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ईडब्ल्यूएस दाखिला प्रक्रिया से नाखुश बाल आयोग

बाल आयोग ने सभी स्कूलों को नोटिस भेजा है।

ईडब्ल्यूएस दाखिला प्रक्रिया से नाखुश बाल आयोग
नई दिल्ली. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के बच्चों के साथ ईडब्ल्यूएस दाखिला श्रेणी में भेदभाव की शिकायतें मिलने के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) दोषी स्कूलों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। इसमें देश की राजधानी दिल्ली पहले स्थान पर है, जिसे लेकर आयोग को काफी शिकायतें मिल रही हैं।
दिल्ली से सबसे ज्यादा शिकायतें
आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने हरिभूमि से बातचीत में कहा कि हमने दिल्ली के सभी निजी स्कूलों को आयोग को वो डेटा देने को कहा है, जिसमें उनके द्वारा बीते पांच वर्षों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत दाखिले किए गए। दिल्ली से ही ईडब्ल्यूएस को लेकर सबसे ज्याद शिकायतें आयोग को मिल रही हैं। मध्य-प्रदेश और राजस्थान में आरटीई कानून के इस प्रावधान का अच्छे ढंग से पालन किया जा रहा है। लेकिन इन दोनों राज्यों में सरकार की ओर से स्कूलों को एडमिशन राशि की अदायगी (रिंबर्समेंट) मिलने में दिक्कत हो रही है। हिमाचल प्रदेश के स्कूलों ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी में एडमिशन देना शुरू नहीं किया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में आयोग को अभी सुधार की काफी गुंजाइश नजर आ रही है।
सैंपल जांच की तैयारी
आयोग ने बीते पांच सालों का जो डेटा मांगा है। उसे जांचने के लिए डेटा क्वालिटी काउंसिल को भेजा जाएगा। इसके बाद इसकी सैंपल जांच की जाएगी। दिल्ली में करीब 1700 निजी स्कूल हैं। ईडब्ल्यूएस श्रेणी में इन स्कूलों ने जिन बच्चों को दाखिला दिया है उन्हें ट्रेस किया जाएगा और यह देखा जाएगा कि इसमें कितने दाखिले फर्जी किए गए हैं। दिल्ली में फर्जी एडमिशन को लेकर भी आयोग के पास कुछ शिकायतें आई हैं। साथ ही यह भी शिकायत आ रही है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में दाखिला लेने वाले बच्चों के साथ भेदभाव किया जाता है। कुछ नामी निजी स्कूलों में इन बच्चों को अलग बिल्डिंग में बिठाकर अलग शिक्षकों द्वारा पढ़ाए जाने के तथ्य का भी खुलासा हुआ है। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में हर स्कूल को प्रति ईडब्ल्यूएस छात्र को 14 हजार रूपए देती है। इसके बाद भी गरीब बच्चों के साथ भेदभाव हो रहा है।
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