी, महारानी बाग, पटेल नगर, सफदरजंग एनक्लेव, पंजाबी बाग आदि कॉलोनियों में हिंसा का तांडव रचा गया। गुरुद्वारों, दुकानों, घरों को लूट लिया गया और उसके बाद उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।

अब इस घटना को लगभग ढाई दशक से ज्यादा वक्त हो चुका है। इस मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट द्वारा अप्रैल में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी कर दिए जाने के बाद से दंगा पीड़ितों के जख्म एक बार फिर हरे हो गए हैं। इससे पहले कोर्ट ने कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए टाइटलर की भूमिका की जांच दोबारा से करने का आदेश दिया था।

सिख दंगों के सिलसिले में अब तक 10 विभिन्न कमीशनों और समितियों का गठन हो चुका है जिसके नतीजे में कई पुलिसवालों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की सिफारिश भी की गई थी लेकिन कुल 12 कत्ल के मामलों में अब तक 30 लोगों का ही अदालत में अपराध सिद्ध हुआ है। लेकिन बेगुनाह लोगों की मौत का इंसाफ अभी तक नहीं मिल सका है जो कि बड़े दुर्भाग्य की बात है।

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