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RIP: कैसे कह दें मशहूर कवि नीलाभ को अलविदा

साहित्य जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है।

RIP: कैसे कह दें मशहूर कवि नीलाभ को अलविदा
नई दिल्ली. मशहूर कवि और वरिष्ठ पत्रकार नीलाभ अश्क का लंबी बीमारी के बाद शनिवार की सुबह दिल्ली के बुराड़ी स्थित घर पर निधन हो गया है। बीमारी के दौरान नीलाभ अपने शुभचिंतकों को इस बात का सांत्वना देते रहे कि वह जल्द ही ठीक हो जाएंगे, लेकिन शनिवार की सुबह ने उनको हमेशा के लिए खामोश कर दिया।

70 वर्षीय नीलाभ बीबीसी की विदेश प्रसारण सेवा में बतौर प्रोड्यूसर काम कर चुके थे और उन्होंने शेक्सपियर, ब्रेख्त और लोर्का के नाटकों का हिंदी में बेहतरीन अनुवाद किया था। अरुंधति राय के बुकर विजेता उपन्यास 'द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स' का हिंदी अनुवाद भी उन्होंने ही किया था। नीलाभ हिंदी के प्रख्यात लेखक उपेंद्र नाथ अश्क के पुत्र थे।

नीलाभ अश्क का जन्‍म 16 अगस्‍त 1945 को मुंबई में हुआ था। वे मूलत: इलाहाबाद के रहने वाले थे हालांकि बाद में दिल्ली में आकर बस गए। एम.ए. तक की उनकी पढ़ाई भी उन्होंने इलाहबाद से ही पूरी की। पढ़ाई के बाद सबसे पहले नीलाभ प्रकाशन के पेशे से जुड़े और बाद में उन्होंने पत्रकारिता को अपनाया। 1980 में वो बीबीसी की विदेश प्रसारण सेवा में प्रोड्यूसर हुए और चार साल तक लंदन में रह कर काम किया।

1984 में स्वदेश वापसी के बाद वो पुनः लेखन और प्रकाशन कार्य से जुड़ गए। लंदन के अनुभवों पर उन्‍होंने लंदन डायरी सीरिज में 24 कविताएं लिखीं। इसके आलावा उनके कई मशहूर कविता संग्रह भी छपे जिनमें 'अपने आप से लम्बी बातचीत', 'जंगल खामोश है', 'उत्तराधिकार', 'चीजें उपस्थित हैं', 'शब्दों से नाता अटूट है', 'शोक का सुख', 'खतरा अगले मोड़ की उस तरफ है' और 'ईश्वर को मोक्ष' प्रमुख हैं। इसके आलावा उन्होंने 'हिंदी साहित्य का मौखिक इतिहास' नाम की एक चर्चित किताब भी लिखी थी।

नीलाभ ने जीवनानन्द दास, सुकान्त भट्टाचार्य, एजरा पाउण्ड, ब्रेख्त, ताद्युश रोजश्विच, नाजिम हिकमत, अरनेस्तो कादेनाल, निकानोर पार्रा और पाब्लो नेरूदा की कविताओं का भी अनुवाद किया है। उन्होंने बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका अरुंधति राय के उपन्यास 'गॉड आफ स्माल थिंग्स' और लेर्मोन्तोव के उपन्यास का 'हमारे युग का एक नायक' नाम से अनुवाद किया है।

नीलाभ रंगमंच, टेलीविजन, रेडियो, पत्रकारिता, फिल्म, ध्वनि-प्रकाश कार्यक्रमों और नृत्य-नाटिकाओं के लिए पटकथाएं और आलेख भी लिखते थे। वर्तमान में वो राष्ट्रीय नाट्यविद्यालय की पत्रिका 'रंग प्रसंग' के संपादक के तौर पर कार्यरत थे। नीलाभ हिन्दी ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय थे। अपने ब्लॉग 'नीलाभ का मोर्चा' पर वो आत्मसंस्मरण भी लिख रहे थे।

साहित्य जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने उनके निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि नीलाभ हिन्दी के क्रांतिकारी कवि थे। उनसे साहित्य को बहुत उम्मीदें थी। उनके निधन का मुझे बहुत दुख है। मशहूर साहित्यकार मंगलेश डबराल ने उन्हें बहुत प्रतिभाशाली साहित्यकर्मी बताते हुए कहा कि आज के समय में विरले ही चार भाषाओं हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी और पंजाबी के जानकार मिलते हैं और नीलाभ उनमें से एक थे।
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