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प्रदूषण टैक्स वसूली पर निगम ने खड़े किए हाथ, कोर्ट जाने की तैयारी

शर्मा ने कहा कि यह सही नहीं है, हम न्यायालय को बताएंगे कि ऐसा होने से निगम को बुरी तरह घाटे का सामना करना पड़ेगा।

प्रदूषण टैक्स वसूली पर निगम ने खड़े किए हाथ, कोर्ट जाने की तैयारी

नई दिल्ली. न्यायालय के एक आदेश के बाद डीजल वाहनों से दिल्ली में प्रवेश करने पर प्रदूषण टैक्स वसूलने से निगमों ने हाथ खड़े कर दिए है। सभी टोल नाकों पर प्रदूषण टैक्स वसूलने में आने वाली परेशानियों को लेकर नोडल एजेंसी दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने न्यायालय का रुख किया है, जहां टैक्स वसूली को लेकर अपना पक्ष रखेगी। निगमों को डर है कि वाहनों से प्रदूषण टैक्स वसूलने से कहीं बाहरी राज्यों के वाहन दिल्ली में प्रवेश करना ही ना छोड़ दे, अगर ऐसा हुआ तो उनको टोल टैक्स वसूली में भारी कमी आएगी जिससे टोल वसूली करने वाली कंपनी अपने घाटे को पूरा करने के लिए निगम के पैसे काटेगी।

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इस मुददे पर समिति अध्यक्ष राधेश्याम शर्मा ने कहा कि निगम के सभी 157 टोल नाकों से टैक्स वसूलने के लिए जिस कंपनी को 448 करोड़ में ठेका दिया हुआ है उससे अनुबंध में यह तय नहीं हुआ था कि प्रदूषण टैक्स भी वसूलेगी। अब अगर अनुबंधित कंपनी इसे वसूलती है तो इसके लिए अन्य संसाधनों को लगाना होगा जिस पर अतिरिक्त खर्च पड़ेंगा, इसका भुगतान कौन करेगा। जबकि प्रदूषण टैक्स वसूली की पूरी रकम दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(डीपीसीसी) को मिलेगी।
शर्मा ने कहा कि यह सही नहीं है, हम न्यायालय को बताएंगे कि ऐसा होने से निगम को बुरी तरह घाटे का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि निगम अपील करेगी कि प्रदूषण टैक्स वसूली से मिलने वाली राशि का उचित हिस्सा दक्षिणी निगम को भी मिलना चाहिए जिससे वह अपने सभी खर्चें पूरे कर सके। उन्होंने बताया कि निगम भी दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए काम करती है कई योजनाएं चल रही है, इसलिए अगर प्रदूषण टैक्स का हिस्सा मिला तो और बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है।
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