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बड़े डीजल वाहनों पर लगा प्रतिबंध लिया वापस

रजिस्ट्रेशन के लिए देना होगा एक फीसदी ग्रीन टैक्स

बड़े डीजल वाहनों पर लगा प्रतिबंध लिया वापस
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुकवार को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दो हजार सीसी और इससे अधिक की इंजन क्षमता वाली आलीशान डीजल कारों और एसयूवी के पंजीकरण पर लगी रोक इस शर्त पर हटा दी कि इन वाहनों के एक्स शोरूम दाम के एक प्रतिशत कीमत का भुगतान हरित उपकर के रूप में करना होगा।
शीर्ष अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण राशि के रूप में देय एक प्रतिशत राशि का भुगतान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को किया जाएगा, जो किसी सार्वजनिक उपक्रम के बैंक में एक अलग खाता खोलेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश ऑटोमोबाइल कंपनियों की याचिका पर आया है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वाहनों का पंजीकरण क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी द्वारा इस शर्त पर किया जाएगा कि वाहन की कीमत की एक प्रतिशत राशि वाहन के निर्माता, डीलर, उप-डीलर द्वारा बोर्ड के पास जमा कराई गई है। हालांकि, प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की इस आपत्ति को फैसले के लिए खुला छोड़ा कि अदालत द्वारा इस तरह का कर नहीं लगाया जा सकता।
पीठ ने कहा कि वह इस बारे में फैसला बाद में करेगी कि दो हजार सीसी से कम की इंजन क्षमता वाले डीजल वाहनों पर हरित उपकर लगाया जा सकता है या नहीं। पीठ ने 16 दिसंबर 2015 के अपने आदेश में संशोधन के बाद यह निर्देश जारी किया।
इस आदेश को 31 मार्च 2016 को बढ़ाया गया था। इससे पहले शीर्ष अदालत ने वाहनों के पंजीकरण पर पाबंदी से बचने के लिए कार निर्माता र्मसिडीज बेंज के एक प्रतिशत पर्यावरण उपकर देने के प्रस्ताव पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी।
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